बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व दशहरा पूरे देश में उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। नवरात्रि के समापन के इस पर्व में बुराई के प्रतीक रावण के पुतले का दहन भी किया जाता है। दशहरे के दौरान आतिशबाजी का प्रदर्शन और रावण दहन के दौरान होने वाले वायु प्रदूषण के कारण कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ने का जोखिम हो सकता है। इसके सबसे ज्यादा नकारात्मक असर होता है- श्वसन रोगियों पर। प्रदूषित हवा में सांस लेने से अस्थमा और क्रोनिक ऑबस्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) रोगियों की जटिलताओं के बढ़ने का खतरा रहता है।
Dussehra 2023: सांस के रोगी ध्यान दें, दशहरा उत्सव के दौरान इन बातों का रखें ध्यान वरना बिगड़ सकती है तबीयत
आउटडोर-इनडोर दोनों प्रदूषण नुकसानदायक
डॉक्टर बताते हैं, वायु प्रदूषण आउटडोर हो या इनडोर, दोनों ही सेहत पर नकारात्मक असर डालती है। विशेषतौर पर फेफड़ों और श्वसन विकारों के शिकार लोगों के लिए ये और भी समस्याकारक स्थिति हो सकती है। किसी प्रकार के जोखिम से बचे रहने के लिए सुनिश्चित करें कि आपके रहने और काम करने के स्थान अच्छी तरह हवादार और प्रदूषकों से मुक्त हो।
धूल-धुएं के सीधे संपर्क के कारण सांस की समस्याओं के बढ़ने का खतरा हो सकता है। आइए जानते हैं कि ऐसे लोगों को किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?
गहरी सांस लेने वाले अभ्यास
फेफड़ों को स्वस्थ रखने और श्वसन समस्याओं को ट्रिगर होने से बचाने के लिए जरूरी है कि आप नियमित रूप से श्वसन और गहरी सांस लेने वाले अभ्यास करें। इस तरह के अभ्यास से फेफड़ों के विस्तार में मदद मिलती है और डायफ्राम मजबूत होती है। गहरी सांस वाले अभ्यास करने से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा भी बढ़ती है, जिससे श्वसन समस्याओं को ट्रिगर होने से बचाने में भी मदद मिल सकती है।
शरीर को रखें हाइड्रेटेड
श्वसन समस्याओं के शिकार लोगों के लिए जरूरी है कि आप शरीर को हाइड्रेटेड रखें, ऐसा करके श्वसन मार्ग में होने वाली जलन और असहजता को कम करने में मदद मिल सकती है। श्वसन पथ पर मौजूद बलगम की पतली परत को बनाए रखने के लिए हाइड्रेशन का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। यह परत हवा में मौजूद कणों को फेफड़ों में प्रवेश करने से रोकने में मदद करती है और संक्रमण से बचाती है। दिन में कम से कम 3-4 लीटर पानी पीते रहना आपके लिए फायदेमंद है।
श्वसन समस्याओं को ट्रिग करने वाले पदार्थों से बचें
अगर आप श्वसन समस्याओं के शिकार हैं तो उन पर्यावरणीय कारकों से दूरी बनाकर रहने की सलाह दी जाती है जो श्वसन प्रणाली के लिए समस्याएं पैदा कर सकते हैं। सिगरेट का धुआं हो या फिर पटाखों से निकलने वाला धुंआ, ये फेफड़ों में जलन पैदा कर सकता हैं और इसके कारण सीओपीडी और फेफड़ों से संबंधित समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। सभी लोगों के लिए जरूरी है कि आप इस तरह के श्वसन ट्रिगर्स से बचाव करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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