Weight Loss Tips for Women: हमारे देश में बहुत से लोग मोटापे की समस्या से परेशान हैं, उनमें से बहुत से लोग वेट लॉस करने की कोशिश भी करते हैं। आंकड़ों की मानें तो हमारे देश में पुरुषों से ज्यादा महिलाएं मोटापे से प्रभावित हैं। इसलिए आइए इस लेख में महिलाओं के वेट लॉस के बारे में कुछ जरूरी बातें जाते हैं। अक्सर कुछ महिलाएं वेट लॉस के लिए जिम में घंटों बिताती हैं, और उसके बावजूद भी उन्हें निराशा हाथ लगती है। हम सभी यह मानते हैं कि जितना ज्यादा वर्कआउट करेंगे, उतनी ही तेजी से वजन कम होगा, लेकिन क्या यह पूरा सच है?
Health Tips: महिलाओं को मोटापा कम करने के लिए डॉक्टर ने वर्कआउट कम करने का दिया सुझाव, जरूर जानें
हमारे समाज में बहुत सी ऐसी महिलाएं हैं जो वेट लॉस करने की कोशिश कर रही हैं। जब वेट लॉस की बात आती है तो इसे सीधे तौर पर वर्कआउट से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन एक डॉक्टर इस मिथक को तोड़ते हुए वैज्ञानिक कारण के साथ वर्कआउट कम करने का सुझाव दिया है, जिसके बारे में आपको जानना चाहिए।
वर्कआउट से क्यों नहीं घटता महिलाओं का वजन?
डॉ. गणला के अनुसार एक 80 किलोग्राम की महिला के शरीर में लगभग 40 प्रतिशत चर्बी होती है। इसमें से 25 प्रतिशत चर्बी शरीर के लिए जरूरी होती है, जिसे एसेंशियल फैट कहते हैं। हमें केवल बाकी के 15 प्रतिशत फैट को कम करना होता है। डॉक्टर का कहना है कि इस 15 प्रतिशत फैट को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका शरीर को 'भूखा' रखना है, जिसे मेडिकल भाषा में 'स्टार्वेशन' कहा जाता है।
हम वर्कआउट करके शरीर के 60 प्रतिशत मसल्स और टिश्यूज को ट्रेनिंग देते हैं, जिससे मेटाबॉलिक रेट बढ़ता है और शरीर ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है। लेकिन, इसका एक बड़ा नुकसान यह है कि वर्कआउट से बहुत ज्यादा भूख लगती है, और इसी भूख के कारण शाम को लोग अनहेल्दी स्नैक्स या पैकेट्स का सेवन कर लेते हैं, जिससे उनकी सारी मेहनत बेकार चली जाती है।
इंसुलिन लेवल कम करना है जरूरी
डॉ. गणला का मानना है कि वजन घटाने के लिए एक्सरसाइज कम करना चाहिए, खासकर शुरुआती दो से तीन महीनों के लिए। उनका सुझाव है कि इस समय का उपयोग शरीर के इंसुलिन लेवल को कम करने में करना चाहिए। जब हम कार्बोहाइड्रेट्स, जैसे कि रोटी, चावल और चीनी का सेवन कम करते हैं, तो इंसुलिन का स्तर अपने आप आधा हो जाता है।
इंसुलिन लेवल कम होने से भूख भी कम लगती है। जब भूख कम लगेगी और साथ में वर्कआउट भी कम किया जाएगा, तो शरीर शांत हो जाएगा।
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डॉ. गणला बताते हैं कि जब शरीर शांत होता है और उसे बाहर से कम कैलोरी मिलती है, तो यह अपने अंदर जमा फैट से ऊर्जा खींचना शुरू कर देता है। यही वह समय है जब आप इंटरमिटेंट फास्टिंग जैसी चीजें करके एक या दो मील को स्किप कर सकते हैं।
इस तरीके से, तीन-चार महीनों में 7-8 किलो फैट कम करना संभव हो जाता है। इसका वैज्ञानिक कारण यह है कि शरीर के 60 प्रतिशत मसल्स 40 प्रतिशत फैट से एनर्जी खींचते हैं। लेकिन अगर हम लगातार खाते रहेंगे, तो यह एनर्जी कहीं नहीं जाएगी और फैट जमा होता रहेगा।
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डॉ. गणला के हिसाब से यह है कि अगर आप वाकई वजन कम करना चाहते हैं तो कुछ महीनों के लिए एक्सरसाइज कम करें और जादू देखें। उनके मुताबिक, इस दौरान धैर्य और अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण हैं। यह सलाह उन लोगों के लिए खास तौर पर है जो बार-बार वजन कम करने की कोशिश करके थक चुके हैं। इस विधि से न केवल वजन कम होता है, बल्कि शरीर का मेटाबॉलिज्म भी संतुलित होता है, जिससे भविष्य में वजन बढ़ने की संभावना कम हो जाती है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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