अक्सर काम के कारण होने वाली थकान और सिरदर्द को दूर करने के लिए हमें चाय-कॉफी पीने की जरूररत महसूस होती है। इसे पीने के कुछ देर बात ही शरीर में स्फूर्ति का अनुभव होता है और दोबारा काम पर लग जाते हैं। पर ऐसा दिन में कितनी बार? एक, दो, चार, पांच, आठ? कहीं आप भी तो हर घंटे चाय-कॉफी नहीं पीते हैं, अगर हां तो सावधान हो जाएं। रोजाना अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन आपको अंधा बना सकता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इस गंभीर समस्या के बारे में लोगों को आगाह किया है।
सावधान: ज्यादा चाय-कॉफी पीते हैं तो हो सकता है अंधापन, अध्ययन में दावा
माउथ सिनाई स्थित आईकन स्कूल ऑफ मेडिसिन के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि जिन लोगों को आनुवंशिक रूप आंखों की बीमारियों की आशंका अधिक होती है, उनके लिए रोजाना अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन ग्लूकोमा का खतरा उत्पन्न कर सकता है। अमेरिका में ग्लूकोमा को अंधेपन का सबसे प्रमुख कारण माना जाता है। ग्लूकोमा एक ऐसी स्थिति है जो आंख की ऑप्टिक तंत्रिका को नुकसान पहुंचाती है। ग्लूकोमा आनुवांशिक भी हो सकती है, इसके कारण आंख के अंदर दबाव उत्पन्न होने लगता है। यह दवाब ऑप्टिक तंत्रिकाओं को क्षति पहुंचा सकती है, यह तंत्रिकाएं मस्तिष्क तक तस्वीरों को भेजती हैं।
कितनी मात्रा में कैफीन का सेवन है नुकसानदायक
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि जिन लोगों में ग्लूकोमा की आनुवांशिक आशंका ज्यादा होती है, उनमें कैफीन के कारण आंखों में दबाव का खतरा दूसरे लोगों से अधिक हो जाता है। चूंकि यहां ज्यादा कैफीन की बार-बार जिक्र हो रहा है, ऐसे में आपके लिए कैफीन की सही मात्रा जानना बेहद जरूरी है। अध्ययन के मुताबिक कैफीन की ज्यादा मात्रा का मतलब प्रतिदिन 480 मिलीग्राम से अधिक होता है।
क्यों बढ़ जाता है आंखों में दबाव?
आनुवांशिक रूप से ज्यादा खतरा वाले लोगों की तुलना में अन्य लोगों में प्रतिदिन 321 मिलीग्राम से अधिक कैफीन का सेवन 3.9 गुना तक ग्लूकोमा का खतरा बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक आंखों के अंदर एक प्रकार के द्रव (एक्वीस ह्यूमर) के निर्माण के कारण दवाब बढ़ जाता है। सामान्य तौर पर यह द्रव ट्रैब्युलर मेशवर्क नामक एक ऊतक के माध्यम से आंखों से बाहर निकलता है। द्रव का अधिक उत्पादन या इसके आंख से बाहर निकलने की प्रक्रिया में बाधा के कारण आंखों में दबाव अधिक हो जाता है।
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
अध्ययन के सह-लेखक एंथनी ख्वाजा कहते हैं- ग्लूकोमा के रोगी अक्सर पूछते हैं कि क्या वे जीवनशैली में बदलाव के माध्यम से अपनी दृष्टि को बचा सकते हैं? हालांकि इसका अब तक कोई सटीक जवाब नहीं मिल पाया है। इस अध्ययन के आधार पर हम यह जरूर कह सकते हैं कि जिन लोगों को ग्लूकोमा का अनुवांशिक जोखिम ज्यादा हो उन्हें कैफीन का सेवन कम करना चाहिए। हालांकि यहां ध्यान दिया जाना चाहिए कि कैफीन और ग्लूकोमा के जोखिम के बीच की कड़ी केवल ज्यादा मात्रा में कैफीन के सेवन और आनुवंशिक जोखिम वाले लोगों में देखी गई है।