Medically Reviewed by Dr. I.N. Vajpai
न्यूरो सर्जन
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम.एस (जनरल सर्जरी), एमसीएच (न्यूरो सर्जरी), उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
अनुभव- 45 वर्ष
शरीर के स्वस्थ रखने के लिए की प्रकार के विटामिन और खनिजों की जरूरत होती है, जिसमें से एक है मैंगनीज। इसे एक आवश्यक पोषक तत्व माना जाता है, क्योंकि शरीर के विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए मैंगनीज की जरूरत होती है। यह आमतौर पर आयरन और अन्य खनिजों के साथ मिलकर कई रासायनिक प्रतिक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है। यह कार्बोहाइड्रेट, कोलेस्ट्रॉल और प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों के अवशोषण का भी काम करता है। इसके अलावा यह हड्डियों के विकास और हार्मोन संतुलन में भी मदद करता है। यानी कुल मिलाकर मैंगनीज शरीर की लगभग हर प्रतिक्रिया को प्रभावित करता है। इसलिए इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि शरीर में इस तत्व की कमी न होने पाए, क्योंकि इसकी कमी से कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। आइए जानते हैं मैंगनीज के फायदों और नुकसान के बारे में...
सेहत का रखें ख्याल: शरीर के लिए बहुत जरूरी है मैंगनीज, इसकी कमी से हो सकती हैं गंभीर समस्याएं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विशेषज्ञ कहते हैं मैंगनीज हड्डियों के विकास के साथ-साथ पाचन एंजाइम को बनाने और प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने में भी सहायक होता है। इसकी कमी से हड्डियों की कमजोरी, जोड़ों में दर्द और मूड में तेजी से बदलाव की समस्या हो सकती है।
शरीर में मैंगनीज की कमी के लक्षण क्या हैं?
- हड्डियों का कमजोर होना
- बच्चों के विकास में दिक्कत
- त्वचा पर चकते होना
- बालों के रंग में बदलाव
- मूड में बदलाव
- मासिक धर्म के दौरान अधिक दर्द होना
मैंगनीज के स्रोत क्या हैं?
- ओट्स
- सोयाबीन
- गेहूं, राई, जौ
- लहसुन
- बादाम
- लौंग
- काबुली चना
- अनानास
- केला
- स्ट्रॉबेरी
- हल्दी, काली मिर्च
- कद्दू के बीज
मैंगनीज की अधिकता के नुकसान
- शरीर में किसी भी चीज की अधिकता नुकसानदायक ही होती है। मैंगनीज के साथ भी ऐसा ही है। अगर शरीर में मैंगनीज का अधिक स्तर हो, तो इससे भूख की कमी, मांसपेशियों में अकड़न, पैर में ऐंठन, शरीर के किसी अंग में कंपकंपी और चिड़चिड़ापन आदि की समस्या हो सकती है।
नोट: डॉ. आईएन वाजपई अत्यधिक योग्य और अनुभवी न्यूरो सर्जन हैं। इन्होंने लखनऊ के केजीएमसी से अपना एमबीबीएस किया है। इसके बाद इन्होंने जनरल सर्जरी में एमएस किया और न्यूरो सर्जरी में एमसीएच की पढ़ाई की है। इन्होंने 1996 में कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम किया और 2012 में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में रिटायर हुए। डॉक्टर आईएन वाजपाई आईएमए एंड न्यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉक्टर वाजपई को 45 वर्षों का अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।