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BHU शोधकर्ता से Exclusive बातचीत: 30% लोगों में बिल्कुल खत्म हो चुकी हैं एंटीबॉडीज, कोरोना की चौथी लहर की बढ़ी आशंका

Abhilash Srivastava अभिलाष श्रीवास्तव
Updated Mon, 25 Apr 2022 05:07 PM IST
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Fear of fourth wave of corona in india, 30 percent of people have no antibodies against covid 19
देश में बढ़ता कोरोना संकट - फोटो : Amar Ujala/Pixabay

देश में तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामले चिंता बढ़ाने वाले हैं। ज्यादातर केस ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट BA.2 के रिकॉर्ड किए जा रहे हैं, जिन्हें अध्ययन में काफी अधिक संक्रामता वाला बताया जाता है। पिछले 24 घंटे में देशभर में 2500 से अधिक नए मामले सामने आए, वहीं करीब 30 लोगों की संक्रमण के कारण मौत हुई है। जिस तरह से पिछले दो हफ्तों से कोरोना के मामलों में तेजी देखी जा रही है, ऐसे में


देश में संक्रमण के चौथी लहर की आशंका बढ़ गई है। बड़ी बात यह भी है कि देश के कुछ राज्यों से अब तक के सबसे अधिक संक्रामकता वाले नए एक्सई वैरिएंट से संक्रमण को लेकर भी खबरें सामने आ रही हैं। एक्सई वैरिएंट की संक्रामकता दर को लेकर हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने लोगों को सचेत किया है।

क्या देश चौथी लहर की तरफ बढ़ रहा है? यह लहर कितनी गंभीर हो सकती है? इससे बचाव के लिए क्या किया जाना चाहिए? ऐसे कई सवाल इस समय हम सभी के मन में हैं। शोध बताते हैं कि जिन लोगों का टीकाकरण हो चुका है उनमें संक्रमण की स्थिति में गंभीर रोग और मृत्यु का खतरा कम होता है। हालांकि हाल ही में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक सीरो सर्वे में पता चला है कि ज्यादातर लोगों में वैक्सीनेशन या संक्रमण से बनी एंटीबॉडीज खत्म हो चुकी हैं। इस सर्वे की महत्वपूर्ण बातें जानने के लिए हमने प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे (साइटोजेनेटिक्स लैब, जूलॉजी विभाग ) से बातचीत की। आइए इस बारे में आगे विस्तार से जानते हैं।

Fear of fourth wave of corona in india, 30 percent of people have no antibodies against covid 19
कोरोना के डराने वाले आंकड़े - फोटो : PTI

सीरो सर्वे में क्या पता चला?

प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे बताते हैं, संक्रमण की स्थिति के बारे में जानने के लिए हर तीन महीने में सीरो सर्वे किए जाते हैं। यह सर्वे बनारस के लोगों पर किया गया। इस शोध के लिए 116 लोगों के रैंडम सैंपल लेकर उनमें कोविड-19 रोग प्रतिरोधक एंटीबॉडीज का स्तर जानने के लिए अध्ययन किया गया। इसमें जो आंकड़े सामने आए हैं वह निश्चित ही डराने वाले हैं।

सैंपल के अध्ययन से पता चला कि 30 फीसदी लोगों में एंटीबॉडीज का स्तर लगभग खत्म हो चुका है। ऐसे में उनमें संक्रमण का जोखिम अधिक हो सकता है। 46 फीसदी लोगों में एंटीबॉडीज का स्तर काफी कम मात्रा में पाया गया, जोकि सामान्यत: एक से डेढ़ महीने में खत्म हो जाती हैं। सिर्फ 17 फीसदी लोगों में ही संक्रमण से मुकाबले के लिए पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडीज पाई गई हैं।

Fear of fourth wave of corona in india, 30 percent of people have no antibodies against covid 19
कम हो रही है प्रतिरोधक एंटीबॉडीज - फोटो : iStock

अध्ययन में क्या पता चला?

प्रोफेसर चौबे बताते हैं, अध्ययन के दौरान वैक्सीनेशन और प्राकृतिक संक्रमण, दोनों स्थितियों में निर्मित एंटीबॉडीज के स्तर पर गौर किया गया। शोध से पता चलता है जिन लोगों में एंटीबॉडीज बिल्कुल नहीं हैं, वह तीसरी लहर के दौरान संक्रमित नहीं थे, इनमें से ज्यादातर लोगों का जुलाई 2021 में वैक्सीनेशन का दोनों डोज पूरा हो चुका था।

जिनमें कम मात्रा में एंटीबॉडीज पाई गईं, वह दूसरी लहर के दौरान जबकि जिन लोगों में पर्याप्त एंटीबॉडीज मौजूद हैं, वह तीसरी लहर के दौरान संक्रमण के शिकार रह चुके हैं।

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Fear of fourth wave of corona in india, 30 percent of people have no antibodies against covid 19
एंटीबॉडी परीक्षण में चौंकाने वाले डेटा सामने आए - फोटो : Pixabay

क्या गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है इस समय का संक्रमण?

प्रोफेसर चौबे कहते हैं, ज्यादातर लोगों में फिलहाल ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट के ही मामले देखे जा रहे हैं। शोध में पाया गया है कि ये वैरिएंट्स गंभीर रोगों का कारण तो नहीं बन रहे हैं, हालांकि इनकी संक्रामता अधिक जरूर है। विशेषरूप से ओमिक्रॉन BA.2 (इस समय का मुख्य वैरिएंट), तीसरी लहर के कारण माने जा रहे ओमिक्रॉन BA.1 की तुलना में 10 फीसदी अधिक संक्रामकता वाला पाया गया है। फिलहाल इनसे संक्रमण की स्थिति में लोगों में गंभीर रोग के मामले ज्यादा नहीं देखे जा रहे हैं।

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कोरोना के नए वैरिएंट्स ने बढ़ाई चिंता - फोटो : iStock

क्या एक्सई वैरिएंट भी बन सकता है मुसीबत?

डब्ल्यूएचओ ने हाल ही में एक्सई वैरिएंट की संक्रामता दर को लेकर लोगों को अलर्ट किया है। शोध में पता चलता है कि यह ओमिक्रॉन BA.2 से भी 10 फीसदी अधिक संक्रामकता वाला हो सकता है। इस बारे में प्रोफेसर चौबे  बताते हैं, मुंबई सहित कुछ अन्य हिस्सों में एक्सई वैरिएंट के मामले जरूर सामने आए हैं, हालांकि ओवरऑल देखें तो देश में फिलहाल ओमिक्रॉन BA.2 के ही मामले अधिक देखे जा रहे हैं। यह संक्रामकता में अधिक जरूर है पर इसके कारण बहुत गंभीर मामले देखने को नहीं मिल रहे हैं। हालांकि लोगों को इससे विशेष बचाव की आवश्यकता है।

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