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Hearing Problem: युवाओं में 16% तक बढ़ी बहरेपन की समस्या, ये है इसका प्रमुख कारण, कहीं आपको भी तो खतरा नहीं?

Fri, 07 Jul 2023 07:29 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 07 Jul 2023 07:29 PM IST
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Headphones Increase Your Risk of Hearing Loss, ear health problems and prevention
युवाओं में बढ़ती कान की समस्या - फोटो : iStock

वैश्विक स्तर पर युवाओं में कम सुनाई देने या बहरेपन की समस्या बढ़ती हुई देखी जा रही है। हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में साल 2010 से 2020 के बीच 20-30 की आयु वाले लोगों में सुनाई न देने की समस्या 15.78 फीसदी तक बढ़ गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा है कि यह वैश्विक चिंता का विषय है क्योंकि यह समस्या सिर्फ अमेरिका तक ही सीमित नहीं है, दुनिया के अधिकतर देशों में हालात ऐसे ही हैं।



हार्वर्ड विशेषज्ञ कहते हैं, जैसे-जैसे हम प्रौद्योगिकी से जुड़ते जा रहे हैं, इसके दुष्प्रभाव भी सामने आ रहे हैं। युवाओं में कानों की बढ़ती समस्याओं के लिए हेडफोन के अधिक इस्तेमाल को प्रमुख कारण माना जा रहा है। हेडफोन्स की तेज आवाज और कंपन के कारण पर्दों को क्षति पहुंच रही है जिससे कानों से कम सुनाई देने, टिनिटस या गंभीर मामलों में बहरेपन का भी खतरा अधिक हो सकता है।

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हेडफोन से कानों को नुकसान - फोटो : Pixabay

तेज आवाज के कारण क्षतिग्रस्त हो सकती हैं कोशिकाएं

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कान का आंतरिक हिस्सा ध्वनि के प्रति बहुत संवेदनशील होता है। कान में हजारों कोशिकाएं होती हैं, जिनमें से कुछ में बाल जैसी छोटी संरचनाएं होती हैं जिन्हें बाल कोशिकाएं कहा जाता है जो ध्वनि को कानों से मस्तिष्क तक  भेजती हैं। तेज आवाज में हेडफोन्स के कारण इन कोशिकाओं को स्थायी क्षति पहुंच सकती है, जो ध्वनि संचरण के तंत्र को बाधित करती है।

चूंकि हमारे कान के पर्दे एक सीमित तीव्रता वाले ध्वनियों को ही सहन कर सकते हैं, ऐसे में तेज आवाज में हेडफोन्स या फिर बहुत अधिक समय तक हेडफोन्स के इस्तेमाल के कारण कानों को क्षति होने का खतरा रहता है। 

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तेज आवाज से कानों को क्षति - फोटो : iStock

तेज आवाज से फट सकते हैं पर्दे

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने ध्वनि के कारण होने वाली कानों की दिक्कतों को कम करने और कानों को होने वाली समस्याओं से बचाने के लिए पैरामीटर निर्धारित किया है। 85 डेसिबल से अधिक के ध्वनि स्तर के संपर्क में करीब दो घंटे से अधिक समय बिताने की स्थिति में कानों को गंभीर नुकसान हो सकता है। जबकि 105 से 110 डीबी की ध्वनि के संपर्क में  पांच मिनट रहने से भी कान को नुकसान हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादा तेज आवाज में कानों के पर्दे फटने या कोशिकाओं को गंभीर क्षति का जोखिम रहता है, इससे बचाव किया जाना चाहिए।

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तेज न रखें इयरफोन की आवाज - फोटो : iStock

कितनी होनी चाहिए हेडफोन की आवाज

विशेषज्ञ कहते हैं, कानों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए हेडफोन-इयरपॉड्स के ध्वनि का स्तर 60 से 70 डेसिबल के बीच ही रखना चाहिए। इसके अलावा यह भी जरूरी है कि आप लंबे समय तक हेडफोन्स को लगाकर न रखें, इससे कान में हवा का संचार बाधित होने लगता है जिससे संक्रमण का खतरा हो सकता है।

इयरफोन्स जिनमें कानों के भीतर रबर सेट किया जाता है उनकी साफ-सफाई का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। रबर के कारण कानों में आंतरिक संक्रमण हो सकता है। 

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हेडफोन्स का करें सुरक्षित इस्तेमाल - फोटो : Pixabay

इन बातों का रखें ध्यान

अधिक ध्वनि से हमारे कान क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। कानों को स्वस्थ रखने, किसी प्रकार के संक्रमण के जोखिम को कम करने और बहरेपन से बचाव के लिए सभी लोगों के कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। 

  • इस बात का ध्यान रखें आप बहुत देर तक हेडफोन्स का इस्तेमाल न करें और आवाज तेज न हो।
  • यदि आप किसी ऐसे कार्यक्रम में भाग लेने जा रहे हैं जहां लंबे समय तक तेज शोर होने की संभावना है तो इयरप्लग लगाएं।
  • कानों की साफ-सफाई का भी ध्यान रखें।
  • कुछ समय से यदि कानों में दर्द, झनझनाहट, कान बजने या कम सुनाई देने की समस्या हो रही है तो तुरंत किसी विशेषज्ञ की सलाह लें।



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स्रोत और संदर्भ
Healthy headphone use: How loud and how long?

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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