कोविड-19 के मामले और इससे होने वाली मौतों के आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं। भारत में हर दिन के साथ हालात बदतर होते जा रहे हैं। अब सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि आखिर कोविड के कारण होने वाली मौतों को किस तरह से कम किया जा सकता है। इस बीच एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन प्रकाशित किया है जिसने लोगों में थोड़ी उम्मीद जरूर जगाई है। शोधकर्ताओं ने बताया है कि जो लोग सूरज की किरणों के संपर्क में रहते हैं उनमें कोविड-19 से होने वाली मौतों का खतरा दूसरे लोगों की तुलना में कम होता है। आइए इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।
क्या सूर्य की किरणें कोरोनावायरस को मार सकती हैं? जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्या कहता है शोध
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि सूरज से निकलने वाली यूवीए किरणों के संपर्क में रहने वाले लोगों में कोविड-19 से मरने का जोखिम कम होता है। त्वचा संबंधित कई प्रकार के कैंसर के अलावा सूरज की किरणें कोरोना वायरस के प्रभाव को कम करने में भी मददगार हो सकती हैं। शोधकर्ताओं ने जनवरी-अप्रैल 2020 तक अमेरिका में कोविड-19 से हुई कुल मौतों के डेटा के अध्ययन के आधार पर इसकी पुष्टि की है।
कई देशों में देखे गए ऐसे ही परिणाम
2,474 अमेरिकी लोगों के डेटा पर किए गए अध्ययन के दौरान विशेषज्ञों ने पाया कि जो इलाके यूवीए किरणों के सबसे ज्यादा संपर्क में रहते हैं वहां के लोगों में कोविड-19 से मौत के मामले कम देखे गए हैं। इसी आधार पर इंग्लैंड और इटली में भी किए गए अध्ययनों को ऐसे ही परिणाम देखने को मिले हैं।
पहले भी अध्ययनों में किया गया है ऐसा दावा
इससे पहले पिछले साल सितंबर में हुए अध्ययन में हिरोशिमा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने बताया था कि पराबैंगनी सी प्रकाश के 222 एनएम तरंग दैर्ध्य का उपयोग करते हुए सार्स सीओवी-2 वायरस को मारा जा सकता है। यह मात्रा आंख और त्वचा में जीवित कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचाती हैं। यह दुनिया में पहला अध्ययन था जो कोविड-19 वायरस के खिलाफ सूर्य की रोशनी को प्रभावी साबित करता है।
पराबैंगनी किरणों का ज्यादा मात्रा भी है खतरनाक
इसके अलावा डब्ल्यूएचओ भी अल्ट्रा-वायलेट रेडिएशन के खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। लोगों में विटामिन डी का उत्पादन करने के लिए पराबैंगनी (यूवी) विकिरण की छोटी मात्रा आवश्यक होती है। इसकी अत्यधिक मात्रा कई प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण भी बन सकती है।
स्रोत और संदर्भ:
Sunlight linked with lower Covid-19 deaths
https://www.ed.ac.uk/news/2021/sunlight-linked-with-lower-covid-19-deaths
अस्वीकरण नोट: यह लेख एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।