Gestational Diabetes Risk: वैश्विक स्तर पर बच्चों में कई प्रकार की बीमारियों का जोखिम तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। कुछ समस्याएं जन्म के शुरुआती महीनों में विकसित होती हैं जबकि कुछ का खतरा जन्मजात हो सकता है। ऑटिज्म ऐसी ही तेजी से बढ़ती समस्या है। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 36 में से 1 बच्चे को ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार (एएसडी) का निदान किया गया है।
Autism Risk: गर्भावस्था में इस चीज पर दे लिया ध्यान तो 60% तक कम हो सकता है बच्चों में ऑटिज्म का खतरा
- गर्भावस्था के दौरान की गड़बड़ आदतें जैसे धूम्रपान-शराब के सेवन, असंतुलित आहार, मानसिक तनाव या संक्रमण बच्चे के मस्तिष्क विकास को प्रभावित कर सकती हैं।
- हालिया अध्ययन में बताया गया है कि गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज की स्थिति बच्चों में ऑटिज्म का खतरा बढ़ सकती है।
गर्भावधि में डायबिटीज के कारण बच्चों में ऑटिज्म का खतरा
पहले के भी कई अध्ययनों में बताया जाता रहा है कि गर्भावस्था के दौरान की गड़बड़ आदतें जैसे धूम्रपान-शराब के सेवन, असंतुलित आहार, मानसिक तनाव या संक्रमण बच्चे के मस्तिष्क विकास को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा जेनेटिक फैक्टर, प्रदूषण और जन्म के समय जटिलताएं भी इसके बड़े कारण माने जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज की स्थिति जैसे गर्भावधि मधुमेह कहा जाता है, इसके कारण बच्चों में ऑटिज्म का खतरा बढ़ सकता है। मोटापे तथा अधिक उम्र की माताओं में गर्भकालीन डायबिटीज की समस्या अधिक देखी जाती रही है, इससे बच्चों में ऑटिज्म का खतरा बढ़ सकता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने 48 अध्ययनों की समीक्षा की जिसमें 90 लाख से अधिक गर्भवतियों को शामिल किया गया था। निष्कर्ष में पाया गया कि जिन महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज की दिकक्त थी उनके बच्चे में ऑटिज्म होने का जोखिम लगभग 60 प्रतिशत अधिक था। शोधकर्ता इस बात पर जोर देते हैं कि इस स्थिति का कोई एक कारण नहीं है, यह आनुवंशिकी और पर्यावरणीय प्रभावों से उत्पन्न होती है।
विशेषज्ञों ने कहा, हमें ऑटिज्म को बढ़ावा देने वाले जीवनशैली से जुड़े कारक के बारे में पता चला है, जिसपर अगर समय रहते ध्यान दे लिया जाए तो संभवत: बच्चों को ऑटिज्म से बचाया जा सकता है।
गौरतलब है कि ऑटिज्म के लक्षण 3 साल की उम्र से पहले नजर आने लगते हैं जिसमें बच्चों के आंख से संपर्क न करना, बार-बार एक ही क्रिया दोहराना, भाषा विकास में देरी या दूसरों के साथ खेलना पसंद न करना। विशेषज्ञ कहते हैं कि ऑटिज्म का खतरा बढ़ रहा है, लेकिन अगर गर्भावस्था में सही पोषण, स्वस्थ जीवनशैली और तनावमुक्त वातावरण मिले तो इस रिस्क को काफी हद तक कम किया जा सकता है। गर्भावस्था में डायबिटीज की स्थिति पर भी ध्यान रखने की आवश्यकता है।
गर्भावधि मधुमेह से बच्चों में एडीएचडी का भी खतरा
यूरोपियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज में प्रस्तुत अध्ययन में यह भी पाया गया कि गर्भावधि मधुमेह से पीड़ित माताओं के बच्चों में अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) होने का जोखिम भी 36 प्रतिशत अधिक हो सकती है।
गर्भ के दौरान डायबिटीज की स्थिति शिशु में भ्रूण मैक्रोसोमिया या 'जाइंट बेबी सिंड्रोम' विकसित होने की संभावना भी बढ़ा देती है, जिसमें शिशु औसत आकार से कहीं बड़े आकार के पैदा होते हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में ऑब्सटेट्रिक्स साइंस के प्रोफ़ेसर डॉ. दिमित्रियोस सियासाकोस कहते हैं गर्भकालीन मधुमेह माताओं और शिशुओं को बहुत से रोके जा सकने वाले नुकसान पहुंचा रहा है। चिंताजनक बात ये भी है कि बहुत सी महिलाओं में इसका निदान ही नहीं हो पा रहा है।
गर्भकालीन मधुमेह गर्भावस्था के किसी भी चरण में हो सकता है। हालांकि, यह दूसरी और तीसरी तिमाही में ज्यादा आम है। अगर समय रहते इसपर ध्यान दे लिया जाए तो शिशुओं को कई प्रकार की गंभीर समस्याओं से सुरक्षित रखा जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान लाइफस्टाइल को ठीक रखना और शराब-धूम्रपान से दूरी बनाना भी बहुत आवश्यक है।
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स्रोत
Gestational diabetes linked to autism in study: what scientists say
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