डायबिटीज सिर से पैर तक हमारे शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। खून में शर्करा की मात्रा बढ़ जाने पर उसे फिल्टर करने में किडनी को ज्यादा मेहनत करना पड़ती है। धीरे- धीरे इस अधिक दबाव के कारण किडनी को नुकसान पहुंचने लगता है। जब मूत्र में प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है तो हालात गंभीर होने लगते हैं, ऐसी स्थिति में किडनी काम करना बंद कर देती है इसलिए बहुत जरूरी है कि कुछ बातों का ख्याल रखकर डायबिटीज के मरीज किडनी को खराब होने से बचा सकते हैं। अगली स्लाइड्स में डॉ. आशीष कुमार जांगिड़, डीएनबी एंडो, शाल्बी हॉस्पिटल, जयपुर द्वारा बताए गई बातों का ध्यान रखकर किडनी की सुरक्षा की जा सकती है।
डायबिटीज के मरीज इन बातों का रखें ख्याल, नहीं तो किडनी हो सकती है खराब
निर्धारित डाइट-प्लान का पालन करें
"हाई ब्लड शुगर" की वजह से किडनी को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए खान-पान में परहेज करना बेहद महत्वपूर्ण है। निश्चित तौर पर इस समस्या से पीड़ित लोगों को भोजन में अधिक चीनी एवं अधिक नमक के साथ-साथ ज्यादा कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों से दूर रहना चाहिए। अपने आहार में ताजा फलों, साबुत अनाज, सब्जियों को शामिल करने से शरीर को जरूरी पोषक-तत्व प्राप्त होते हैं, और इस तरह ज्यादा कैलोरी के सेवन से भी बचा जा सकता है।
धूम्रपान छोड़ें
सामान्य व्यक्ति भी यदि धूम्रपान करता है तो उसके फेफड़ों. किडनी आदि अंगों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में धूम्रपान करने से डायबिटीज के मरीजों की सेहत पर अधिक बुरा असर होता है और यह असर बहुत तेज रफ्तार से होने लगता है जिससे किडनी के खराब होने की संभावना बढ़ जाती है इसलिए धूम्रपान को छोड़ना बहुत आवश्यक है।
शुगर और ब्लड प्रेशर को रखें नियंत्रित
नियमित तौर पर ब्लड शुगर लेवल की जाँच करके तथा डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयों के सेवन, सही खान-पान और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर ऐसा किया जा सकता है। इसी तरह डायबिटीज के मरीज ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित रख सकते हैं।
नियमित तौर पर व्यायाम करें
डायबिटीज के मरीज चाहते हैं कि उनकी किडनी स्वस्थ रहे तो उसके लिए उन्हें व्यायाम के रूप में थोड़ी मेहनत तो करना ही होगी। दौड़ना, तेज चलना, साइकिल चलाना, तैराकी, टहलना जैसे सरल व्यायाम डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। हर दिन कम से कम 30 मिनट के व्यायाम से शुगर लेवल तो नियंत्रित रहता ही है, साथ ही किडनी के खराब होने की संभावना भी कम हो जाती है।