भागदौड़ भरी जीवनशैली में लोग इतने व्यस्त हैं कि अपनी सेहत पर ध्यान ही नहीं दे पाते हैं। फास्ट फूड खाना, पूरी नींद न लेना और तनाव से भरी दिनचर्या के चलते कई तरह की बीमारियां हमें अपनी गिरफ्त में लेती जा रही हैं। इन्हीं में से एक है इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जिसे आयुर्वेद में आंत्रशोथ कहा जाता है।
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हाजमा खराब तो फाइबर वाला भोजन करें, इन बातों का रखें ध्यान
Tue, 03 Sep 2019 04:32 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Tue, 03 Sep 2019 04:32 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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डॉ एस.के. पांडेय
- फोटो : amar ujala
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉ. एसके पांडेय का कहना है कि यह पाचन तंत्र से जुड़ी समस्या है। बढ़िया सेहत के लिए अच्छी पाचन शक्ति जरूरी है। सुबह ठीक से पेट साफ होना, स्वस्थ होने की सबसे बड़ी निशानी है। आईबीएस बड़ी आंत को प्रभावित करता है। इसमें बड़ी आंत में सूजन के कारण इसकी गति धीमी हो जाती है। इसका असर हमारी पाचन शक्ति पर पड़ता है। सबसे बड़ी बात है कि जांच में कहीं भी यह पता नहीं चल पाता और लोग कभी-कभी ताउम्र परेशान रहते हैं।
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कैसे पहचानें आइबीएस को
यह एक प्रकार का इंफेक्शन है, जो ज्यादातर दूषित पानी के कारण होता है। इसके सबसे सामान्य लक्षण हैं पेट में दर्द या मरोड़, पेट का फूलना, गैस बनना, डायरिया या कब्ज, स्टूल में म्यूकस, मल त्याग करने की आदतों में बदलाव। इसमें एक बार में पेट कभी भी साफ नहीं होता है। यही इसकी सबसे बड़ी पहचान भी है। यदि वजन कम हो जाए या स्टूल के साथ खून आने लगे तो डॉक्टर से मिलें।
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इन बातों का रखें ध्यान
चाय, कॉफी, अल्कोहल या प्रॉसेस्ड फूड से बचें, दूध, राजमा, छोला मूंगफली और खोए की बनी चीजों का इस्तेमाल बंद करें। फाइबर वाली डाइट लें। गाजर, चुकंदर, प्याज और टमाटर का सलाद लें। सादा खाना जैसे दाल-चावल-रोटी और मट्ठा ले सकते हैं। पूरी नींद लें, नियत समय पर खाएं, खाने को अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाएं, तैलीय व मसालेदार भोजन से बचें। लंच के बाद आराम व डिनर के बाद थोड़ा टहलें। तनाव दूर करने के लिए थोड़ा व्यायाम व योगाभ्यास करें। यह एक ऐसी समस्या है जो आम आदमी की दिनचर्या को प्रभावित कर देती है, इसलिए थोड़ी सी सावधानी आपको आराम देगी।
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इनका सेवन देगा राहत
हरित की चूर्ण, ईसबगोल भूसी और पुनर्नवा का चूर्ण बनाकर सुबह और शाम इसका सेवन करें। बेल के चूर्ण का प्रयोग भी फायदेमंद है। अमरूद, पपीता, अनार भी पेट के लिए राहत देने वाले फल हैं।
हरित की चूर्ण, ईसबगोल भूसी और पुनर्नवा का चूर्ण बनाकर सुबह और शाम इसका सेवन करें। बेल के चूर्ण का प्रयोग भी फायदेमंद है। अमरूद, पपीता, अनार भी पेट के लिए राहत देने वाले फल हैं।