{"_id":"6a97daaa27aeedc8d10dfe33","slug":"what-is-indoor-air-pollution-in-hindi-is-indoor-air-pollution-worse-than-outdoor-2026-09-02","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"घर के अंदर की हवा बाहर से भी ज्यादा प्रदूषित हो सकती है? जानिए Indoor Air Pollution का असर","category":{"title":"Health & Fitness","title_hn":"हेल्थ एंड फिटनेस","slug":"fitness"}}
घर के अंदर की हवा बाहर से भी ज्यादा प्रदूषित हो सकती है? जानिए Indoor Air Pollution का असर
Wed, 02 Sep 2026 02:46 PM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Wed, 02 Sep 2026 02:46 PM IST
सार
Indoor vs Outdoor Air Pollution: हम सभी को ये समझने की जरूरत है कि घर के बाहर की हवा, घर के अंदर की हवा से ज्यादा जहरीली मानी जाती है। ऐसा क्यों है और इससे बचाव के तरीके क्या हैं, आइए जानते हैं।
विज्ञापन
घर के अंदर की हवा बाहर से भी ज्यादा प्रदूषित हो सकती है?
- फोटो : AI
Indoor vs Outdoor Air Pollution: जब हम प्रदूषण की बात करते हैं तो अक्सर सड़क, ट्रैफिक और फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं को इसका जिम्मेदार मानते हैं। लेकिन जिस घर को हम सुरक्षित जगह समझते हैं, वहां की हवा भी कई बार सेहत के लिए चिंता का कारण बन सकती है।
घर के अंदर की हवा बाहर से भी ज्यादा प्रदूषित हो सकती है?
- फोटो : AI
घर की प्रदूषित हवा से सेहत पर क्या असर पड़ सकता है?
1. सांस से जुड़ी समस्याएं
घर के अंदर धुआं और बारीक प्रदूषक कण मौजूद रहने पर सांस की नली में जलन हो सकती है। कुछ लोगों में खांसी, सांस फूलना या गले में खराश जैसी परेशानी देखने को मिल सकती है।
2. अस्थमा के मरीजों के लिए परेशानी
धूल, फफूंद, धुआं और दूसरे इंडोर पॉल्यूटेंट्स कुछ लोगों में अस्थमा के लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं। ऐसे लोगों के लिए घर की हवा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
1. सांस से जुड़ी समस्याएं
घर के अंदर धुआं और बारीक प्रदूषक कण मौजूद रहने पर सांस की नली में जलन हो सकती है। कुछ लोगों में खांसी, सांस फूलना या गले में खराश जैसी परेशानी देखने को मिल सकती है।
2. अस्थमा के मरीजों के लिए परेशानी
धूल, फफूंद, धुआं और दूसरे इंडोर पॉल्यूटेंट्स कुछ लोगों में अस्थमा के लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं। ऐसे लोगों के लिए घर की हवा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
घर के अंदर की हवा बाहर से भी ज्यादा प्रदूषित हो सकती है?
- फोटो : AI
3. एलर्जी और आंखों में जलन
धूल, पालतू जानवरों से जुड़े एलर्जेंस और फफूंद जैसे कारक संवेदनशील लोगों में छींक, नाक बहना, आंखों में पानी या जलन जैसी समस्या पैदा कर सकते हैं।
4. बच्चों की सेहत पर असर
बच्चों का श्वसन तंत्र विकसित हो रहा होता है, इसलिए इंडोर एयर पॉल्यूशन को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। घर में धूम्रपान और लगातार धुएं के संपर्क से बच्चों को दूर रखना महत्वपूर्ण है।
धूल, पालतू जानवरों से जुड़े एलर्जेंस और फफूंद जैसे कारक संवेदनशील लोगों में छींक, नाक बहना, आंखों में पानी या जलन जैसी समस्या पैदा कर सकते हैं।
4. बच्चों की सेहत पर असर
बच्चों का श्वसन तंत्र विकसित हो रहा होता है, इसलिए इंडोर एयर पॉल्यूशन को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। घर में धूम्रपान और लगातार धुएं के संपर्क से बच्चों को दूर रखना महत्वपूर्ण है।
विज्ञापन
विज्ञापन
घर के अंदर की हवा बाहर से भी ज्यादा प्रदूषित हो सकती है?
- फोटो : AI
5. सिरदर्द और बेचैनी
खराब वेंटिलेशन और कुछ इंडोर पॉल्यूटेंट्स के संपर्क में रहने पर कुछ लोगों को सिरदर्द, चक्कर या असहजता महसूस हो सकती है। अगर ऐसी परेशानी बार-बार होती है, तो इसके संभावित कारणों पर ध्यान देना चाहिए।
6. लंबे समय तक एक्सपोजर की चिंता
लगातार और लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए समस्या होने का इंतजार करने के बजाय घर की इंडोर एयर क्वालिटी बेहतर रखना जरूरी है।
खराब वेंटिलेशन और कुछ इंडोर पॉल्यूटेंट्स के संपर्क में रहने पर कुछ लोगों को सिरदर्द, चक्कर या असहजता महसूस हो सकती है। अगर ऐसी परेशानी बार-बार होती है, तो इसके संभावित कारणों पर ध्यान देना चाहिए।
6. लंबे समय तक एक्सपोजर की चिंता
लगातार और लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए समस्या होने का इंतजार करने के बजाय घर की इंडोर एयर क्वालिटी बेहतर रखना जरूरी है।
विज्ञापन
घर के अंदर की हवा बाहर से भी ज्यादा प्रदूषित हो सकती है?
- फोटो : AI
किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और अस्थमा/एलर्जी या अन्य सांस संबंधी समस्याओं वाले लोग इंडोर एयर पॉल्यूशन के प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। ऐसे लोगों के कमरे में धुआं, धूल और फफूंद को नियंत्रित रखना विशेष रूप से जरूरी है।
--------------------------------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और अस्थमा/एलर्जी या अन्य सांस संबंधी समस्याओं वाले लोग इंडोर एयर पॉल्यूशन के प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। ऐसे लोगों के कमरे में धुआं, धूल और फफूंद को नियंत्रित रखना विशेष रूप से जरूरी है।
--------------------------------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।