कुछ दशकों पहले तक दिल की बीमारियों को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या माना जाता था, हालांकि अब कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं।
हेल्थ अलर्ट: अचानक नहीं आती दिल की बीमारी, जाने-माने विशेषज्ञों की ये सलाह बचा सकती है आपको जानलेवा खतरों से
Heart Disease Risk: भारत में दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता देखा जा रहा है, युवाओं में भी हार्ट अटैक के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। एक्सपर्ट्स ने समय पर हेल्थ चेकअप, नियमित शारीरिक गतिविधि और डायबिटीज, ब्लड प्रेशर के साथ मोटापा जैसे जोखिमों को कंट्रोल करने पर जोर दिया है।
दिल की बीमारियों का बढ़ता बोझ चिंताजनक
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दिल की बीमारी आज भारत ही नहीं, दुनियाभर में एक बड़ी स्वास्थ्य चिंता बनी हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे बचने के लिए सिर्फ बीमारी होने के बाद इलाज पर निर्भर रहने के बजाय पहले से सावधानी बरतना जरूरी है।
प्रसिद्ध हार्ट सर्जन डॉ. श्रीराम नेने ने कहा कि खतरों को देखते हुए अब चर्चा सिर्फ हार्ट अटैक जैसी अचानक होने वाली गंभीर स्थिति के इलाज तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके बजाय बीमारी से बचाव, उसके शुरुआती संकेतों को समय पर पहचानने और जल्दी इलाज शुरू करने पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। अगर ऐसा किया जाए तो लोगों की सेहत और जीवन दोनों बेहतर हो सकते हैं।
कार्डियक सर्जन और मेदांता के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक डॉ. नरेश त्रेहान ने भी दिल की सेहत को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामलों पर चिंता जताई।
- डॉ. त्रेहान कहते हैं, हर व्यक्ति को अपनी सेहत, खासकर दिल की सेहत पर ध्यान देना चाहिए।
- अगर परिवार में किसी को हार्ट डिजीज और डायबिटीज की दिक्कत रही है तो 25 साल की उम्र से पहले ही स्वास्थ्य जांच करा लेनी चाहिए।
- वहीं, जिन लोगों के परिवार में ऐसी बीमारी का इतिहास नहीं है, उन्हें भी डॉक्टर की सलाह पर 30 साल की उम्र से पहले शरीर की जरूरी जांच करा लेनी चाहिए।
दिल की बीमारियों की फैमिली हिस्ट्री है तो हो जाएं सावधान
डॉ. त्रेहान ने बताया कि अब जीनोम सीक्वेंसिंग जैसी आधुनिक जांच भी उपलब्ध है। इसमें व्यक्ति के जीन यानी शरीर में मौजूद आनुवंशिक जानकारी का अध्ययन किया जाता है। परिवार में बीमारी की हिस्ट्री, ब्लड टेस्ट से मिलने वाली जानकारी और लाइफस्टाइल को साथ में देखकर किसी व्यक्ति में दिल की बीमारी के जोखिमों को समझने में मदद मिल सकती है।
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया की रिसर्च एंड हेल्थ प्रमोशन डिविजन की वाइस प्रेसिडेंट प्रो. मोनिका अरोड़ा कहती हैं, दिल की बीमारियों के बढ़ते मामलों के पीछे खराब जीवनशैली और खान-पान में गड़बड़ी महत्वपूर्ण कारण हैं। भारत में लोगों के खाने का तरीका तेजी से बदला है। पहले पारंपरिक भारतीय भोजन ज्यादा प्रचलित था, लेकिन अब जंक-प्रोसेस्ड फूड्स का चलन बढ़ा है। इस बदलाव का असर दिल की सेहत पर भी पड़ रहा है।
- तंबाकू का इस्तेमाल जोखिमों को और बढ़ाता जा रहा है। इसमें सिगरेट पीना ही नहीं, बल्कि गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पाद भी शामिल हैं।
- इसके अलावा वेप और निकोटीन की लत भी दिल की सेहत के लिए खतरनाक है।
हार्ट हेल्थ के लिए और किन बातों का रखें ध्यान
ग्लोबल मेटाबोलिक हेल्थ अलायंस के डॉ. अमित गुप्ता कहते हैं, दिल की बीमारी से बचाव के लिए ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, वजन और शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी जैसी चीजों के संतुलन पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
- हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर, ये सभी दिल की बीमारी के जोखिमों को बढ़ाती जा रही हैं।
- बच्चों में बढ़ता मोटापा और भी चिंता का विषय बनता जा रहा है। वजन को कंट्रोल में रखने की आदत बचपन से ही शुरू होनी चाहिए। इससे आगे चलकर कई बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
- बुजुर्गों के लिए डॉक्टर ने ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और वजन की नियमित जांच कराने की सलाह दी। साथ ही डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं समय पर लेने और अपनी स्थिति के अनुसार समय-समय पर डॉक्टरी सलाह लेते रहने पर भी जोर दिया।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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