अध्ययन: हार्ट रेट का बढ़ना दिल ही नहीं दिमाग के लिए भी खतरनाक, इस गंभीर मानसिक रोग के हो सकते हैं शिकार

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 28 Jan 2022 06:01 PM IST
हार्ट रेट का बढ़ना है गंभीर संकेत
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अध्ययनों से पता चलता है कि हमारे शरीर के सभी अंग एक दूसरे से जुड़े होते हैं, यानी कि एक को होने वाली परेशानी का असर दूसरे अंग की सेहत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। हृदय और मस्तिष्क के बीच भी ऐसा ही संबंध होता है। अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों की हृदय गति लगातार बढ़ी हुई रहती है, उनमें डेमेंशिया जैसे मनोरोग का जोखिम अधिक हो सकता है। डेमेंशिया या मनोभ्रम को संज्ञानात्मक कार्यप्रणाली में होने वाली क्षति से संबंधित समस्या माना जाता है, जिसके कारण लोगों को सोचने, चीजों को याद रखने और तर्क करने जैसे चीजों में काफी कठिनाई महसूस हो सकती है। डेमेंशिया के कारण व्यक्ति के दैनिक जीवन के कार्यों में भी समस्या आ सकती है, यही कारण है कि लोगों को इससे बचाव करते रहने की सलाह दी जाती है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डेमेंशिया, न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी के सबसे आम और गंभीर प्रकारों में से एक है। स्वीडन के करोलिंस्का संस्थान के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में हृदय गति के साथ डेमेंशिया के संबंध पर प्रकाश डाला गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हृदय गति का लगातार बढ़े रहना आपके दिल ही नहीं दिमाग के लिए भी खतरनाक हो सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।
डेमेंशिया का बढ़ जाता है खतरा
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हार्ट रेट और डेमेंशिया का खतरा
अल्जाइमर्स एंड डिमेंशिया जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि हार्ट रेट का अधिक होना कई तरह की समस्याओं का कारण बन सकता है, डेमेंशिया भी उन्हीं में से एक है। आमतौर पर हार्ट रेट बढ़ने को दिल की सेहत से ही जोड़कर देखा जाता है पर इस अध्ययन में जानने को मिला है कि हार्ट रेट का बढ़ना किस तरह से मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक हो सकता है?

बीबीसी साइंस फ़ोकस मैगज़ीन की रिपोर्ट के अनुसार, अध्ययन के प्रमुख लेखक युम इमाहोरी कहते हैं, यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि क्या रेस्टिंग हार्ट रेट के आधार पर हाई डेमेंशिया के खतरे वाले रोगियों की पहचान कर सकती है?
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डेमेंशिया का वैश्विक स्तर पर बढ़ता खतरा
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डिमेंशिया क्यों होता है?
मायो क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक उम्र बढ़ने के साथ डिमेंशिया का खतरा भी बढ़ जाता है। 85 या उससे अधिक उम्र के लोगों में से लगभग एक-तिहाई को डिमेंशिया की शिकायत हो सकती है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि सभी लोगों में डेमेंशिया की समस्या हो ही। डेमेंशिया, मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं और उनके कनेक्शन को होने वाली क्षति  के कारण होने वाली बीमारी है। मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से के आधार पर, डेमेंशिया लोगों को अलग तरह से प्रभावित कर सकता है और इसके विभिन्न प्रकार के लक्षण हो सकते हैं।
हृदय की गति को करें नियंत्रित
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हार्ट रेट को करें नियंत्रित
अध्ययन के लेखक युम इमाहोरी कहते हैं, चूंकि हार्ट रेट बढ़ने और इसके कारण डेमेंशिया के खतरे के बारे में जानने को मिलता है ऐसे में सभी लोगों को हृदय गति को नियंत्रित रखने के उपाय करते रहना चाहिए।  शरीर के आराम करते समय हृदय, प्रति मिनट जितनी बार धड़कता है, उसे रेस्टिंग हार्ट रेट रूप में जाना जाता है। यह उम्र, लिंग, स्वास्थ्य, फिटनेस आदि जैसे कारकों से प्रभावित हो सकता है। यदि हार्ट रेट बढ़ा हुआ रहता है तो इसको नियंत्रित करने के उपाय करके आप दिल और दिमाग दोनों की कई तरह की बीमारियों से बचे रह सकते हैं।
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हृदय की सेहत का रखें ख्याल
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हार्ट रेट को कैसे नियंत्रित करें?
अमर उजाला से बातचीत में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ अवनीश सचान बताते हैं, कई साधारण से उपाय और जीवनशैली में स्वस्थ बदलाव करके हृदय की गति को नियंत्रित रखा जा सकता है। इसके लिए सबसे आवश्यक है संतुलित आहार का सेवन। भोजन में पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को अधिक से अधिक मात्रा में शामिल करें। इसके अलावा शरीर को सक्रिय रखना सुनिश्चित करें, इसके लिए नियमित व्यायाम को दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे छोड़ दें क्योंकि यह आपमें डेमेंशिया के खतरे में बढ़ा सकता है। धूम्रपान से धमनियां संकरी हो सकती हैं जिसके परिणामस्वरूप हृदय गति बढ़ सकती है।



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स्रोत और संदर्भ
Association of resting heart rate with cognitive decline and dementia in older adults: A population-based cohort study

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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