Indians Taking Too Much Salt: हृदय रोगों के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते जा रहे है। कुछ दशकों पहले तक इसे बुढ़ापे की बीमारी माना जाता था, हालांकि अब कम उम्र के लोग यहां तक कि 20 से कम उम्र में लोग न सिर्फ हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं, बल्कि बड़ी संख्या में इससे लोगों की मौतें भी हो रही हैं।
Alert: भारतीयों की ये एक गड़बड़ आदत बनती जा रही है 'साइलेंट महामारी' का कारण, ICMR की सख्त चेतावनी
- आईसीएमआर के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने कहा, भारत में लोग बहुत ज्यादा नमक खा रहे हैं। अत्यधिक नमक का सेवन भारत में एक साइलेंट महामारी को बढ़ावा दे रहा है।
'भारतीय लोग खा रहे हैं बहुत ज्यादा नमक'
आईसीएमआर के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने कहा, भारत में लोग बहुत ज्यादा नमक खा रहे हैं। अत्यधिक नमक का सेवन भारत में एक साइलेंट महामारी को बढ़ावा दे रहा है। इससे न केवल हृदय रोगों का खतरा रहता है बल्कि ये आदत उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक और किडनी की बीमारियों को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।
वैज्ञानिकों ने इस समस्या के समाधान के लिए समुदाय-आधारित नमक का सेवन कम करने को लेकर अध्ययन शुरू किया है, जिसमें लो सोडियम वाले नमक के विकल्पों पर ध्यान केंद्रित कर उन्हें बढ़ावा देने पर विचार किया जा रहा है।
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कितना नमक खाना सेहत के लिए ठीक?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सुझावों पर गौर करें तो इसके मुताबिक प्रति व्यक्ति को दिन में 5 ग्राम से कम ही नमक का सेवन करना चाहिए। हालांकि अध्ययनों से पता चलता है कि शहरी क्षेत्रों में भारतीय लोग रोजाना लगभग 9.2 ग्राम नमक खा रहे हैं। इतना ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में भी यह लगभग 5.6 ग्राम/दिन है। ये दोनों ही अनुशंसित मात्रा से कहीं ज्यादा हैं।
राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (एनआईई) के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अध्ययन के प्रमुख अन्वेषक डॉ. शरण मुरली ने कहा, हम उस तरीके पर विचार कर रहे है जिससे सोडियम क्लोराइड के एक हिस्से को पोटेशियम या मैग्नीशियम लवणों से बदल दिया जाता है।
क्या कहते हैं विशेेषज्ञ?
प्रमुख अध्ययनकर्ता डॉ. शरण मुरली ने कहा, लो सोडियम का सेवन रक्तचाप को कम करने और समग्र हृदय स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करता है। सिर्फ लो सोडियम वाले नमक पर स्विच करने से रक्तचाप औसतन 7/4 mmHg तक कम हो सकता है, यह एक छोटा सा बदलाव है जिसका बड़ा प्रभाव पड़ता है।
अधिक नमक के सेवन की समस्या से निपटने के लिए, एनआईई ने आईसीएमआर के सहयोग से पंजाब और तेलंगाना में तीन साल की एक परियोजना शुरू की है। इसका लक्ष्य स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों (एचडब्ल्यूसी) में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा दिए लोगों को नमक का सेवन कम करने के लिए जागरूक करना है।
आहार, शरीर और हृदय में संतुलन बनाना जरूरी
डॉ. मुरली ने कहा, यह केवल नमक कम करने के बारे में नहीं है। यह हमारे आहार, हमारे शरीर और हमारे हृदय में संतुलन बनाए रखने के बारे में भी है। साथ मिलकर, नमक का सेवन कम करके हम स्थायी बदलाव ला सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर हम सभी आज से ही नमक खाना कम कर दें तो भविष्य में हृदय रोगों के खतरे से काफी हृद तक बचाव हो सकता है। नमक कम खाने का मतलब सिर्फ भोजन में नमक कम डालने से नहीं है, चिप्स-नमकीन और जंक फूड्स में भी हिडेन नमक होता है इसपर भी हमें विशेष ध्यान देना चाहिए।
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