Health Alarm: भारत में हृदय रोग और डायबिटीज बनी महिलाओं की जान का दुश्मन, अध्ययन सामने आई डराने वाली बातें
- द लैंसेंट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में अब वैज्ञानिकों ने कहा है कि भारत में क्रॉनिक बीमारियों से मौत का खतरा अब और भी बढ़ गया है, महिलाएं इससे सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं।
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मौजूदा समय में जिस तरह से हमारी जीवनशैली काफी दौड़-भाग और व्यस्तता वाली हो गई है, इसने कई प्रकार की बीमारियों के खतरे को भी काफी बढ़ा दिया है। कई रिपोर्ट्स बताते हैं कि दुनियाभर में क्रॉनिक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है, सभी उम्र के लोग इसका शिकार हो रहे हैं। बीमारियों के साथ इसके कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों और इससे मौत के मामलों में भी वृद्धि रिपोर्ट की जा रही है।
साल 2023 में नेचर जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में लगभग 41.73% वयस्कों और बुजुर्गों में कम से कम एक क्रॉनिक बीमारी देखी गई। वहीं भारत में हुई कुल मौतों में 63% मौतों के लिए भी इसे एक प्रमुख कारण माना गया, जिनमें हृदय रोग (सीवीडी) का आंकड़ा (27%) सबसे ज्यादा था।
ये आंकड़े हमें सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या हम सच में अपनी सेहत का ख्याल रख रहे हैं? स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, साल-दर-साल जोखिम बढ़ते ही जा रहे हैं जिसको लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
देश में बढ़ती क्रॉनिक बीमारियों को लेकर हाल ही में द लैंसेंट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में अब वैज्ञानिकों ने कहा है कि भारत में क्रॉनिक बीमारियों से मौत का खतरा अब और भी बढ़ गया है, महिलाएं इससे सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं।
क्रॉनिक बीमारियां और इसका खतरा
क्रॉनिक बीमारियां और इससे होने वाली मौत के खतरे को लेकर इस रिपोर्ट को समझने से पहले आइए ये जान लेते हैं कि आखिर क्रॉनिक बीमारियां होती क्या हैं?
क्रॉनिक बीमारियां, उन बीमारियों का कहा जाता है जो धीरे-धीरे बढ़ती हैं और लंबे समय तक शरीर को प्रभावित करती रहती हैं। ये बीमारी कुछ दिनों या हफ्तों में नहीं होती, बल्कि महीनों या वर्षों तक चलती रहती हैं। भारत में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली क्रॉनिक बीमारियों में हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन), डायबिटीज, दिल की बीमारी, कैंसर और अस्थमा शामिल हैं। ये हमारी रोजमर्रा की गलत आदतों जैसे जंक फूड, ज्यादा नमक और तेल वाला भोजन, व्यायाम न करने, तनाव में रहने, तंबाकू-शराब के सेवन के कारण बढ़ती हैं। अगर समय पर इलाज न कराया जाए तो ये जानलेवा भी हो सकती हैं।
हालिया रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि इन बीमारियों के कारण देश में मौत का खतरा अब पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है।
कैंसर और हृदय रोगों के कारण मौत का जोखिम
द लैंसेट की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत उन देशों में शामिल है जहां कैंसर और हृदय रोग जैसी दीर्घकालिक बीमारियों से मरने की आशंका पुरुषों और महिलाओं दोनों में बढ़ गई है, ऐसा उस समय देखा जा रहा है जब पिछले एक दशक में हर पांच में से चार देशों में इन दरों में गिरावट आई है।
भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाओं में जोखिमों में अधिक वृद्धि देखी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक हृदय रोग और मधुमेह का क्रॉनिक बीमारी और इससे बढ़ती मौत के मामलों में योगदान सबसे अधिक है।
अध्ययन में क्या पता चला?
टीम ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर 185 देशों में दीर्घकालिक बीमारियों और इससे मरने के जोखिमों का अनुमान लगाया। लेखकों ने कहा, साल 2010 से 2019 तक 80 वर्ष तक की आयु के बीच एनसीडी (गैर-संचारी रोग) से मरने की आशंका 185 देशों में से 152 (82 प्रतिशत) में कम हुई। शेष 33 देशों में महिलाओं में और 38 देशों में पुरुषों में इसका खतरा बढ़ता हुआ देखा गया है।
चीन, मिस्र, नाइजीरिया, रूस और ब्राजील में गैर-संचारी रोगों से होने वाली मृत्यु दर में पुरुषों-महिलाओं दोनों में कमी आई है, जबकि भारत और पापुआ न्यू गिनी में दोनों लिंगों में इसकी वृद्धि हुई है।
अधिकांश देशों में, कैंसर, हृदय रोग (दिल का दौरा) और स्ट्रोक से होने वाली मौतों में कमी आई है, जो क्रॉनिक बीमारियों से होने वाली मृत्यु दर में गिरावट का सबसे बड़ा कारण है। हालांकि डिमेंशिया, शराब के कारण होने वाली बीमारियोंऔर अग्न्याशय-लिवर कैंसर से होने वाली मौतों में वृद्धि देखी गई है।
2030 तक असमय मृत्यु दर को एक तिहाई कम करने का लक्ष्य
विशेषज्ञों की टीम ने कहा कि सभी देशों ने दीर्घकालिक रोगों के उपचार में सुधार के लिए प्रतिबद्धता और योजनाएं बनाई हैं, जिसमें संयुक्त राष्ट्र का सतत विकास लक्ष्य भी शामिल है। इसके तहत साल 2030 तक इन रोगों से होने वाली असमय मृत्यु दर को एक तिहाई तक कम करना है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि यह अध्ययन राष्ट्रीय स्तर पर दीर्घकालिक रोगों से जुड़ी मृत्यु दर में बदलाव को ट्रैक करने और ऐतिहासिक प्रदर्शन के आधार पर प्रगति का आकलन करने वाला पहला वैश्विक विश्लेषण है।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा की आगामी चौथी उच्च-स्तरीय बैठक से पहले, अध्ययन के निष्कर्ष दीर्घकालिक रोगों से निपटने और जरूरतमंद लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के उपायों को सुनिश्चित करने के लिए अधिक निवेश की तत्काल आवश्यकता दर्शाते हैं।
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स्रोत
Your risk of dying from chronic disease has dropped — if you live in these countries
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