कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के म्यूटेटेड वर्जन JN.1 के कारण पिछले कुछ हफ्तों से दैनिक संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे थे, हालांकि रविवार को जारी आंकड़ों में इसमें थोड़ा सुधार देखा गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा साझा की गई कोरोना के जानकारियों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में देश में 375 लोगों में संक्रमण की पुष्टि की गई है, दो लोगों के मौत के मामले भी सामने आए हैं।
कोविड-19: संक्रमण के दैनिक मामलों में हुआ सुधार पर JN.1 का प्रसार चिंताजनक, रोगियों के इलाज के लिए नई गाइडलाइन
संक्रमण से रिकवरी की दर 98.81 प्रतिशत
कोरोना संक्रमण को लेकर प्राप्त हो रही जानकारियों के मुताबिक ज्यादातर रोगियों में हल्के लक्षण ही देखे जा रहे हैं। संक्रमण के शिकार अधिकतर लोगों में एसिम्टोमेटिक लक्षण हैं और ज्यादतर लोग घर पर ही आसानी से ठीक हो रहे हैं। मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, महामारी से लेकर अब तक इस बीमारी से ठीक होने वाले लोगों की संख्या 4.4 करोड़ से अधिक है, फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर रिकवरी की दर 98.81 प्रतिशत है, जो काफी राहत देती है।
देश में फिलहाल कोरोना के 3000 से अधिक सक्रिय मामलों में से अधिकांश (लगभग 92 प्रतिशत) सेल्फ आइसोलेशन और सामान्य उपचार से ठीक हो रहे हैं।
इलाज के लिए नए दिशा निर्देश जारी
इस बीच कोरोना के नए वैरिएंट के बढ़ते मामलों को देखते हुए महाराष्ट्र में रोगियों के इलाज को लेकर नए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। मुंबई कोविड टास्क फोर्स का कहना है कि नए दिशानिर्देशों में एसिम्टोमेटिक रोगियों के लिए बहुत जरूरत होने पर ही एंटीवायरल दवा के उपयोग की सलाह दी गई है। राज्य कोविड टास्क फोर्स ने उपचार की नई गाइडलाइंस में कहा, बिना लक्षण या जटिलताओं वाले कोविड-19 रोगियों को एंटीवायरल दवाओं की आवश्यकता नहीं है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, जिन संक्रमितों को कोमोरबिडिटी की शिकायत रही है, उन्हें उपचार के अन्य उपायों के साथ आवश्यकता पड़ने पर रेमेडिसविर दवा दी जा सकती है। वहीं अगर रोगी को कोई और संक्रमण न हो तो उसे एंटीबायोटिक दवाएं बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए।
एंटीवायरल दवाओं के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन
एंटीवायरल के बेतरतीब इस्तेमाल के खिलाफ सलाह देते हुए टास्क फोर्स ने कहा है कि ज्यादातर मरीजों का इलाज सामन्य दवाओं से किया जा सकता है और वे ठीक भी हो रहे हैं। एंटीवायरल का उपयोग केवल तभी किया जाना चाहिए जब लक्षण लगातार बने रहें या जटिलताएं बढ़ रही हों।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया, वर्तमान में उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि JN.1 वैरिएंट न तो गंभीर मामलों का कारण बन रहा है और न ही इससे अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु दर का ज्यादा जोखिम है। अगर सावधानी बरती जाए और कोरोना से बचाव के उपायों का पालन किया जाए तो इस नए वैरिएंट के प्रसार को रोका जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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