डॉ प्रिया पाण्डेय
डिग्री- बीएससी (ह्यूमन न्यूट्रीशियन)
अनुभव - आठ वर्ष
Medically Reviewed by Dr. Priya pandey
शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए खूब सारा पानी पीने की सलाह दी जाती है। डॉक्टरों का भी मानना है कि ज्यादा मात्रा में पानी का सेवन करना हमारे लिए बहुत आवश्यक हो सकता है। आमतौर पर 2 से 3 लीटर पानी पीना हमारी सेहत के लिए उपयुक्त माना जाता है, लेकिन अगर आपको इससे भी ज्यादा प्यास लगती है तो क्या इसे सामान्य माना जा सकता है? नहीं, डॉक्टर इसे सामान्य नहीं मानते हैं। अगर आपको बार-बार प्यास लगती है तो इसका मतलब है कि आपका शरीर कुछ संकेत दे रही है जिन्हें आपको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बार-बार प्यास लगने की समस्या कई गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकती हैं, जिनका समय रहते इसका इलाज करना जरूरी होता है।
क्या बार-बार प्यास लगना हो सकता है गंभीर बीमारियों की ओर इशारा? जानें क्या कहते हैं डॉक्टर
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क्यों लगती है ज्यादा प्यास?
मेडिकल टर्म में ऐसी स्थिती को पॉलीडिप्सिया कहा जाता है जिसमें एक व्यक्ति बहुत ज्यादा पानी पीता है। ज्यादा पानी पीने के कारण शरीर में सोडियम की कमी होने लगती है। कईं बार आप ने यह भी नोट किया होगा कि ज्यादा पानी पीने के कारण मन घबराने लगता है और आपको उल्टी भी महसूस हो सकती है।
इन बीमारियों का हो सकता है संकेत
वैसे तो ज्यादा पानी पीना हमारी सेहत के लिए अच्छा होता है क्योंकि हम जितना पानी पीते हैं उससे शरीर के सारे टॉक्सिन पेशाब द्वारा निकल जाती हैं। इससे हमारा शरीर स्वस्थ रहता है। लेकिन अगर बार-बार आपको प्यास लगती है और पानी पीते रहने के बाद भी प्यास नहीं बुझती है तो यह कुछ गंभीर बीमारियों का लक्षण भी हो सकता है।
डिहाईड्रेशन
ज्यादा पानी पीने का सबसे बड़ा कारण यह हो सकता है कि आपके शरीर में पानी की कमी है, जिसकी वजह से आपको बार-बार पानी की प्यास लग रही है। डिहाईड्रेशन की स्थिति में आपको निम्न लक्षणों का अनुभव हो सकता है।
- बार-बार प्यास लगना
- मुंह सूखना
- थकान
- उल्टी
- मतली
डायबिटीज का खतरा
अगर आपको बार-बार प्यास लगती है तो इसे नजरअंदाज न करें क्योंकि इससे आपको डायबिटीज का खतरा हो सकता है। डायबिटीज के कारण खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है जिसके कराण आपकी किडनी साफ नहीं हो पाती है और शुगर पेशाब के साथ बाहर निकलता है, जिसके कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है। यही बार-बार प्यास लगने की वजह बनती है।
नोट: यह लेख दिल्ली डॉ प्रिया पाण्डेय से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर प्रिया को 8 वर्षों का अनुभव है। डॉ प्रिया ने कानपुर विश्वविद्यालय से ह्यूमन न्यूट्रीशियन में स्नातक किया हुआ है। वह आभा सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल में आहार विशेषज्ञ के तौर पर कार्यरत हैं। डॉ प्रिया कई संस्थानों में बतौर लेक्चरर ह्यूमन न्यूट्रीशियन के छात्रों को पढ़ाती भी हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला के हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।