एक-दो दशक पहले तक हड्डियों की समस्या को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली दिक्कतों के तौर पर जाना जाता था, हालांकि अब कम उम्र के लोगों में ये काफी तेजी से बढ़ती दिक्कत बन गई है। डॉक्टर्स बताते हैं, 25-40 की आयु वाले अधिकतर युवा हड्डियों की समस्या, आर्थराइटिस, बोन डेंसिंटी में कमी के शिकार पाए जा रहे हैं, जो न सिर्फ उनके लिए गंभीर दिक्कतों को बढ़ाने वाली हो सकती है साथ ही दीर्घकालिक तौर पर भी इसका जोखिम काफी अधिक हो सकता है, जिसमें क्वालिटी ऑफ लाइफ बिगड़ने का खतरा रहता है।
डॉक्टर्स ने बताया: 25-40 की आयु वाले ज्यादातर लोग हड्डियों की कमजोरी के शिकार, महामारी ने बढ़ा दिया है खतरा
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वर्क फ्रॉम होम और हड्डियों की समस्या
कोविड के दौरान सुरक्षात्मक तौर पर घर से काम करने की सहूलियत काफी बढ़ गई थी। संक्रमण के जोखिमों को कम करने में तो इसके लाभ थे पर शोधकर्ताओं ने इसके दीर्घकालिक दुष्प्रभावों को लेकर लोगों को अलर्ट किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्क फ्रॉम होम के दौरान बहुत से लोग घर से काम करते हुए घंटों तक एक ही स्थिति में बैठे रहते हैं। काम का समय बढ़ गया जिसके कारण व्यायाम में कमी आ गई, परिणामस्वरूप ऐसे लोगों में हड्डी, मांसपेशियों और जोड़ों से संबंधित समस्याओं का जोखिम काफी बढ़ गया है।
हड्डियों को क्षति पहुंचा रही हैं ये दो कारण
डॉक्टर कहते हैं, मांसपेशियों और हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए हमारे शरीर को सक्रिय रखने की जरूरत होती है। व्यायाम की कमी के चलते हड्डियों के घनत्व और शक्ति में दिक्कतें देखी जा रही हैं। दूसरी तरफ घर से बाहर न निकलने से विटामिन-डी की कमी का जोखिम भी काफी बढ़ गया, जिससे शरीर में कैल्शियम का अवशोषण प्रभावित हुआ जो हड्डियों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है।
लंबे समय तक बैठना धूम्रपान जितना हानिकारक
द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने लंबे समय तक बैठे रहने की स्थिति को धूम्रपान जितना ही सेहत के लिए हानिकारक पाया है। लंबे समय तक बैठे रहने से न केवल आपका वजन बढ़ता है, ये आपकी पीठ की हड्डियों और मांसपेशियों को क्षतिग्रस्त बनाने का भी कारण हो सकती है। इसके कारण कई लोगों में पैरों में ब्लड क्लॉटिंग का भी जोखिम बढ़ गया है, जिसे डीप वेनस थ्रोम्बोसिस (डीवीटी) भी कहा जाता है। हड्डियों की सेहत को क्षति पहुंचाने में भी लॉन्ग सिटिंग के दुष्प्रभाव देखे गए हैं।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना महामारी के बाद से युवाओं में हड्डियों की समस्या काफी बढ़ गई है। वैसे तो इसका कोई प्रत्यक्ष वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि घर से काम करने की व्यवस्था ने लोगों की हड्डियों को कमजोर कर दिया है, लेकिन इससे संबंधित कुछ कारक हैं जो अप्रत्यक्ष रूप से हड्डियों के लिए हानिकारक पाए गए हैं।
डॉक्टर कहते हैं, हड्डियों की बीमारियां जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली हो सकती हैं, अगर आप भी लॉन्ग सिटिंग वाले काम करते हैं तो इसके जोखिमों को लेकर सावधान हो जाने की आवश्यकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।