Medically Reviewed by Dr. Vinoda kumari
डॉ विनोदा कुमारी, डिप्टी सीएमओ,
जिंदल नेचरक्योर इंस्टीट्यूट,
डिग्री- बीएनवायएस, डिप्लोमा-एक्यूपंक्चर
अनुभव- 26 वर्ष
हमारे शरीर में लीवर सबसे लम्बा आंतरिक अंग होता है और यह शरीर में कई तरह के काम करता है। जिसमें शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना भी शामिल होता है। सामान्यतौर पर लीवर खुद को साफ करता रहता है। हालांकि ज्यादातर लोगों में लीवर बेहतर तरीके से काम नहीं करता है क्योंकि इस पर वातावरण और डाइट से बहुत ज्यादा बोझ पड़ता है। खराब लाइफस्टाइल, अस्वस्थ भोजन की आदतें और भोजन में खतरनाक कीटनाशकों और भारी धातुओं की उपस्थिति होने से हमारे लीवर को ज्यादा नुकसान होता है। इसलिए प्राकृतिक तरीके से अपने लीवर के डिटॉक्सिफिकेशन से केमिकल और प्रदूषकों के हानिकारक प्रभावों का मुकाबला करने में मदद मिल सकती है। अगली स्लाइड्स में कुछ सुरक्षित और प्रभावी तरीकों के बारे में बताया गया है इससे आप अपने लीवर को स्वस्थ रख पायेंगे और इसका काम बेहतर तरीके से कर पाने में मदद कर पायेंगे।
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इससे पाचन तंत्र अच्छा बना रहता है
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आपकी डाइट लीवर और आंत के अनुकूल हो
आपकी डाइट संतुलित और स्वस्थ होनी चाहिए, और इस डाइट में पोषक तत्व जरूर होने चाहिए क्योंकि ये आंत और लीवर के स्वास्थ्य को अच्छा बनाये रखते हैं। शरीर के वजन में 6% की कमी आपके लीवर में फैट के स्तर को 40% तक कम कर सकती है, फैट के ज्यादा होने पर शरीर के डिटॉक्सिफाइंग अंग पर भारी बोझ पड़ता है। वजन अच्छा बनाए रखें, प्रोसेस्स्ड फूड न खाएं, शराब और कैफीन जैसे नशे की लत वाले ड्रिंक से दूर रहें, फल, सब्जियां, साबुत अनाज, अंकुरित अनाज, बीज, नट्स और बीन्स जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन करें। 3 से 4 लीटर पानी पिएं, क्योंकि इससे पाचन तंत्र अच्छा बना रहता है और लसीका प्रणाली को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करती है।
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जो भी खाना हो उसे बचे 6 घंटे के दौरान खा सकते हैं
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रुक-रुककर उपवास रखने की कोशिश करें
जब आप अपनी डाइट में पूरी तरह से रम जाते हैं तो आपको हफ्ते में एक बार रुक-रुक कर उपवास करने की कोशिश करनी चाहिए। रिसर्च से पता चला है कि उपवास के दौरान लीवर की कोशिकाएं एक प्रोटीन का उत्पादन करती हैं जो शुगर के मेटाबोलिज्म में सुधार करने में मदद करता है और फैट के लेवल को कम करता है। उपवास से ऑटोफैगी अच्छा होता है यह तब होता है जब शरीर में स्वस्थ कोशिकाएं अस्वस्थ कोशिकाओं को खत्म करती हैं, सेलुलर डेटॉक्स को बढ़ावा मिलता हैं। आप 18 घंटे के उपवास से उपवास रखना शुरू कर सकते हैं, और इसके बाद आपको जो भी खाना हो उसे बचे 6 घंटे के दौरान खा सकते हैं। जब आप हफ्ते में एक बार उपवास रखने का प्रयास करते हैं, तो आपको अपनी मनोदशा और ऊर्जा में साफ तौर पर बदलाव दिखाई देने लगेगा।
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हल्दी लीवर को चोट से बचाती है
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सप्लीमेंट का इस्तेमाल रणनीति के मुताबिक करें
कुछ सप्लीमेंट्स सूजन को कम करके, विषाक्त पदार्थों या केमिकल से चोटों के खिलाफ शरीर की रक्षा करके, पित्त के उत्पादन को उत्तेजित करके, लीवर के स्वास्थ्य को अच्छा करने में मदद करते है। छाछ वाले भटकैया में एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सिडेंट गुण पाये जाते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि यह लीवर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करने में मदद करता है और एसिटामिनोफेन और शराब जैसे हानिकारक पदार्थ से होने वाले नुकसान से बचाता है। यह ग्लूटाथियोन के लेवल को भी बढ़ाता है, ग्लूटाथियोन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट है जो फ्री रेडिकल डैमेज से लड़ता है। इसी तरह, हल्दी लीवर को चोट से बचाती है। हल्दी ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस में कमी और ग्लूटाथियोन के उत्पादन में वृद्धि करके लीवर को स्वस्थ रखती है। यह पित्त के उत्पादन को भी बढ़ाती है, पित्त हमारी छोटी आंत में फैट को पचाने के लिए जिम्मेदार होता है।
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दूसरा तरीका है कि खूब पसीना बहायें
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पसीना बहायें
डिटॉक्सिफिकेशन दो मुख्य कारकों पर निर्भर करता है। पहला है विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने और दूसरा है शरीर में मौजूद किसी भी चीज को हटाने से। आपके शरीर में विषाक्त पदार्थों से छुटकारा पाने के दो तरीके हैं। पहला तरीका है कि आप लीवर के कामकाज में सुधार करें, और दूसरा तरीका है कि खूब पसीना बहायें। हमारे शरीर में त्वचा सबसे बड़ा अंग है, और आपके सिस्टम से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिए पसीना सबसे प्रभावी तरीका होता है। जबकि एरोबिक एक्सरसाइज पसीने को निकालने में मददगार साबित होती है। इसलिए पसीने को निकालने के लिए आप एरोबिक एक्सरसाइज कर सकते हैं।