पिछले एक-दो दशकों में आर्थराइटिस (गठिया) के मामलों में तेजी से इजाफा देखने को मिला है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लोगों में लगातार बढ़ती जा रही शारीरिक निष्क्रियता और जीवनशैली में कई अन्य प्रकार की गड़बड़ी इस समस्या का मुख्य कारण हो सकती है। आर्थराइटिस के कारण जोड़ों में सूजन और दर्द की गंभीर समस्या हो सकती है, जिसके कारण दैनिक जीवन के सामान्य कार्यों को करने में भी लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। एक आंकड़े के मुताबिक भारत में 180 मिलियन (18 करोड़) से ज्यादा लोगों को आर्थराइटिस की समस्या है। विशेषज्ञों के मुताबिक मधुमेह, एड्स और कैंसर जैसी बीमारियों की तुलना में इसका प्रसार कहीं अधिक है। हर साल लगभग 14 लाख लोगों को इस रोग के इलाज के लिए डॉक्टर की मदद लेनी पड़ती है।
काम की बात: गठिया की समस्या में बेहद फायदेमंद हैं यह चार घरेलू उपाय, दर्द-सूजन से मिलेगा छुटकारा
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नियमित व्यायाम से कम होता है आर्थराइटिस का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक नियमित व्यायाम करके न सिर्फ आप आर्थराइटिस से सुरक्षित रह सकते हैं साथ ही अगर आपको पहले से ही यह समस्या है तो उसकी जटिलताओं को कम करने में भी व्यायाम लाभदायक हो सकता है। आर्थराइटिस के दर्द से राहत पाने के लिए विशेषज्ञ सप्ताह में कम से कम तीन बार 40-60 मिनट तक व्यायाम करने की सलाह देते हैं। व्यायाम के बारे में जानने के लिए आप किसी फिजियोथेरपिस्ट से संपर्क कर सकते हैं।
वजन कम करने से आर्थराइटिस का खतरा हो जाता है कम
आर्थराइटिस फाउंडेशन के अनुसार, शरीर का बढ़ा हुआ वजन घुटनों पर अतिरिक्त तनाव के साथ कूल्हे के जोड़ों पर भी अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे आर्थराइटिस का खतरा अधिक हो जाता है। वजन कम करने से जोड़ों पर दबाव कम होता है, दर्द और जकड़न में भी राहत मिलती है। वजन को नियंत्रित रखकर आर्थराइटिस के जोखिम को कम किया जा सकता है।
गर्म और ठंडी सेकाई
गठिया के दर्द को कम करने के लिए गर्म और ठंडी सेकाई करना सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है। हीट थेरेपी रक्त परिसंचरण को बढ़ाती है, जोड़ों की कठोरता और मांसपेशियों में दर्द को शांत करने में मदद कर सकती है। वहीं कोल्ड थेरेपी सूजन और दर्द को कम करती है। आर्थराइटिस की समस्या में बारी-बारी से गर्म और ठंडी सेकाई करने से लाभ मिल सकता है। इसे सबसे आसान और प्रभावी उपायों में से एक माना जाता है।
ओमेगा -3 फैटी एसिड वाले आहार का करें सेवन
अध्ययनों से पता चलता है कि ओमेगा -3 फैटी एसिड शरीर में सूजन को कम करने में मदद करने के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अध्ययकर्ताओं का कहना है कि ओमेगा -3 फैटी एसिड रूमेटाइड आर्थराइटिस के लक्षणों में सुधार करने के साथ इसकी जटिलताओं को कम करने में भी सहायक हो सकता है। नट्स, सीड्स, सैल्मन और टूना जैसी मछलियों को ओमेगा -3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत माना जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों और विशेषज्ञों के सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला के हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।