भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। मंगलवार तक देश में कोरोना से इस नए वैरिएंट से संक्रमितों की संख्या बढ़कर 650 के आंकड़े को पार कर गई है। तेजी से बढ़ते ओमिक्रॉन के मामले स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पॉजिटिविटी रेट में भी उछाल देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों को वैक्सीन की दोनों खुराक मिल चुकी है, उन्हें भी लगातार सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। कोरोना का यह नया वैरिएंट अब तक का सबसे संक्रामक माना जा रहा है।
ओमिक्रॉन संकट: '2 आउट ऑफ 3' के फार्मूले से कम कर सकते हैं संक्रमण का जोखिम, जानिए इस बारे में विस्तार से
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'2 आउट ऑफ 3' का रूल क्या है?
डॉ लीना वेन कहती हैं, कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट जिस तरह से मुसीबतों का कारण बनता जा रहा है, ऐसे में लोगों को इससे बचाव के लिए विशेष सावधानियां बरतने की आवश्यकता है। इसके लिए '2 आउट ऑफ 3' का रूल कारगर हो सकता है। इस नियम के अनुसार, सभी लोगों को कोरोना से बचाव के लिए तीन सुरक्षा कवचों में से कम से कम दो का आवश्यक रूप से पालन करना चाहिए। वैक्सीन, मास्किंग और टेस्टिंग कोरोना से बचाव के तीन प्रभावी उपाय माने जा रहे हैं।
मास्क और वैक्सीनेशन सबसे जरूरी
डॉ लीना वेन कहती हैं, ओमिक्रॉन वैरिएंट से सुरक्षित रहने के लिए हमें पहले से अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। '2 आउट ऑफ 3' का रूल इससे बचाव में काफी हद तक मददगार साबित हो सकता है। ओमिक्रॉन सहित सार्स-सीओवी-2 वायरस से बचाव के लिए मास्क लगाना सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय हो सकता है। वायरस के खिलाफ अगला सबसे बड़ा बचाव टीकाकरण है। वैक्सीनेशन, संक्रमण से बचाने की गारंटी तो नहीं हैं, हालांकि यह संक्रमण की गंभीरता और इसके कारण अस्पताल में भर्ती होने या मौत के खतरे को कम करने में बहुत हद तक सहायक जरूर है।
सेल्फ आइसोलेशन का करें पालन
ओमिक्रॉन वैरिएंट की चपेट में अब दुनिया के अधिकतर देश आ चुके हैं। इससे बचाव के उपायों के बारे में प्रोफेसर वेन कहती हैं, जब तक दुनियाभर में कोरोना का संक्रमण जारी है, हमें घर के भीतर और भीड़ से खुद को आइसोलेट रखना चाहिए, यही सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है। जिन हिस्सों में संक्रमण के मामले अधिक हैं, वहां जल्द से जल्द सभी लोगों का वैक्सीनेशन करा के उन्हें कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर के बारे में जागरूक करना और टेस्टिंग बढ़ाना भी बहुत आवश्यक है।
विशेष सतर्कता बरतने का जरूरत
प्रोफेसर वेन कहती हैं, जिन लोगों का वैक्सीनेशन नहीं हुआ है, उनके संक्रमित होने और कोरोना का वाहक बनने का जोखिम सबसे अधिक है। ऐसे लोग दूसरों के लिए भी समस्या पैदा कर सकते हैं, इसमें खुद हमें जिम्मेदारी दिखानी होगी। यदि किसी जगह पर सभी लोगों की टेस्टिंग नहीं की जा सकती है तो हर समय मास्क लगाना अनिवार्य किया जाना चाहिए। डॉ वेन ने सुझाव दिया है कि '2 आउट ऑफ 3' के रूल को ध्यान में रखते हुए सभी लोगों को फिलहाल विशेष सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।