पिछले एक-दो दशक के आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाए तो स्पष्ट होता है कि गत 20 साल में लोगों की जीवन प्रत्याशा में काफी कमी आई है। जीवन प्रत्याशा का मतलब हमने अब तक जितनी जिंदगी जी ली और इसके बाद जितना शेष है,उसके औसत से है। घटते जीवन प्रत्याशा के कारणों पर गौर करें तो इसके लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई कारकों को जिम्मेदार मानते हैं, जिसमें से बढ़ता वायु प्रदूषण एक है। वायु प्रदूषण जनित कई तरह की गंभीर बीमारियों ने लोगों की औसत आयु को कम कर दिया है, आने वाले दिनों में इससे होने वाले गंभीर जोखिमों का खतरा और भी बना हुआ है।
चेतावनी: वायु प्रदूषण के कारण करीब 8 साल तक कम होती जा रही है औसत आयु, दिल्लीवासियों के लिए सबसे ज्यादा खतरा
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उत्तर भारतीय लोगों के लिए बड़ा संकट
वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक (एक्यूएलआई) के हालिया विश्लेषण के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण भारतीय लोगों की औसत जीवन प्रत्याशा पांच साल तक हो गई है। उत्तर भारत के इलाकों में इसका जोखिम और अधिक देखा जा रहा है। शोध से पता चलता है कि इस हिस्से में रहने वाली 510 मिलियन से अधिक की आबादी, जो कि देश की कुल आबादी का लगभग 40 प्रतिशत है उनके लिए खतरा बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रदूषण का स्तर अभी की ही तरह बना रहता है तो इस आबादी की औसतन जीवन प्रत्याशा 7.6 वर्ष तक कम हो सकती है।
भारत, दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित देश
वैश्विक स्तर पर वायु प्रदूषण को लेकर किए गए विश्लेषण में शोधकर्ताओं ने बताया कि बांग्लादेश के बाद भारत, दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित देश है। इतना ही नहीं देश के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर बहुत ही बुरा है। अध्ययन के अनुसार दिल्ली दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहने वाले लोगों की औसत आयु 10 साल तक कम होती जा रही है।
इसी तरह से देश के कई अन्य राज्यों का हाल भी बहुत बुरा है। शोधकर्ताओं ने बताया कि भारत की बड़ी आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती हैं जहां का 'एनुअल एवरेज पार्टिकल पॉल्यूशन' डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों से कहीं अधिक है, इसका सीधे तौर पर सेहत को असर हो रहा है।
धूम्रपान से कहीं अधिक हानिकारक है वायु प्रदूषण
अध्ययन में बताया गया है कि भारत की 63 प्रतिशत से अधिक आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जहां की वायु गुणवत्ता राष्ट्रीय मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक है। जीवन प्रत्याशा के संदर्भ में देखा जाए तो इसका बढ़ना मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है। ऐसे इलाकों में लंबे समय तक रहने वाले लोगों की औसत आयु 5 साल तक कम होती देखी जा रही है। धूम्रपान के कारण विशेषज्ञ जहां जीवन प्रत्याशा को 1.5 वर्ष कम होता मानते हैं, वहीं वायु प्रदूषण के कारण यह 1.8 वर्ष के करीब देखी जा रही है।
दक्षिण एशियाई देशों में सबसे ज्यादा खतरा
अध्ययन के निष्कर्ष में विशेषज्ञों ने बताया कि वायु प्रदूषण के कारण जितना बड़ा संकट दक्षिण एशिया में देखा जा रहा है, ऐसा और कहीं नहीं है। यदि प्रदूषण का मौजूदा उच्च स्तर कुछ वर्षों तक ऐसे ही बना रहता है तो आने वाले वर्षों में इसके और भी घातक परिणाम देखे जा सकते हैं। यह कई तरह की महामारी और बीमारी को बढ़ावा देने के साथ लोगों की औसत आयु को घटाता ही जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते इस खतरे से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है, यह मानव अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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