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गर्भावस्था के दौरान मधुमेह की जांच जरूरी, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

Wed, 04 Sep 2019 04:38 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 04 Sep 2019 04:38 PM IST
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diabetes test is essential for pregnant lady
प्रतीकात्मक तस्वीर

जैस्टेशनल डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भावस्था के दौरान महिला में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। दरअसल यह समस्या गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल असंतुलन के कारण होती है। हमारा शरीर इंसुलिन की मदद से भोजन को ऊर्जा में बदलता है, लेकिन जब इंसुलिन का स्तर कम होता है या शरीर प्रभावी ढंग से उसका उपयोग नहीं कर पाता तो खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है। शुरुआत में इसके कोई खास लक्षण नजर नहीं आते, जिसकी वजह से बाद में गर्भवती महिलाओं को कई समस्याओं से जूझना पड़ता है।

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डॉ कंचन मिश्रा - फोटो : अमर उजाला

महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान मधुमेह की जांच अवश्य करानी चाहिए और इसका जल्द से जल्द इलाज कराना चाहिए। क्योंकि इसमें मां और बच्चे दोनों के लिए जटिलताएं बढ़ जाती हैं। लोकबंधु अस्पताल की डॉ. कंचन मिश्रा बता रही हैं जैस्टेशनल डायबिटीज के जोखिम, उपचार और सावधानियों के बारे में...।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
हालांकि इसका कोई लक्षण शुरू में पता नहीं चलता, इसलिए स्क्रीनिंग बेहतर है। बाद में पता चलने पर इलाज मुश्किल होता है। गर्भावस्था के दौरान आप बहुत जल्दी थक जाएं, बार-बार प्यास लगे, जल्दी-जल्दी पेशाब जाना पड़े, जी मिचलाए, धुंधला दिखाई दे और किसी तरह का कोई स्किन इंफेक्शन हो तो सतर्क हो जाएं और डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। हालांकि ये सामान्य लक्षण हैं, लेकिन कभी-कभी शुगर के कारण भी होता है। यदि शुगर की फैमिली हिस्ट्री हो तो जरूर जांच कराएं। आमतौर पर डॉक्टर गर्भावस्था के 24वें सप्ताह मधुमेह जांच के लिए कहते हैं। हाई रिस्क पेशेंट है तो बीसवें सप्ताह पर भी करा लेेते हैं।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर

डायबिटीज के खतरे
जैस्टेशनल डायबिटीज में सिजेरियन डिलीवरी की आशंका बढ़ जाती है। हाई ब्लडप्रेशर और पेशाब में प्रोटीन बढ़ जाता है। प्रेगनेंसी में शुगर से ग्रस्त महिलाओं में गर्भावस्था के बाद टाइप-2 डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा गर्भापात की आशंका रहती है। सबसे बड़ी बात बच्चे में भी शुगर की आशंका बढ़ जाती है।

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पैकेज्ड खाद्य पदार्थों से करें परहेज
सबसे पहले तो किसी डायटीशियन से बात करके एक डाइट प्लान बनवा लें और उसे नियम से पालन करें। पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का सेवन बंद कर दें। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन करें। कम कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन करें और मीठे पदार्थों से परहेज करें। भोजन छोड़ने या न करने की आदत नुकसानदेह हो सकती है, ऐसा करने से शुगर का स्तर घट या बढ़ सकता है। इसके अलावा नियमित व्यायाम से भी ग्लूकोज नियंत्रण किया जा सकता है, लेकिन गर्भवती बिना डॉक्टर और योग प्रशिक्षक की सलाह के न करें।
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