आंखें, ईश्वर द्वारा दी गई सबसे खूबसूरत उपहार मानी जाती हैं। इन्हीं की मदद से हम दुनिया के खूबसूरत नजारों का आनंद ले पाते हैं। पर हाल के दशकों में जीवनशैली और आहार की गड़बड़ी के कारण आंखों की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा है। पिछले कुछ वर्षों में आंखों की जो बीमारियां सबसे तेजी से बढ़ी हैं, ग्लूकोमा उन्हीं में से एक है। ग्लूकोमा को 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अंधेपन का प्रमुख कारण माना जाता है, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में कम उम्र के लोगों में भी इस गंभीर समस्या का निदान किया जा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में 12 मिलियन से ज्यादा लोग ग्लूकोमा से पीड़ित हैं, विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से इस रोग के मामले बढ़ रहे हैं, ऐसे में आशंका है कि साल 2040 तक इस बीमारी के रोगियों की संख्या बढ़कर दोगुना तक हो सकती है।
Glaucoma Awareness Month: साल 2040 तक दोगुना हो सकती है ग्लूकोमा रोगियों की संख्या, जानिए इसके लक्षण और बचाव के तरीके
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ग्लूकोमा क्या है?
ग्लूकोमा, आंखों की समस्याओं का एक समूह है, जो ऑप्टिक नर्व्स को नुकसान पहुंचाता है। अच्छी दृष्टि के लिए ऑप्टिक नर्व्स का स्वस्थ रहना आवश्यक माना जाता है। मुख्यरूप से आंखों में असामान्य रूप से पड़ने वाले दबाव के कारण इस तरह की समस्या होती है। यह किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन वृद्ध लोगों में अधिक आम है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ग्लूकोमा के कई रूपों में कोई भी संकेत नहीं दिखते हैं। कई मामलों में इसका प्रभाव इतना धीरे-धीरे होता है कि जब तक समस्या गंभीर स्थिति में नहीं पहुंच जाती है, तब तक इस बारे में पता नहीं चल पाता है।
कैसे की जा सकती है ग्लूकोमा की पहचान?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक चूंकि कई बार ग्लूकोमा के लक्षण नजर नहीं आते हैं, यही कारण है कि समय-समय पर आंखों की जांच कराते रहना चाहिए जिससे कि इस तरह की समस्याओं का पता लगाया जा सके। ग्लूकोमा के कारण आंखों में कई तरह की दिक्कतें महसूस हो सकती हैं जिसका समय पर निदान किया जाना आवश्यक होता है।
- आंखों में तेज दर्द का बने रहना।
- जी मिचलाना- उल्टी महसूस होना।
- आंखों का अक्सर लाल रहना।
- रोशनी के चारों ओर रंगीन छल्ले दिखना।
- अचानक दृष्टि का धुंधला हो जाना।
ग्लूकोमा का उपचार कैसे किया जाता है?
नेत्र रोग विशेषज्ञों के मुताबिक ग्लूकोमा से होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती है। लेकिन उपचार और नियमित जांच के माध्यम से दृष्टि हानि को कम करने या रोकने में मदद मिल सकती है, खासकर यदि रोग का प्रारंभिक चरण में ही निदान कर लिया जाए। ग्लूकोमा के इलाज में आपकी आंखों पर दबाव (इंट्राओकुलर प्रेशर) को कम किया जाता है। इसके लिए आईड्रॉप्स, दवाएं, लेजर उपचार या आवश्यकता पड़ने पर सर्जरी भी करनी पड़ सकती है।
ग्लूकोमा से बचाव के क्या तरीके हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यदि हम लगातार आंखों की सेहत पर ध्यान रखें तो ग्लूकोमा के खतरे को काफी हद तक कम या इससे बचाव किया जा सकता है। इसके लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। ग्लूकोमा से बचे रहने या शुरुआती चरणों के बारे में पता लगाने के लिए समय-समय पर आंखों की जांच कराते रहना चाहिए।
- अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी के मुताबिक हर पांच से 10 साल में एक बार आंखों की अच्छी तरह से जांच करनी चाहिए।
- ग्लूकोमा आनुवांशिक हो सकता है। इसलिए यदि आपके परिवार में किसी को इस तरह की समस्या है तो आप को अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता हो सकती है।
- नियमित रूप से मध्यम स्तर तक के आंखों के व्यायाम, आंखों के दबाव को कम करके ग्लूकोमा को रोकने में मदद कर सकते है। उचित व्यायाम के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें। आंखों में होने वाली किसी भी तरह की समस्या में खुद से किसी भी दवा या आई ड्रॉप का इस्तेमाल न करें, डॉक्टर की सलाह लेना बहुत आवश्यक होता है।
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स्रोत और संदर्भ
Glaucoma - Symptoms and causes
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