कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच इसकी दवा और वैक्सीन को लेकर रिसर्च जारी है। वहीं पहले से ही उपलब्ध दवाओं के जरिए कोरोना के मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इसी कड़ी में एक स्टेरॉयड दवा की दुनियाभर में चर्चा हो रही है। यह दवा है- डेक्सामेथासोन, जो कोरोना मरीजों के लिए पहली लाइफ सेविंग ड्रग यानी जीवनरक्षक दवा बन के उभरी है। यह कोरोना के गंभीर संक्रमण वाले मामलों में मौत का खतरा एक तिहाई तक कम कर देती है। यानी मौत के करीब पहुंचे हर तीन मरीजों में से एक की जिंदगी बचाती है।
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Coronavirus Drug: कैसे कोरोना मरीजों की जान बचाती है डेक्सामेथासोन? जानें इसके बारे में सबकुछ
Thu, 18 Jun 2020 01:20 PM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Thu, 18 Jun 2020 01:20 PM IST
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Coronavirus Drug Update
- फोटो : Amar Ujala
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- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
- ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने अपनी ताजा रिसर्च में इस बात की पुष्टि की है कि डेक्सामेथासोन नाजुक हालत में पहुंचे कोरोना के मरीजों में मौत का खतरा 35 फीसदी तक कम करती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस दवा की सराहना की है। भारत में भी कोरोना मरीजों पर इस दवा का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह दवा सस्ती भी है और आसानी से उपलब्ध भी है। आइए जानते हैं कि यह कैसे काम करती है, इसकी डोज क्या है, इसकी कीमत क्या है और भारत में इसकी उपलब्धता क्या है?
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- फोटो : Pixabay
- ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के मुख्य अनुसंधानकर्ता पीटर हॉर्बी के मुताबिक, रिसर्च के दौरान अब तक सामने आया है कि डेक्सामेथासोन मौत के आंकड़े को एक तिहाई तक कम करती है। यही एकमात्र ऐसी ड्रग है, जो कोरोना मरीजों में मौत का खतरा घटाती है। यह दवा बेहद सस्ती है और वैश्विक स्तर पर आसानी से उपलब्ध है। इसलिए लोगों की जान बचाने में यह बहुत कारगर साबित हो सकती है।
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- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
- इस शोध के दौरान कोरोना के ऐसे 2104 ऐसे गंभीर मरीजों को यह दवा दी गई जिन्हें या तो सांस लेने के लिए मशीन की जरूरत थी या फिर ऑक्सीजन की। जिन मरीजों को ब्रीदिंग मशीन की जरूरत थी, उन मरीजों में मौत का खतरा घटा 35 फीसदी तक कम हुआ, जबकि ऑक्सीजन ले रहे मरीजों में मौत का खतरा 20 फीसदी तक कम हुआ।
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- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
- विशेषज्ञों के मुताबिक, इस दवा से होने वाले इलाज का खर्च प्रतिदिन 50 रुपये से भी कम आता है। अगर 10 दिन तक इलाज चले तो 500 रुपये से कम खर्च आएगा। हालांकि इस दवा का असर कोरोना के हल्के लक्षणों वाले मरीजों में नहीं दिखा है, लेकिन जिन गंभीर मरीजों में लक्षण 15 दिन के बाद कम होते थे, डेक्सामेथासोन के कारण 11वें दिन से ही कम दिखने लगे।