कोरोना वायरस संक्रमण के कारण कुछ मरीजों में स्थाई रूप से अचानक बहरेपन की समस्या पैदा होने की बात सामने आई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस तरह की परेशानी का जल्दी पता लगाने और तत्काल उपचार की आवश्यकता है। मानव शरीर को कोरोना वायरस अनेक तरह से प्रभावित करता है। स्वाद और गंध पहचानने की शक्ति में कमी से लेकर शरीर के अंगों को डैमेज करने के अलावा कोरोना मानसिक तौर पर भी काफी हद तक प्रभाव डालता है। अब वैज्ञानिकों ने यह जानकारी दी है कि यह इंसान के सुनने की क्षमता को भी प्रभावित करता है। यानी सुनने में परेशानी भी कोरोना संक्रमण का लक्षण हो सकती है।
2 of 6
Hearing Loss
- फोटो : Social Media
ब्रिटेन में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने इस संबंध में एक अध्ययन के जरिए बताया है कि कोरोना वायरस संक्रमण से बहरेपन का भी खतरा हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस संक्रमण के कारण बहरेपन की समस्या के प्रति जागरुकता बहुत जरूरी है, क्योंकि इसकी जल्दी पहचान करना और तत्काल इलाज करना जरूरी होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, स्टेरॉयड के जरिए उचित उपचार से इस समस्या को दूर किया जा सकता है।
3 of 6
कोविड के कारण श्रवण शक्ति प्रभावित हुई
- फोटो : Asia Wire
हालांकि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण बहरे होने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, कोरोना संक्रमण से बहरेपन के पीछे कारण स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन फ्लू जैसे वायरल संक्रमण के बाद भी इसी प्रकार की समस्या होती है। ब्रिटेन में इस तरह का यह पहला मामला है, जबकि अन्य देशों में भी इसी तरह के मामले सामने आ चुके हैं।
4 of 6
कोविड के कारण श्रवण शक्ति प्रभावित हुई(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Social Media
‘बीएमजे केस रिपोर्ट्स’ पत्रिका में प्रकाशित अनुसंधान में 45 वर्षीय एक ऐसे व्यक्ति का जिक्र किया गया है, जो अस्थमा का मरीज है। कोरोना वायरस से गंभीर रूप से संक्रमित होने के बाद अचानक उसकी श्रवण क्षमता यानी सुनने की शक्ति नष्ट हो गई। उस व्यक्ति को संक्रमण से पहले से श्रवण संबंधी कोई अन्य समस्या नहीं थी। उसे स्टेरॉयड की गोलियां और टीके लगाए गए, जिसके बाद उसकी श्रवण क्षमता आंशिक रूप से लौट गई।
5 of 6
कोविड के कारण श्रवण शक्ति प्रभावित हुई(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Amar Ujala
इस अध्ययन की सह-लेखक डॉ. स्टेफनिया कोम्पा ने कहा कि अभी तक यह ज्ञात नहीं है कि कोविड के कारण श्रवण शक्ति क्यों प्रभावित हुई। यह संभव है कि सार्स कोव-2 वायरस कान की आंतरिक कोशिकाओं में पहुंच कर उसे डैमेज करता है और साइटोकिन्स जैसे रसायन छोड़ने पर मजबूर करता हो। ये रसायन आंतरिक कान के लिए विषाक्त हो सकते हैं।