राजधानी दिल्ली-एनसीआर में डेंगू का प्रकोप बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। नवंबर के पहले चार दिनों में ही डेंगू के लगभग 300 मामले सामने आए हैं, जिससे इस साल अब तक वेक्टर जनित इस बीमारी से प्रभावित लोगों की संख्या 2,400 से अधिक हो गई है। अक्तूबर के महीने में 1200 से अधिक लोगों को संक्रमण का शिकार पाया गया था। इसी तरह से लखनऊ में नवंबर के पहले चार दिनों में करीब 161 लोगों में डेंगू की पुष्टि की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से इस गंभीर रोग के मामले बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं, ऐसे में सभी लोगों को लगातार विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। डेंगू के मामले कुछ स्थितियों में गंभीर रोगों का भी कारण बन सकते हैं।
Dengue Risk: दिल्ली में बढ़ा प्रकोप, बुखार मतलब हर बार डेंगू ही नहीं, जानिए वायरल फीवर और इसमें कितना अंतर?
वायरल फीवर और डेंगू के लक्षण
इंटेंसिव केयर के डॉ विक्रमजीत सिंह बताते हैं, डेंगू और सामान्य वायरल संक्रमण के कई लक्षण, शुरुआती दिनों में समान होते हैं, इनका घर पर ही अंतर कर पाना कठिन हो सकता है। दोनों ही संक्रमण में बुखार को सबसे आम लक्षण माना जाता है। इसके अलावा शरीर में थकान और दर्द भी बनी रहती है।
ऐसे में पहले यह समझना जरूरी हो जाता है कि आपको वायरल संक्रमण है या डेंगू की समस्या? यदि सामान्य दवाइयों (पैरासिटामोल) से बुखार में आराम नहीं आता है और इसके लक्षण बढ़ते जाते हैं तो इसे डेंगू का खतरा माना जा सकता है जिसमें जांच की आवश्यकता होती है। डेंगू के बिना बुखार वाले लक्षण भी हो सकते हैं, इस बारे में भी जानना आवश्यक है।
वायरल संक्रमण और डेंगू में कैसे अंतर करें?
वायरल संक्रमण हवा के माध्यम से फैलता है, संक्रमित व्यक्ति के छींकने-खांसने से निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आने या दूषित सतहों को छूने के कारण वायरल संक्रमण और बुखार हो सकता है। जबकि इसका उल्टा डेंगू बुखार, मच्छर के काटने (एडीज इजिप्टी) के कारण होता है, इसके एक से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण का खतरा नहीं होता है।
वायरल बुखार सामान्यत: 3-5 दिनों तक रह सकता है, जबकि डेंगू में बुखार और रोग, एक से दो हफ्तों तक भी बना रहता है। अगर समय पर इलाज न किया जाए तो यह बढ़ भी सकता है और इससे गंभीर रोग का खतरा भी रहता है।
डेंगू के इन विशिष्ट लक्षणों के बारे में जानिए
वायरल फीवर और इसके लक्षण, डेंगू जितने गंभीर नहीं होते हैं और सामान्यत: जल्दी ठीक भी हो जाते हैं, जबकि डेंगू की समस्या कुछ लोगों में गंभीर रोग का भी कारण हो सकती है। सामान्य वायरल फीवर में नाक बहने, गले और शरीर में हल्का दर्द, कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं। वहीं डेंगू के रोगियों को तेज बुखार के साथ शरीर में तेज दर्द, जोड़ों में दर्द और त्वचा पर चकत्ते जैसी दिक्कत हो सकती है। डेंगू के गंभीर मामलों में रक्तस्राव का भी खतरा होता है।
इन दोनों समस्याओं से बचाव के लिए क्या करें?
डेंगू से बचाव के लिए कोई वैक्सीन नहीं है, ऐसे में इससे सुरक्षित रहने के लिए मच्छरों से बचे रहना सबसे जरूरी माना जाता है। पूरी बाजू के शर्ट और फुल पैंट पहनें, जिससे मच्छरों के काटने से बचा जा सके। इसके अलावा सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करना सबसे सुरक्षित माना जाता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाले उपाय डेंगू और वायरल बुखार दोनों से बचाने में आपके लिए मददगार हो सकते हैं। मच्छरों के कारण डेंगू के अलावा मलेरिया और चिकनगुनिया का भी खतरा रहता है, ऐसे में इसके काटने से बचाव करना बहुत जरूरी माना जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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