फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Encephalitis: अस्पतालों में फिर बढ़े चमकी बुखार के मामले, बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित; जानिए कैसे रहें सुरक्षित

Mon, 15 Apr 2024 12:08 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 15 Apr 2024 12:08 PM IST
विज्ञापन
Encephalitis cases in up and bihar causes and prevention of ensephalitis in hindi
बच्चों में चमकी बुखार के मामले - फोटो : istock

चमकी बुखार (इंसेफेलाइटिस) के कारण हर साल बड़ी संख्या में बच्चे अस्पतालों में भर्ती होते हैं, इसके कारण मौत का खतरा भी अधिक देखा जाता रहा है। सरकार लगातार इस खतरनाक रोग से बचाव लेकर अभियान चला रही है, हालांकि अब भी ये बड़ा खतरा बना हुआ है। हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार के कुछ जिलों में एक बार फिर से चमकी बुखार के मामले बढ़ रहे हैं। मुजफ्फरपुर में करीब 14 लोगों में चमकी बुखार के लक्षण दिखने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, हालांकि रोगियों के जांच की रिपोर्ट की अभी प्रतीक्षा है। 



रिपोर्टस के मुताबिक  मुजफ्फरपुर के पीआईसीयू में शनिवार-रविवार दोनों दिन 7-7 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार बच्चों की निगरानी कर रही है। खून के सैंपल को जांच के लिए भेजा गया है, रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को बुखार से बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दी है। आइए जानते हैं कि चमकी बुखार के क्या कारण हैं और बच्चों को इससे किस प्रकार से सुरक्षित रखा जा सकता है?

Encephalitis cases in up and bihar causes and prevention of ensephalitis in hindi
चमकी बुखार के कारण और बचाव - फोटो : istock

उत्तर प्रदेश- बिहार में देखे जाते रहे है मामले

बिहार के कई राज्य इस गंभीर रोग के शिकार रहे हैं- मुजफ्फरपुर उनमें से एक है। पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश-बिहार सहित कई राज्यों में इंसेफेलाइटिस के मामले स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए बड़ी चिंता का कारण रहे हैं। इंसेफेलाइटिस के मामले बैक्टीरियल या वायरल दोनों प्रकार के संक्रमण के कारण हो सकते हैं। इसके कारण ब्रेन इंफ्लामेशन का खतरा बढ़ जाता है जिसके गंभीर दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। ये बीमारी वैसे तो किसी भी उम्र में हो सकती है हालांकि बच्चों को इसका सबसे ज्यादा शिकार देखा जाता रहा है।

Encephalitis cases in up and bihar causes and prevention of ensephalitis in hindi
ब्रेन इंफ्लामेशन की समस्या - फोटो : istock

इंसेफेलाइटिस के क्या कारण हैं?

वायरल-बैक्टीरियल संक्रमण, ऑटोइम्यून इंफ्लामेशन, कीड़ों के काटने या कुछ प्रकार की बीमारियों के कारण इंसेफेलाइटिस की समस्या हो सकती है इसमें ब्रेन में सूजन हो जाता है। इंसेफेलाइटिस के लगभग 70% मामले वायरस के संक्रमण के कारण होते हैं, जिनमें छोटे बच्चे (एक वर्ष और उससे कम उम्र) और बुजुर्गों (65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के) के लोगों में खतरा सबसे ज्यादा देखा जाता रहा है। 

वायरस से मुकाबले की स्थिति में मस्तिष्क में सूजन की समस्या हो सकती है। समय के साथ इस रोग के लक्षण बिगड़ते जाते हैं और कुछ स्थितियों में ये जानलेवा भी हो सकती है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Encephalitis cases in up and bihar causes and prevention of ensephalitis in hindi
सिर में दर्द होने की समस्या - फोटो : istock

कैसे होते हैं इसके लक्षण?

इंसेफेलाइटिस आमतौर पर बुखार-सिरदर्द जैसे लक्षणों के साथ शुरू होता है। समय पर अगर इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए या इलाज न किया जाए तो इसके कारण दौरे पड़ने, भ्रम, चेतना की हानि और यहां तक कि कोमा भी हो सकता है। इसके लक्षण समय के साथ गंभीर होते जाते हैं। इन स्थितियों में भयंकर सरदर्द, उल्टी-भ्रम होने, याददाश्त की समस्या, बोलने-सुनने की दिक्कत होने, बेहोशी की समस्या हो सकती है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इंसेफेलाइटिस से बचाव को लेकर सभी लोगों को सतर्कता बरतते रहने की आश्यकता होती है। विशेषतौर पर जिन शहरों में पहले से इसके मामले रिपोर्ट किए जाते रहे हैं वहां बच्चों की सेहत को लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।

विज्ञापन
Encephalitis cases in up and bihar causes and prevention of ensephalitis in hindi
इंसेफेलाइटिस के जोखिम कारक - फोटो : istock

इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वायरल इंसेफेलाइटिस को रोकने का सबसे अच्छा तरीका उन वायरस के संपर्क से बचना है जो इस बीमारी का कारण बन सकते हैं। 

इसके लिए स्वच्छता का ध्यान रखना सबसे आवश्यक है। हाथों को साबुन और पानी से बार-बार और अच्छी तरह धोएं। कपड़े-बिस्तर को एक दूसरे से शेयर न करें। कुछ संक्रमित मच्छरों के काटने से भी इस रोग के होने का खतरा रहता है इसलिए आसपास की साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखा जाना जरूरी है। अगर आपमें या बच्चे में इस रोग के लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत अस्पताल जाएं।



--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed