कोरोना वायरस से पैदा हुई महामारी यानी कोविड-19 का प्रकोप किस दवा से खत्म होगा? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए दुनिया भर के शोधकर्ता मेहनत कर रहे हैं। अभी तक एक ही बात साफ है कि जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है उन पर कोविड-19 का हमला घातक नहीं होता। अब बाजार इसी बात को भुनाने में लग गया है। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के अनेक उपाय मीडिया, सोशल मीडिया पर सुझाए जा रहे हैं।
ऐसा क्या खाएं कि कोरोना वायरस से लड़ने में हमारा शरीर सक्षम हो जाए?
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रिसर्च कहती है कि सुपर फूड बाजार का फैलाया हुआ एक मिथक है। साइंस की रिसर्च में इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिलता कि इनसे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। अमरीका की येल यूनिवर्सिटी की इम्युनोलॉजिस्ट अकीको इवासाकी का कहना है कि प्रतिरोधक क्षमता के तीन हिस्से होते हैं-त्वचा, श्वसन मार्ग और म्यूकस झिल्ली। ये तीनों हमारे शरीर में किसी भी संक्रमण रोकने में मददगार हैं। अगर कोई वायरस इन तीनों अवरोधकों को तोड़कर शरीर में घुस जाता है, तो फिर अंदर की कोशिकाएं तेजी से सतर्कता बढ़ाती हैं और वायरस से लड़ना शुरू कर देती हैं।
अगर इतने भर से भी काम नहीं चलता है तो फिर एडॉप्टिव इम्यून सिस्टम अपना काम शुरू करता है। इसमें कोशिकाएं, प्रोटीन सेल और एंटीबॉडी शामिल हैं। शरीर के अंदर ये रोग प्रतिरोधक क्षमता उभरने में कुछ दिन या हफ्ता भर लग सकता है। एडॉप्टिव इम्यून सिस्टम कुछ खास तरह के विषाणुओं से ही लड़ सकता है।
हल्की खांसी, नजला, बुखार, सिरदर्द के लक्षण किसी वायरस की वजह से नहीं होते हैं। बल्कि ये हमारे शरीर की उस प्रतिरोधक क्षमता का हिस्सा होते हैं जो हमें जन्म से मिलती है। बलगम के जरिए बैक्टीरिया को बाहर निकालने में मदद मिलती है। बुखार, शरीर में वायरस के पनपने से रोकने का माहौल बनाता है। ऐसे में अगर किसी के कहने पर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली चीजों का सेवन कर भी लिया जाए, तो उसका असल में कोई फायदा होने नहीं वाला है।
अक्सर लोग मल्टी विटामिन के सप्लीमेंट इस उम्मीद में लेते रहते हैं कि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाएगी। रिसर्च कहती हैं कि जो लोग पूरी तरह सेहतमंद हैं उन्हें इसकी जरूरत ही नहीं। अतिरिक्त सप्लीमेंट लेने की आदत का शिकार सिर्फ आम इंसान नहीं हैं। पढ़े-लिखे लोग भी इस जाल में फंस जाते हैं।
मिसाल के लिए दो बार नोबेल अवॉर्ड विजेता लाइनस पॉलिंग जुकाम से लड़ने के लिए हर रोज 18,000 मिलीग्राम विटामिन सी लेने लगे। ये मात्रा शरीर की जरूरत से 300 गुना ज्यादा थी। विटामिन-सी, नजला जुकाम से लड़ने में बहुत थोड़ी ही मदद कर पता है।
इसे लेकर बाजार का बिछाया हुआ मायाजाल ज्यादा है। जानकारों का कहना है कि विकसित देशों में जो लोग संतुलित आहार लेते हैं, उन्हें अपने खाने से ही शरीर की जरूरत के मुताबिक विटामिन-सी मिल जाता है। वहीं विटामिन-सी का ज्यादा सेवन गुर्दे में पथरी की वजह बन सकता है।
जानकारों के अनुसार जब तक शरीर में किसी विटामिन की कमी ना हो, तब तक किसी भी तरह का सप्लीमेंट हानिकारक हो सकता है। सिर्फ विटामिन-डी का सप्लीमेंट ही फायदेमंद साबित हो सकता है।
अकीका इवासाकी के मुताबिक बहुत सी स्टडी में पाया गया है कि विटामिन-डी की कमी से सांस संबंधी रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। इसकी कमी से ऑटो इम्युन वाली बीमारियां भी हो सकती हैं। लोगों में विटामिन-डी की कमी का होना सिर्फ गरीब देशों की समस्या नहीं है, बल्कि पैसे वाले देशों में भी ये एक गंभीर मसला है। एक स्टडी के मुताबिक 2012 तक सारी दुनिया में एक अरब से ज्यादा लोग ऐसे थे जिनमें विटामिन-डी की कमी थी। विटामिन-डी की कमी उन लोगों में ज्यादा होती है जो धूप से दूर घरों में अंदर रहते हैं।
हस्तमैथुन को लेकर सदियों से कई भ्रांतियां समाज में रही हैं। यहां तक कि वर्षों तक इसे कई बीमारियों की जड़ समझा जाता रहा। लेकिन मॉडर्न रिसर्च इसके स्वास्थ्य संबंधी कई फायदे गिनाते हैं। लेकिन ये दावा सरासर गलत है कि हस्तमैथुन कोविड-19 से बचाने में सक्षम है।