Medically Reviewed by Dr. I.N. Vajpai
न्यूरो सर्जन
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम.एस (जनरल सर्जरी), एमसीएच (न्यूरो सर्जरी), उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
अनुभव- 45 वर्ष
जिस तरह ब्लड शुगर लेवल का बढ़ना शरीर के लिए खतरनाक होता है, उसी तरह यूरिक एसिड का बढ़ना भी हानिकारक होता है। दरअसल, खून में यूरिक एसिड के उच्च स्तर को हाइपरयूरीसेमिया कहा जाता है। जब शरीर में यूरिक एसिड के उत्पादन में वृद्धि हो जाती है या किडनी के माध्यम से इसका कम उत्सर्जन होता है, तो शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता है। यूरिक एसिड बढ़ने से स्वास्थ्य संबंधी कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं, जिसमें किडनी स्टोन, किडनी का खराब होना और गाउट शामिल हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि हाई यूरिक एसिड गाउट का खतरा बढ़ा सकता है। दरअसल, गाउट एक प्रकार का अर्थराइटिस (गठिया) ही होता है। इसमें यूरिक एसिड के क्रिस्टल जोड़ों में जमा हो जाते हैं। इस बीमारी में मरीजों को अपनी डाइट को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं किन चीजों से परहेज करना चाहिए?
सलाह: गठिया का खतरा बढ़ा सकता है हाई यूरिक एसिड, इन चीजों से परहेज जरूरी
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इन चीजों से परहेज जरूरी
- शराब का सेवन न करें, क्योंकि इससे यूरिक एसिड का स्तर घटने के बजाय और बढ़ जाएगा।
- हाई फ्रुक्टोस कॉर्न या ग्लूकोज फ्रुक्टोस से भी यूरिक एसिड का स्तर बढ़ता है, इसलिए ऐसी चीजों से भी परहेज जरूरी है।
- वसा युक्त आहार न खाएं, क्योंकि इससे शरीर से यूरिक एसिड को बाहर निकालने में परेशानी हो सकती है।
- रिफाइन कार्बोहाइड्रेट से बने आहार, जैसे व्हाइट ब्रेड, केक और कैंडीज न खाएं।
प्यूरीन युक्त आहार न लें
- प्यूरीन एक प्रकार का प्रोटीन होता है, जिसे शरीर में हाई यूरिक एसिड के लिए जिम्मेदार माना जाता है। इसलिए प्यूरीन युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे मीट, मछली, चिकन, खमीर, मशरूम, बीन्स कम खाएं या बिल्कुल न खाएं। दरअसल, इन चीजों में प्यूरीन की काफी अधिक मात्रा होती है।
फाइबर युक्त आहार लें
- यूरिक एसिड अगर बढ़ गया है तो फाइबर से समृद्ध खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए, क्योंकि ये यूरिक एसिड के स्तर को अवशोषित करके और शरीर से उन्हें बाहर निकालने में मदद करते हैं। साबुत अनाज, सेब, संतरा, स्ट्रॉबेरी आदि फाइबर से भरपूर होते हैं। आप इनका सेवन कर सकते हैं।
कम वसा वाला दूध लें
- कम वसा वाले दूध यूरिक एसिड को कम करते हैं और गाउट के जोखिम को भी दूर करते हैं। इसके अलावा रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है। इससे भी यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में मदद मिलती है और गाउट की समस्या उत्पन्न नहीं होती।
नोट: डॉ. आईएन वाजपई अत्यधिक योग्य और अनुभवी न्यूरो सर्जन हैं। इन्होंने लखनऊ के केजीएमसी से अपना एमबीबीएस किया है। इसके बाद इन्होंने जनरल सर्जरी में एमएस किया और न्यूरो सर्जरी में एमसीएच की पढ़ाई की है। इन्होंने 1996 में कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम किया और 2012 में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में रिटायर हुए। डॉक्टर आईएन वाजपाई आईएमए एंड न्यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉक्टर वाजपई को 45 वर्षों का अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।