खाली दिमाग शैतान का घर। ये कहने को तो एक घिसीपिटी कहावत है। लेकिन इसका अर्थ बहुत गहरा है। खाली दिमाग से मतलब है ऐसा दिमाग जो सही अवस्था में भी अपनी ऊर्जा और क्षमता का पूरा उपयोग न कर पा रहा हो। जिस दिमाग में फिजूल विचार, नकारात्मकता, स्ट्रेस आदि जैसी चीजें भरी पड़ी हैं। ऐसे दिमाग में कई सारी उलझनें पैदा हो सकती हैं। शोध इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि दिमाग को अगर सही समय पर, सही देखभाल दी जाए तो बढ़ती उम्र में भी याददाश्त में कमी, अल्जाइमर्स, आदि जैसी समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। साथ ही इससे किसी काम पर फोकस करने, कॉन्संट्रेशन को बनाए रखने और निर्णय लेने की क्षमता पर भी बहुत अच्छा असर पड़ता है। असल में ये सब निर्भर इस बात पर करता है कि आप दिमाग को कितनी और कैसी खुराक देते हैं और ये खुराक पौष्टिक भोजन के अलावा अन्य चीजों की भी हो सकती है। तो जानिए कैसे रख सकते हैं आप दिमाग को दुरुस्त?
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सलाह: दिमाग को रखना है दुरुस्त तो कीजिए ये आठ काम, बढ़ेगी याददाश्त और अल्जाइमर का खतरा होगा कम
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नई भाषा सीखिए
- जी हां। भाषा सीखने या जानने की प्रक्रिया दिमाग को तेज बनाने में मदद करती है। वे लोग जो एक से ज्यादा भाषाएं बोल-सुन-पढ़ और लिख पाते हैं, उनके दिमाग की सेहत पर इसका बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे न केवल याददाश्त तेज होती है बल्कि दिमाग की कार्यक्षमता भी बढ़ती है। अगर बचपन से एक से ज्यादा भाषाएं बच्चे के जीवन का हिस्सा हों तो बहुत ही अच्छा, अन्यथा किसी भी उम्र में नई भाषा सीखकर दिमाग को फायदा पहुंचाया जा सकता है।
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बच्चों के खेल या पजल्स
- ये आप अक्सर पाएंगे कि वे लोग जो बच्चों के साथ खेलते हैं या क्वालिटी टाइम बिताते हैं, ज्यादातर वे मुश्किल आने पर शांति से तुरंत निर्णय ले पाते हैं। उनका दिमाग कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य से काम करना जानता है। इतना ही नहीं, वे उमंग और उत्साह से भरे रहते हैं, जिससे अवसाद, निराशा, चिढ़ जैसी चीजें उनको ज्यादा परेशान नहीं कर पातीं। इसी तरह सुडोकू, पहेलियां आदि ऐसी कसरतें हैं, जो दिमाग को उसकी क्षमता का पूरा उपयोग करने में मदद करती हैं। जो लोग नियमित रूप से वर्ग पहेली, सुडोकू जैसे खेल खेलते हैं उनके दिमाग तेज काम करते हैं।
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- दफ्तर से घर और घर से दफ्तर आते-जाते समय कभी आपने अपने रोजमर्रा के एक ही रास्ते में बदलाव करके देखा है? अगर नहीं तो अब कीजिए। विशेषज्ञ मानते हैं कि दिमाग को चैलेंज देते रहने से उसकी कार्यक्षमता में पैनापन आता है। यदि आप एक ही रास्ते से घर आते जाते हैं तो कोशिश करें कि हफ्ते 15 दिन में उस जगह किसी दूसरे रास्ते से जाएं। यदि रास्ता न बदल सकें तो भी वाहन बदलें। जैसे रोज अगर बस से जाते हैं तो किसी दिन बाइक, साइकल या रिक्शा से जाएं। इससे दिमाग की एकरसता टूटती है और वह नई ऊर्जा के साथ काम कर पाता है।
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संगीत का डोज
- शोध यह साबित कर चुके हैं कि संगीत एक ऐसी गतिविधि है, जिसमें लगभग पूरा दिमाग शामिल होता है। ऐसा हर एक्टिविटी में नहीं होता। इसलिए संगीत सुनें, सीखें या गुनगुनाएं। यह एकाग्रचित्त होने, दिमाग की उलझनों को शांत करने और उसकी रचनात्मकता को बढ़ाने में मदद करेगा। इसी तरह कोई भी अन्य रचनात्मक गतिविधि जैसे पेंटिंग, सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, बागवानी आदि भी दिमाग की सेहत को दुरुस्त रखने में आपकी मदद कर सकती है।