एक सामान्य सी बीमारी इन दिनों लड़कियों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनती जा रही है। लड़कियों में पुरुष हार्मोन एंड्रोजन बढ़ रहा है। इसके कारण शरीर पर बाल, चेहरे पर बढ़ते मुहांसे, पीरियड का कभी आना तो कभी न आना, कम उम्र की लड़कियों में मधुमेह व बांझपन का खतरा बढ़ा रहा है। यह सब नतीजा है पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम का। चिकित्सकों का कहना है कि लखनऊ में ही हर 10 में से एक लड़की पीसीओएस है।
अनियमित जीवन शैली बना रही बीमार, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
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केजीएमयू के क्वीन मेरी अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजात देव कहती हैं कि पीसीओएस मूल रूप से युवा लड़कियों में होने वाली बीमारी है, जो जंक फूड, ओवरइटिंग और अनियमित जीवनशैली के कारण बढ़ रही है। यह एक ऐसी कंडीशन है जो आमतौर पर रिप्रोडक्टिव उम्र की महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के कारण पाई जाती है। इसमें एंड्रोजन का लेवल बढ़ जाता है।
इलाज न होने पर अंसतुलन बढ़ता जाता है और आगे चलकर बांझपन की समस्या तक पैदा कर सकता है। गर्भाशय में बहुत सारे फॉलिकल या अंडे इकट्ठे हो जाते हैं। सामान्य तौर पर हर महीने एक अंडा बड़ा होकर फूटता है, जिससे हार्मोन का संतुलन बना रहता है। यह प्रक्रिया बंद हो जाने से प्रोजोस्ट्रान का बनना बंद हो जाता है और सिर्फ एंड्रोजन की मौजूदगी परेशानी पैदा करने लगती हैं। इसका नतीजा होता है पीरियड्स का अनियमित हो जाना, चेहरे पर बाल, मुहांसे और गर्भधारण में दिक्कत। आगे चलकर कैंसर का खतरा भी पैदा हो जाता है। जितना वेट ज्यादा होगा, उतनी इंसुलिन बनेगी।
जंक फूड पीसीओडी के खतरे को बढ़ा रहा है। सॉफ्ट ड्रिंक्स का सेवन भी बंद करें। हरी सब्जियां, विटामिन बी जरूर लें। मीठा खाने से परहेज करें। डिब्बा बंद खाने को ना कहें। सही आहार, नियमित व्यायाम और लाइफस्टाइल ही इसका बेहतर इलाज है।
- समय पर मासिक धर्म न आना
- अचानक वजन बढ़ना
- ठोड़ी पर अनचाहे बाल उगना, पेट, पीठ, अंगूठों पर बाल उगना
- चिड़चिड़ा पन बढ़ते जाना
- ओवरी में सिस्ट
- चेहरे पर मुंहासे