भारत में कोरोना की रफ्तार बढ़ती हुई देखी जा रही है, विशेषकर कोरोना के नए सब-वैरिएंट के कारण पिछले एक महीने में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी दैनिक आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में 609 लोगों को संक्रमण का शिकार पाया गया है, साथ ही तीन मौतें भी दर्ज की गई हैं। वहीं जिस गति से देश में JN.1 वैरिएंट के मामले बढ़ रहे हैं, वो विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा रहे हैं। देखते ही देखते देश में इस नए वैरिएंट से संक्रमितों का आंकड़ा 1200 को पार कर गया है।
कोरोना संकट: JN.1 वैरिएंट से संक्रमण का आंकड़ा 1200 पार, क्या यहां भी बढ़ रहा है सिंगापुर-अमेरिका जैसा खतरा?
17 राज्यों में फैल चुका है नया वैरिएंट
देश के 17 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में JN.1 वैरिएंट के कारण संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। नए वैरिएंट से संक्रमितों की कुल संख्या 1200 है। केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कोविड मामलों में वृद्धि और नए वैरिएंट के केस पर गंभीरता से निगरानी बनाए रखने के लिए कहा है। राज्यों से आग्रह किया गया है कि वे केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा साझा किए गए कोविड-19 के लिए संशोधित दिशानिर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करें, ताकि संक्रमण की रफ्तार को कम किया जा सके।
कई देशों में इस नए वैरिएंट के कारण स्थिति बिगड़ती हुई देखी गई है।
क्या कहते हैं महामारी विशेषज्ञ?
यूनाइटेड स्टेट्स स्थित वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल में संक्रामक रोगों के प्रोफेसर डॉ. विलियम शेफनर कहते हैं, दिसंबर के मध्य से यूएसए के कई अस्पातालों के आपातकालीन कक्ष में कोविड-19, इन्फ्लूएंजा और आरएसवी संक्रमण से भर्ती होने वाले लोगों की संख्या काफी बढ़ी है। कोरोना के ज्यादार संक्रमितों में JN.1 वैरिएंट से संक्रमण की पुष्टि की जा रही है। अमेरिका में ये नया सब-वैरिएंट काफी तेज गति से बढ़ा है और कम समय में अधिकतर स्टेट्स में इसके केस हो गए हैं। इस वैरिएंट की प्रकृति और संक्रामकता दर काफी अधिक है, जिसे ध्यान में रखते हुए जिन देशों में इसका प्रसार हो रहा है उन्हें विशेष सावधान हो जाने की आवश्यकता है।
अमेरिका में तेजी से बढ़ा है संक्रमण
येल मेडिसिन यूनिवर्सिटी में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ हेइडी जपाटा कहते हैं, दुनियाभर में श्वसन रोगों के मामले बढ़ रहे हैं। लोगों के लिए ये जानना सबसे महत्वपूर्ण है कि वायरस काफी संक्रामकता वाला है और किसी आबादी में तेजी से संक्रमण के प्रसार का कारण बन सकता है। सितंबर में यू.एस. में पहली बार इस सब-वैरिएंट की पुष्टि की गई थी। नवंबर के मध्य में कुल संक्रमण के 3.5% मामलों के लिए ये नया वैरिएंट कारक था। एक महीने में ही दिसंबर में ये 21% से थोड़ा अधिक हो गया और जनवरी तक ये 60% से अधिक मामलों का कारण बन गया है।
अमेरिका की तरह सिंगापुर सहित कई अन्य देशों में भी इस वैरिएंट के कारण संक्रमण के मामलों में इजाफा देखा जा रहा है।
क्या भारत में भी बिगड़ सकते हैं हालात?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस JN.1 वैरिएंट के कारण यूएसए और सिंगापुर जैसे देशों में संक्रमण की रफ्तार काफी तेजी से बढ़ी है, भारत में भी इसका प्रसार देखा जा रहा है। डेढ़ महीने के भीतर ही 1000 से अधिक लोगों में संक्रमण की पुष्टि की जा चुकी है। ये गति अलार्मिंग हो सकती है, अगर संक्रमण के प्रसार को रोका न गया तो इस वैरिएंट की प्रकृति के कारण कम समय में ही ये अधिक लोगों को बीमार कर सकता है।
फिलहाल राहत की बात ये है कि देश में वैक्सीनेशन की दर काफी अच्छी है जिसके कारण ज्यादातर लोगों में सिर्फ हल्के लक्षण ही देखे जा रहे हैं। पर कोरोना से बचाव के लिए सभी लोगों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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