कोरोना वायरस का आतंक लगातार जारी है। जहां इस साल सबको उम्मीद थी कि कोरोना वायरस का अंत हो सकता है, तो वहीं ब्रिटेन में मिले कोरोना के नए स्ट्रेन (प्रकार) ने हर किसी को हैरान कर दिया है। ब्रिटेन में आलम ये है कि यहां ये वायरस लगातार बढ़ता जा रहा है और लोगों को अपना शिकार बना रहा है। लेकिन इन सबके बीच विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना के इस नए स्ट्रेन के ज्यादा घातक होने के सबूत नहीं मिले हैं। भारत में भी इस नए स्ट्रेन से संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
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दरअसल, विशेषज्ञों को यूके से आए नए कोरोना वायरस की गंभीरता का विश्लेषण करने और दिल्ली के लोक नायक अस्पताल में इलाज के दौरान उनके सीधे संपर्क में आने से पता चला है कि इनमें से कुछ लोगों में हल्के या गंभीर लक्षण हैं। इन 60 लोगों में से सिर्फ दो को छोड़कर बाकी सभी एसिम्टोमैटिक हैं या फिर उनमें बहुत हल्के लक्षण हैं।
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लोक नायक अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉक्टर सुरेश कुमार का कहना है कि जैसे ही उनके जीनोम सीक्वेंसिंग के परिणाम सामने आते हैं, तो फिर हम इनमें से कुछ लोगों को अस्पताल से छुट्टी देने की भी योजना बनाएंगे। कोरोना के नए स्ट्रेन को लेकर मैक्स सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में आंतरिक चिकित्सा के एसोसिएड डायरेक्टर डॉक्टर रोमेल टिकू ने कहा कि, अभी तक इस बारे में चिंता की कोई बात नहीं है।
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इस स्ट्रेन का म्यूटेशन ज्यादा संक्रामक हो सकता है, लेकिन इस बात को पुख्ता करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि ये पहले के मुकाबले अधिक गंभीर लक्षण का कारण बनता है। उन्होंने ये भी कहा कि, हालांकि हमें उन लोगों की स्क्रीनिंग करने की जरूरत है जो उन देशों से आ रहे हैं, जहां ये नया स्ट्रेन है। साथ ही हमें मास्क पहनना, हाथ धोना और शारीरिक दूरी बनाए रखने जैसी बातों का पालन करते रहना चाहिए।
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जब से कोरोना वायरस सामने आया, इसके बाद से ही विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि कोरोना वायरस ने शुरूआत से ही कई रूप बदले हैं। हालांकि, ब्रिटेन में मिला नया स्ट्रेन चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि ये पहले के मुकाबले अधिक संक्रामक है। वहीं, सीएमसी वेल्लोर के माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर डॉक्टर गगनदीप कांग ने कहा कि इस स्ट्रेन में गंभीरता में वृद्धि दिखाने के लिए कोई सबूत नहीं था। एम्स में एक वेबिनार में कांग ने चेतावनी दी कि जब कोई वायरस अनियंत्रित हो जाता है और टीकाकरण की दर कम होती है, तो वायरस के म्यूटेशन की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने म्यूटेशन की शीघ्र पहचान करने पर जोर देने को भी कहा है।