Guillain-Barre Syndrome: गिलियन बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिसका खतरा अब कई राज्यों में बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र इससे सबसे प्रभावित राज्य रहा है, पुणे में इसके सबसे ज्यादा मरीज हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुणे में जीबीएस से प्रभावित रोगियों की संख्या 149 हो गई है, शनिवार (1 फरवरी 2025) को यहां एक और व्यक्ति की मौत हुई है। पुणे में अब गिलियन बैरे सिंड्रोम के कारण मृतकों की संख्या पांच हो गई है। मृतक 60 वर्षीय बुजुर्ग था, जिसे उच्च रक्तचाप की भी समस्या थी।
GBS: गिलियन बैरे सिंड्रोम से पुणे में एक और मौत, इन राज्यों में भी अलर्ट; डॉक्टर ने बचाव के लिए बताए उपाय
पुणे में अब गिलियन बैरे सिंड्रोम के कारण मृतकों की संख्या पांच हो गई है, करीब 150 लोग इस बीमारी से प्रभावित माने जा रहे हैं। न्यूरोसर्जन ने इस बीमारी से बचाव के लिए कुछ जरूरी उपाय बताए हैं जिसपर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी हो रहे हैं शिकार
गिलियन-बैरे सिंड्रोम अपनी गंभीरता के कारण सेहत के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। इससे प्रभावित अधिकतर मरीजों को आईसीयू और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है। बहुत कम समय में ही ये बीमारी देश के कई राज्यों में बढ़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना में सामने आए मरीज को भी वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।
अब तक के मरीजों पर नजर डालें तो पता चलता है कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इस रोग का शिकार पाए जा रहे हैं, जिसको लेकर विशेषज्ञों ने अलर्ट किया है।
गिलियन बैरे सिंड्रोम के कारण गंभीर समस्याओं का भी खतरा
गिलियन बैरे सिंड्रोम एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से पेरिफेरल नर्व्स (परिधीय तंत्रिकाओं) पर अटैक कर देती है, जिसके कारण हाथों-पैरों में कमजोरी, अंगों में झुनझुनी और गंभीर मामलों में लकवा जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। जीबीएस के कारण गंभीर स्थिति में आपको लकवा मारने और सांस लेने में समस्या हो सकती है। सांस की दिक्कत वाले मरीजों को आईसीयू या वेंटिलेटर पर रखने की भी जरूरत होती है ताकि शरीर में ऑक्सीजन के संचार में कोई दिक्कत न आने पाए। इसके अलावा कुछ अन्य लक्षणों पर भी गंभीरता से ध्यान देते रहें।
अगर आपको हाथ और पैर की उंगलियों, टखनों या कलाई में सुई चुभने जैसा एहसास हो रहा है, सांस की दिक्कत हो या किसी अंग में असामान्य रूप से कमजोरी महसूस हो रही हो तो इसे बिल्कुल अनदेखा न करें।
इन चीजों से बनाएं दूरी
एम्स दिल्ली में एमडी मेडिसिन और डीएम न्यूरोलॉजी डॉ. प्रियंका सेहरावत बताती हैं, कई स्थानों पर दूषित पानी में मौजूद बैक्टीरिया के कारण भी इस रोग के ट्रिगर होने का खतरा देखा गया है। इन जोखिमों को ध्यान में रखते हुए दूषित भोजन और पानी के सेवन से बचा जाना चाहिए। बाहर की चीजों को खाने-पीने से बचें। कहीं बाहर जा रहे हैं तो घर से ही पानी की बोतल लेकर जाएं।
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इसके अलावा सबसे खास बात अगर आपको जीबीएस के कोई भी लक्षण महसूस हो रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। जितनी जल्दी इस बीमारी का इलाज होगा, रोगी के ठीक होने की संभावना उतनी ही अधिक हो सकती है।
बचाव के लिए न्यूरोसर्जन ने बताए उपाय
रांची रिम्स में न्यूरोसर्जन डॉ विकास कुमार ने इस बढ़ती बीमारी से बचाव के लिए कुछ उपाय बताए हैं जिसपर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
- नियमित रूप से हाथ धोने की आदत डालें, खासकर खाने से पहले और किसी बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद।
- बाहर कुछ भी खाने-पीने से बचें ताकि बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा कम हो सके।
- मौसम बदलने पर खुद का ख्याल रखें ताकि वायरल इंफेक्शन से पीड़ित ना हों क्योंकि ये बीमारी वायरल इंफेक्शन के बाद भी फैल सकती है।
- पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें, जिससे आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनी रहे।
- नियमित व्यायाम से आपके शरीर की ताकत और तंत्रिका तंत्र का स्वास्थ्य बेहतर होता है।।
- अच्छी नींद लेने से शरीर की रक्षा प्रणाली बेहतर काम करती है, जो संक्रमण से बचाव में मदद करती है।
- अगर आपको शरीर में कमजोरी, सुन्नपन या झनझनाहट महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज से स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सकता है।
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स्रोत और संदर्भ
Guillain-Barré Syndrome
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