स्वाइन फ्लू: दिल्ली में एच1एन1 के मामले 3000 पार, डॉक्टर बोले- कोरोना जैसी टेंशन तो कोरोना जैसे उपाय भी जरूरी
एच1एन1 वायरस का संक्रमण, संक्रमित व्यक्ति से दूसरे लोगों तक पहुंचता है। संक्रमण की चेन कमजोर करने के लिए बीमारी में दूसरों से दूरी, जरूरत के अनुसार मास्क, हाथों की सफाई, बेहतर वेंटिलेशन जैसी आदतें फिर से जरूरी हैं। दिल्ली में संक्रमण के मामले 3000 पार हो गए हैं।
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एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू को लेकर चिंता फिलहाल बढ़ती ही जा रही है। राजधानी दिल्ली-एनसीआर में इस साल अब तक 3000 से ज्यादा लोग स्वाइन फ्लू की चपेट में आ चुके हैं। अकेले रविवार (30 अगस्त) को ही एक दिन में 48 लोगों को संक्रमण का शिकार पाया गया है। अस्पतालों से प्राप्त हो रही जानकारियों के मुताबिक सर्दी-खांसी, तेज बुखार जैसे लक्षणों के साथ ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि स्वाइन फ्लू किस तरह से गंभीर स्थिति में निमोनिया जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। इसके अलावा गर्भावस्था में संक्रमण होने पर मां-बच्चे दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली-एनसीआर के अलावा कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी स्वाइन फ्लू के खतरे को लेकर लोगों को अलर्ट किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्वाइन फ्लू के बढ़ते संकट को कंट्रोल करने के लिए संक्रमण की चेन को तोड़ना सबसे जरूरी है। इसके लिए हमें एक बार फिर से वही उपाय करना चाहिए जो हमने कोरोना के समय में किया था।
एच1एन1 के खतरे को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में इंटेसिव केयर के डॉक्टर विक्रमजीत कहते हैं, स्वाइन फ्लू वैसे तो हल्की समस्याओं का कारण बनता है, पर इस बार इसकी रफ्तार थोड़ी ज्यादा देखी जा रही है। स्वाइन फ्लू भी कोरोना की तरह श्वसन संक्रमण है। इसके ज्यादातर लक्षण भी कोरोना के जैसे ही है तो संक्रमण की चेन तोड़ने और बचाव के लिए भी हमें कोरोना काल वाले उपाय अपनाने की जरूरत है।
- डॉक्टर कहते हैं, कोरोना से तुलना का मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि स्वाइन फ्लू को लेकर कोरोना की तरह परेशान होने की जरूरत है, बल्कि कोरोना के दौरान हमने संक्रमण से बचाव के लिए जो उपाय किए थे, उसे एक बार फिर से शुरू करने चाहिए ताकि इसके जोखिमों से बचा जा सके।
कोरोना महामारी के दौरान शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति रहा होगा जिसने मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और हाथों को सैनिटाइज करने की आदत न अपनाई हो। उस समय ये सावधानियां हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई थीं। अब जब इन्फ्लुएंजा से बचाव की बात हो रही है तो भी इससे लाभ पाया जा सकता है।
बढ़ते संक्रमण का जोखिम
डॉक्टर बताते हैं, एच1एन1 सहित इन्फ्लुएंजा वायरस मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस लेने से निकलने वाले संक्रमित कणों के जरिए दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकते हैं। इसलिए संक्रमण की चेन तब बनती है जब संक्रमित व्यक्ति से वायरस निकलता है, वह दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आता है और शरीर में पहुंच जाता है।
- इस चेन को तोड़ने का सबसे सीधा तरीका है संक्रमित व्यक्ति और दूसरों के बीच संपर्क कम करना।
- फ्लू में यह खास तौर पर जरूरी है क्योंकि कोई लोग लक्षण आने से पहले भी संक्रमण फैला सकते है
- यानी सिर्फ बीमार व्यक्ति का इलाज जरूरी नहीं, बल्कि उसके आसपास के लोगों तक वायरस पहुंचने से रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
मास्क की आदत और सोशल डिस्टेंसिंग
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना की तरह स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए एहतियातन मास्क लगाना फायदेमंद हो सकता है। मास्क संक्रमित व्यक्ति की नाक-मुंह से निकलने वाले ड्रॉपलेट्स को दूसरों तक पहुंचने से बचाता है और आसपास मौजूद वायरस को सांस के साथ शरीर के भीतर पहुंचने के के खतरे को कम करता है।
- इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को हर समय मास्क पहनना ही होगा। लेकिन खांसी-जुकाम या फ्लू जैसे लक्षण होने पर, संक्रमित व्यक्ति के आसपास रहते समय और भीड़भाड़ वाली या खराब वेंटिलेशन वाली जगहों में मास्क उपयोगी हो सकता है।
- इसी तरह अगर आप किसी संक्रमित व्यक्ति के लगातार करीब रहते हैं, तो आपके भी संक्रमित होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए संक्रमितों से सोशल डिस्टेंसिंग भी जरूरी है।
- स्कूल, ऑफिस या भीड़भाड़ वाली जगहों पर ये संक्रमण से बचाने में मददगार तरीका हो सकता है।
इन बातों का भी रखें ध्यान
- एच1एन1 से बचाव में केवल हवा से फैलने वाले संक्रमण पर ध्यान देना काफी नहीं है। अच्छी हाइजीन यानी स्वच्छता भी जरूरी है। हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोना संक्रमण के प्रसार से बचाव का प्रभावी तरीका माना जाता है। हैंड सैनिटाइजर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
- खांसने या छींकने के बाद और सार्वजनिक जगहों से लौटने पर हाथ साफ करना खास तौर पर जरूरी है।
- आंख, नाक और मुंह को बिना साफ हाथों से छूने से भी बचना चाहिए, क्योंकि हाथ दूषित सतह या संक्रमित स्राव के संपर्क में आ सकते हैं।
- छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों में फ्लू की जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहना जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।