Medically Reviewed by Dr. Anurag Rathi
डॉ अनुराग राठी, मनोचिकित्सक
बैरठा हॉस्पिटल, मुंबई
डिग्री-एमबीबीएस, डीपीएम
अनुभव- 15 वर्ष
कोरोना की पहली लहर में कोरोना संक्रमितों का आत्मविश्वास नहीं टूट रहा था लेकिन इन दिनों लोग आसपास की नकारात्मकता को देखकर एकदम घबरा रहे हैं। कोरोना से संक्रमित मरीज आत्मबल खोकर अपने स्वास्थ्य को बिगाड़ रहे हैं। होम आइसोलेशन या अस्पताल में रहने पर मरीज के दिमाग में कोरोना के साथ भय और चिंता का संक्रमण भी बढ़ रहा है। लगातार कोरोना से होने वाली मौत की खबर सुनना, अपनों को संक्रमित कर देने का भय कोरोना के साथ ही मरीज के जीवन में तनाव व अवसाद को भी आमंत्रण दे बैठता है। अगली स्लाइड्स से जानिए कोरोना हो जाने पर यदि बुरे ख्याल आ रहे हैं तो क्या करना चाहिए।
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तत्काल दिमाग से मिटाया जा सकता है
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नकारात्मकता को दूर ऐसे रखें
डॉक्टर अनुराग राठी का कहना है कि यदि हम अपनी सोच और ऊर्जा की दिशा बदल देंगे तो नकारात्मकता को आसानी से दूर करेंगे। मरीज कोरोना के दौरान चिंता और भय से इस कदर ग्रसित हो रहे हैं कि वे इस बात को भी सोच नहीं पा रहे हैं कि उनकी ये तनाव उन लोगों के लिए चिंता का विषय बन रहा है जिनकी उन्हें चिंता है। छोटी-मोटी चीजों को थोड़ा बहुत समय देकर आसानी से बुरे ख्यालों को तत्काल दिमाग से मिटाया जा सकता है।
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देर तक न जागें
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वक्त पर सोएं और उठें
यदि आप कोरोना का शिकार हो चुके हैं तो सबसे ज्यादा जरूरी है कि आप अपने सोने उठने के समय को व्यवस्थित रखें। देर तक न जागें या रोज अलग-अलग समय पर न सोएं। जल्दी सोएं और जल्दी जागें, अपनी दिनचर्या को ठीक रखें। यदि नींद पूरे होगी और सही समय पर होगी तो आपका दिमाग अस्वस्थ नहीं रहेगा। दिमाग स्वस्थ रहेगा तो बुरे ख्याल नहीं आएंगे।
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घंटों उठने का दिल नहीं करता है
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व्यायाम करें
व्यायाम करने का अर्थ यह नहीं कि हमेशा ही सुबह एक समय पर आप 30 से 45 मिनट तक कठिन कसरत करें। कोरोना के मरीजों को अक्सर एक जगह बैठ जाने पर घंटों उठने का दिल नहीं करता है। ऐसे में खाली बैठने पर उन्हें तरह-तरह के विचार भी आते हैं इसलिए जैसे ही आपको लग रहा है कि नकारात्मक ख्याल आ रहे हैं तो उस जगह को छोड़े दें और ऐसी कसरत करना शुरू करें जिसमें आपको ज्यादा ऊर्जा नहीं लगाना पड़ रही है।
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बीमारी की बात कम करें
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अच्छी बातें करें
उल्टे विचार आ रहे हैं तो उन्हें अच्छी बातों से काटें। ऐसे में यदि आप किसी परिजन से फोन पर बात कर रहे हैं तो कोशिश करें कि बीमारी की बात कम करें और स्वस्थ होने की बातें अधिक करें। यदि आप नकारात्मक बातें अधिक करेंगे तो आपको बुरे ख्याल आते रहेंगे इसलिए इनपर नियंत्रण पाने का प्रयास करें और ये आपको खुद से ही करना होगा।