कैंसर दुनियाभर में मौत के प्रमुख कारणों में से एक है, हर साल इससे लाखों लोगों की मौत हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल कैंसर के कारण 10 मिलियन (1 करोड़) लोगों की मौत हो जाती है। डॉक्टर कहते हैं, हर उम्र के लोगों को कैंसर के खतरे को लेकर सावधानी बरतते रहने की जरूरत है।
कैंसर का खतरा: ये पांच चीजें कैंसर कोशिकाओं को बढ़ाने में करती हैं फ्यूल का काम, डॉक्टर ने किया सावधान
Cancer Risk Factors: जीवनशैली और मेटाबॉलिज्म को ठीक रखना कैंसर से बचाव के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। डॉक्टर जयेश शर्मा ने पेट की अंदरूनी चर्बी, लंबे समय तक बैठे रहने के अलावा कुछ अन्य जोखिम कारकों के बारे में बताया है, जो न सिर्फ खतरा बढ़ाती हैं बल्कि रिकवरी प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकती हैं।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कैंसर के दौरान शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली लगातार असामान्य कोशिकाओं यानी कैंसर वाली कोशिकाओं को पहचानकर उनसे लड़ने की कोशिश करती रहती है। ऐसे में शरीर का अंदरूनी वातावरण भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
कुछ ऐसी आदतें, जिन्हें आम जिंदगी में हम छोटी या मामूली बात मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि ये शरीर में सूजन, हार्मोन और मेटाबॉलिज्म जैसे कई बदलावों का कारण बन सकती हैं। यही वजह है कि कैंसर के इलाज के दौरान सिर्फ दवा ही काफी नहीं है, इसमें दिनचर्या को लेकर भी काफी सावधानी बरतनी चाहिए।
रायपुर के वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. जयेश शर्मा ने कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए पांच चीजों को कैंसर कोशिकाओं के लिए ईंधन जैसा बताया है, जिसको लेकर सावधानी बहुत जरूरी है।
पेट के अंदर जमा चर्बी
डॉ. जयेश के मुताबिक, शरीर में कैंसर की कोशिकाओं के बढ़ने के लिए एक खास तरह के वातावरण की जरूरत होती है। इसमें विसरल फैट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विसरल फैट का मतलब है शरीर के अंदर, खासकर पेट के अंगों के आसपास जमा होने वाली चर्बी। यही चर्बी पेट को बाहर की तरफ निकला हुआ दिखाती है।
- विसरल फैट एक तरह के एंडोक्राइन अंग की तरह भी काम करता है। यानी यह ऐसे हार्मोन और दूसरे रसायन रिलीज करता है जो पूरे शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करत सकती हैं।
- इससे एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है, जिससे स्तन कैंसर का खतरा हो सकता है।
दिनभर बैठे रहने की आदत
अगर आप दिनभर कुर्सी या सोफे पर बैठे रहते हैं और शरीर बहुत कम सक्रिय रहता है, तो इसका संपूर्ण स्वास्थ्य पर असर हो सकता है।
- जब हमारी मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं, तो वे शरीर में सूजन यानी इंफ्लेमेशन को कम करने में मदद करती हैं। लेकिन शरीर की निष्क्रियता के कारण ये लाभ नहीं मिल पाता। हमारा शरीर लंबे समय तक बिल्कुल निष्क्रिय रहने के लिए बना ही नहीं है।
- इसलिए लगातार बैठे रहना शरीर में ऐसी स्थिति पैदा कर सकता है, जो कैंसर के मामले में पहले से मौजूद समस्या को और बढ़ाने वाली हो सकती है।
अस्वास्थ्यकर चीजें खाना
दिनभर सोफे या कुर्सी पर बैठे रहने के साथ अक्सर एक और आदत जुड़ जाती है, बिना सोचे-समझे बार-बार कुछ खाते रहना। अक्सर लोग चिप्स और दूसरे नमकीन स्नैक्स, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक का सेवन करते रहते हैं। इस तरह का खान-पान भी कैंसर कोशिकाओं के लिए ऐसा वातावरण बनाता है, जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
तनाव लेने से बढ़ सकती है दिक्कत
कैंसर से जूझ रहे लोगों पर मानसिक दबाव होना स्वाभाविक है। बीमारी की चिंता, इलाज की परेशानी और भविष्य को लेकर डर की वजह से तनाव काफी बढ़ सकता है।
- तनाव खुद भी एक छोटा कारक हो सकता है, जो शरीर में कैंसर के लिए अनुकूल स्थिति बनाने में मदद कर सकता है। तनाव के कारण आपकी शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, अस्वास्थ्यकर खान-पान भी बढ़ जाता है और नींद खराब हो सकती है। ये सभी चीजें कैंसर का कारण बन सकती हैं।
पर्याप्त नींद न लेना
रोज पर्याप्त नींद न लेना भी कैंसर के जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है।
कैंसर से जूझ रहे लोगों को तनाव की वजह से नींद आने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा रात में लगातार स्क्रॉल करने की आदत भी नींद का समय कम कर सकती है। डॉ. जयेश कहते हैं, लगातार नींद की कमी भी शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है और कैंसर से रिकवरी की प्रक्रिया में बाधा बन सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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