जब भी बात संपूर्ण स्वास्थ्य की होती है तब शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक सेहत को लेकर भी ध्यान देते रहना आवश्यक हो जाता है। अध्ययनों से प्रमाणित होता है शरीर और मन एक दूसरे के पूरक होते हैं, इनमें से एक में भी होने वाली समस्या का असर दूसरे की सेहत को प्रभावित कर सकता है। पिछले कुछ वर्षों में मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे गए हैं। विशेषकर युवाओं में तनाव-अवसाद की समस्या तेजी से बढ़ती हुई रिपोर्ट की जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस तरह की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए इनके विशेष प्रबंधन की सलाह देते हैं।
Mental Health Day: युवाओं में बढ़ रही है तनाव-अवसाद की समस्या, कैसे कम करें इन मानसिक समस्याओं का जोखिम?
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बार-बार चिड़चिड़ापन या गुस्से की समस्या
तनाव-अवसाद जैसी समस्याओं को व्यक्त कर पाने की असमर्थता की स्थिति में अक्सर आपको चिड़चिड़ापन या गुस्सा आने की समस्या हो सकती है। इसके अलावा आपके व्यवहार में परिवर्तन आना, काम में मन न लगना, लोगों के साथ समय बिता पाने में कठिनाई महसूस होना भी तनाव की समस्या का संकेत हो सकता है। इन लक्षणों पर ध्यान देते रहने और समय पर मनोचिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक हो जाता है।
सोने में कठिनाई होना
तनाव या अवसाद की स्थिति में नींद का प्रभावित होना सबसे सामान्य लक्षण है, अगर आपको लगातार नींद में समस्या का अनुभव होता रहता है तो इस बारे में किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें। बच्चा या किशोर अगर हर समय थकान महसूस करता है, सामान्य से अधिक सोने या रात में सोने में परेशानी की शिकायत करता है, तो इस तरह के संकेतों को गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। इसे तनाव के प्रारंभिक दौर की स्थिति माना जा सकता है।
खाने में तरीके में बदलाव
बहुत अधिक या बहुत कम खाना, दोनों ही तनाव की प्रतिक्रिया हो सकती है। यदि आपको स्वयं में इस तरह का बदलाव महसूस हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें। इसके अलावा तनाव की इस तरह की स्थिति में बच्चे अक्सर सिरदर्द या पेट दर्द की दिक्कतों के बारे में शिकायत करते रहते हैं। अगर कुछ अन्य लक्षणों के साथ इस तरह की दिक्कतों का अनुभव होता रहता है तो इसपर समय रहते ध्यान देना बहुत आवश्यक हो जाता है।
तनाव-अवसाद से बचाव कैसे करें?
तनाव-अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से बचे रहने के लिए अच्छी नींद, पौष्टिक आहार और अपने पसंद की चीजों को करने पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। रात में 6-8 घंटे की नींद बहुत आवश्यक है, जिन लोगों को नींद विकारों की समस्या होती है अक्सर उनमें तनाव की दिक्कत देखी जाती रही है। तनाव-अवसाद से बचे रहने के लिए योग-मेडिटेशन का नियमित रूप से अभ्यास करते रहना आवश्यक हो जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।