Medically Reviewed by Ms. Priya Pandey
डायटिशियन (आहार विशेषज्ञ), उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- बी.एस.सी. (मानव पोषण)
अनुभव- 8 वर्ष
कोरोना वायरस से बचाव के लिए एक मई से 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों के टीकाकरण की शुरुआत तो हो चुकी है, लेकिन चूंकि अभी पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन देश में उपलब्ध नहीं है, जिसकी वजह से कई राज्यों में फिलहाल 18 साल से ऊपर वालों के टीकाकरण को टाल दिया गया है। ऐसे में बेहतर होगा कि हम अपनी इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखें, ताकि कोरोना के खिलाफ लड़ने में मदद मिल सके। लोग इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए काढ़ा से लेकर फल और तरह-तरह के ड्रिंक्स आदि का सेवन खूब कर रहे हैं। आइए जानते हैं आंवला और मोरिंगा से कैसे इम्यूनिटी बढ़ाई जा सकती है?
सलाह: आंवले के साथ ये चीज मिलाकर बनाएं खास ड्रिंक, इम्यूनिटी बढ़ाने में मिलेगी मदद
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आंवले के फायदे
- आंवले को सबसे प्राचीन आयुर्वेदिक औषधियों में से एक माना जाता है। इसमें जीवाणु-रोधी गुण तो होते ही हैं, साथ ही यह पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। इसमें विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है और बीमारियों के खिलाफ लड़ने की क्षमता प्रदान करता है।
आंवले के अन्य फायदे
- आंवले को हड्डियों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है और साथ ही यह पाचन शक्ति को भी मजबूत बनाता है। नियमित रूप से आंवले का जूस पीने से खून भी साफ होता है और रक्त संबंधित विकार भी दूर होते हैं। इसके अलावा आंवले को दिल के लिए भी लाभदायक माना जाता है।
मोरिंगा के फायदे
- मोरिंगा यानी सहजन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों, खनिज पदार्थों और विटामिन का बेहतरीन स्रोत है। इसी वजह से इसे 'सूपरफूड' भी कहा जाता है। यह भी विटामिन-सी से भरपूर होता है। इसके सेवन से न सिर्फ इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद मिलती है, बल्कि यह पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है और डायबिटीज में भी फायदेमंद होता है।
कैसे बनाएं आंवला और मोरिंगा का ड्रिंक?
- इम्यूनिटी बढ़ाने वाला यह ड्रिंक बनाने के लिए पहले आधा चम्मच मोरिंगा पाउडर या 5-10 मोरिंगा के पत्ते लें और एक आंवले का रस निकाल लें। फिर आधा गिलास पानी में उसे अच्छे से मिलाएं। अब आपका इम्यूनिटी बूस्टर ड्रिंक तैयार है। आप इसका सेवन सुबह भी कर सकते हैं या फिर चाहें तो खाने के साथ भी ले सकते हैं।
नोट: प्रिया पांडेय योग्य और अनुभवी डायटिशियन (आहार विशेषज्ञ) हैं। उन्होंने कानपुर के सी.एस.जे.एम. विश्वविद्यालय से मानव पोषण में बी.एस.सी. किया है। उन्होंने कानपुर के आभा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आहार विशेषज्ञ के रूप में काम किया है। उन्होंने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पोषण व्याख्यान के विषय के प्रतिनिधि के रूप में भी भाग लिया है। उनका इस क्षेत्र में 8 वर्ष का लंबा अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।