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सावधान: डायबिटीज से जुड़ी इन अफवाहों को कहीं आप भी तो नहीं मानते हैं सच? बिगड़ सकती है स्थिति

Thu, 12 Aug 2021 05:41 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Thu, 12 Aug 2021 05:41 PM IST
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डायबिटीज के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay

डायबिटीज दुनियाभर में पिछले कुछ दशकों में काफी तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में से एक है। स्वास्थ्य संगठनों के आंकड़ों के अनुसार विशेषकर भारत में डायबिटीज के रोगियों की संख्या हाल के दशकों में काफी तेजी से बढ़ती हुई देखी गई है। खराब जीवनशैली और पौष्टिक आहार के सेवन में कमी को विशेषज्ञ इसके मुख्य कारण के रूप में देख रहे हैं। डायबिटीज के कारण शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बिगड़ जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुमान के मुताबिक वैश्विक स्तर पर 422 मिलियन ( करीब 42.2 करोड़) से अधिक लोग इस गंभीर बीमारी के शिकार हैं। 


डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मधुमेह यानी डायबिटीज को दुनियाभर में होने वाली मौतों के प्रमुख कारण के रूप में देखा जा सकता है। डायबिटीज, सिर्फ एक रोग नहीं, बल्कि कई अन्य गंभीर बीमारियों का भी कारण बन सकती है। लोगों को इस गंभीर रोग से बचाने के लिए इसके बारे में जागरूकता फैलाना महत्वपूर्ण है। हालांकि समाज में डायबिटीज को लेकर फैली कई मिथ लोगों को भ्रमित कर रही है, ऐसे मिथ को लोग सच मान रहे हैं। आइए ऐसे ही कुछ अफवाहों के बारे में जानते हैं।

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क्यों बढ़ जाता है डायबिटीज का खतरा? - फोटो : iStock
मिथ: केवल अधिक फैट और चीनी का सेवन करने वालों को ही मधुमेह हो सकता है
फैक्ट: स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मधुमेह के कई कारक हो सकते हैं, सिर्फ अधिक फैट और चीनी का सेवन ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। मोटापा और अधिक वजन वाले, अधिक तनाव लेने वाले लोगों में भी डायबिटीज होने का खतरा अधिक हो सकता है। डायबिटीज, आनुवांशिक बीमारी भी है, यानी कि अगर आपके परिवार में किसी भी डायबिटीज की शिकायत है तो इसका खतरा अन्य लोगों में भी बढ़ जाता है। इसके अलावा धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता, उम्र और गर्भावस्था में भी लोगों को डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।
 
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डायबिटीज का कौन सा प्रकार है ज्यादा खतरनाक? - फोटो : iStock

मिथ: टाइप-1 डायबिटीज अधिक खतरनाक होता है, जबकि टाइप-2 कम
फैक्ट: स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मधुमेह का कोई भी रूप 'कम' खतरनाक नहीं है। टाइप-1 टाइप-2, दोनों ही स्थितियों में विशेष सावधानी और इसे प्रबंधित करने के प्रयास करते रहने चाहिए। स्वास्थ्य के लिए यह दोनों ही स्थितियां खतरनाक हो सकती हैं। इस खतरनाक बीमारी से बचाव के लिए रोग को नियंत्रित करने के प्रयास करना बहुत आवश्यक होता है। इस बीमारी में की गई लापरवाही लक्षणों को बढ़ा सकती है, कई मामलों में यह जानलेवा भी हो सकती है।

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क्या इंसुलिन से ही कम हो सकता है डायबिटीज का खतरा? - फोटो : Social media

मिथ: इंसुलिन और दवा से ही डायबिटीज ठीक हो जाता है
फैक्ट: स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर लोग मान लेते हैं कि इंसुलिन और दवा, डायबिटीज को खत्म कर देगी, पर पूरी तरह से यह सही नहीं है। ऐसे उपाय लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं, रोग को ठीक नहीं करते। अकेले दवा और इंसुलिन से ही बीमारी को नियंत्रित करने में मदद नहीं मिल सकती है। इसके लिए रोगी को जीवनशैली में बदलाव और आहार को पौष्टिक रखने के साथ मधुमेह को नियंत्रित करने वाले अन्य उपायों को प्रयोग में लाते रहना चाहिए। 

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गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है डायबिटीज - फोटो : Pixabay

मिथ: मिठाई और कार्बोहाइड्रेट का सेवन बिल्कुल बंद कर देना चाहिए
फैक्ट: स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह सच है कि मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए आहार प्रतिबंध का पालन किया जाना चाहिए, हालांकि मिठाई, चीनी और  कार्बोहाइड्रेट का सेवन बिल्कुल बंद कर देना भी सही नहीं है।  मधुमेह रोगियों को हमेशा संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए, जिसमें शरीर के लिए आवश्यक सभी तरह के पोषक तत्व समाहित हों। मिठाई और कार्बोहाइड्रेट का सेवन बिल्कुल बंद कर देने से लो-शुगर की समस्या हो सकती है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के आधार पर कभी-कभी हल्की मीठी चीजें खाई जा सकती हैं। 


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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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