स्वास्थ्य मंत्रालय की नई गाइडलाइंस: जानें कैसे करें कोरोना संक्रमित बच्चों की देखभाल? किन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत?
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 संक्रमण को चार हिस्सों में विभाजित किया है। इसमें एसिम्टोमैटिक, हल्के, मध्यम और गंभीर रूप से संक्रमित बच्चों को रखा गया है। गाइडलाइंस में विशेषज्ञों का कहना है कि एसिम्टोमैटिक बच्चों की पहचान आमतौर पर परिवार की स्क्रीनिंग करते समय होती है। ऐसे बच्चों को सामान्य तौर पर किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। परिवार के लोगों को ऐसे बच्चों के लक्षणों को मॉनीटर करते रहना चाहिए। अगर लक्षण बढ़ रहे हैं तो उन्हें आवश्यकतानुसार इलाज उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइंस में कहा गया है कि जिन बच्चों में कोविड के हल्के लक्षण हैं उन्हें गले में खराश, नाक बहने, सांस लेने में कठिनाई और खांसी की दिक्कत हो सकती है। कुछ बच्चों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण भी हो सकते हैं। गाइडलाइंस में बताया गया है कि ऐसे बच्चों को किसी जांच की आवश्यकता नहीं है। घर पर ही आइसोलेशन और रोगसूचक उपचार के साथ इन्हें ठीक किया जा सकता है।
जन्मजात हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी, अंग की शिथिलता, मोटापा जैसे कॉमोरबिडिटी वाले कोविड संक्रमित बच्चों को भी घर पर ही ठीक किया जा सकता है, इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
गाइडलाइंस में बताया गया है कि जिन बच्चों में संक्रमण के मध्यम स्तर की पहचान होती है, उन्हें बुखार की स्थिति में डॉक्टर की सलाह पर पैरासिटामॉल (10-15 मिलीग्राम / किग्रा / खुराक) दी जा सकती है। तेज बुखार में चार से छह घंटे यह दवा दोबारा दे सकते हैं। इसके अलावा बच्चों को गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे कराएं और शरीर को हाइड्रेटेड रखने के साथ पौष्टिक आहार दें। माइल्ड स्तर के संक्रमित बच्चों को एंटीबायोटिक्स की जरूरत नहीं है। ऐसे बच्चों के इलाज में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वाइन, फेविपिराविर, रेमेडिसविर, प्लाज्मा इन्फ्यूजन या डेक्सामेथासोन आदि की कोई जरूरत नहीं होती है।
मध्यम स्तर के संक्रमण वाले बच्चों की देखभाल
विशेषज्ञों के मुताबिक मध्यम स्तर के संक्रमण वाले बच्चों को निमोनिया की शिकायत हो सकती है। ऐसे बच्चों को कोविड स्वास्थ्य केंद्र या किसी अस्ताल में भर्ती कराने के साथ उनके लक्षणों की निगरानी करते रहना चाहिए। ऐसे बच्चों में फ्ल्यूड और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए। बच्चों को मुंह से खाना दें (शिशुओं में स्तनपान), यदि इसमें बच्चे असमर्थ हैं तो उन्हें ड्रिप्स लगाने की जरूरत हो सकती है। बुखार में पैरासिटामॉल (10-15 मिलीग्राम/किग्रा/ खुराक) चार से छह घंटे में दे सकते हैं। जिन बच्चों में ऑक्सीजन सेचुरेशन 94 से कम हो उन्हें मेडिकल ऑक्सीजन दिया जाना चाहिए।