देशभर के लिए कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले फिलहाल गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं। राजधानी दिल्ली में अकेले पिछले दिन 4000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए, पॉजिटिविटी रेट में भी उछाल देखने को मिला है। कोरोना के बढ़ते मामलों के साथ दिल्ली के लिए वायु की खराब गुणवत्ता भी गंभीर समस्या का कारण बनी हुई है। सोमवार को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान एजेंसी (सफर) दिल्ली की वायु गुणवत्ता को 'बहुत खराब' बताया है। सोमवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 381 दर्ज किया गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मताबिक एक्यूआई का इतना अधिक होना गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
खतरा: बिगड़ रही है दिल्ली में हवा की गुणवत्ता, विशेषज्ञ से जानिए सेहत पर कितना गंभीर हो सकता है इसका असर?
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वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) क्या होता है?
एक्यूआई, रोजाना के हवा की गुणवत्ता रिपोर्टिंग के लिए एक सूचकांक है। यह आपको बताता है कि आपकी हवा कितनी स्वच्छ या अस्वस्थ है और इससे जुड़े प्रभाव कितने चिंताजनक हो सकते हैं। खराब हवा में सांस लेने के कुछ घंटों या दिनों के भीतर अनुभव किए जाने वाले प्रभावों पर एक्यूआई केंद्रित होते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक खराब एक्यूआई में रहने वाले लोगों की सेहत को गंभीर नुकसान होने का जोखिम बना रहता है।
एक्यूआई का सेहत पर प्रभाव
अमर उजाला से एक बातचीत में प्लमोनरी रोगों के विशेषज्ञ डॉ आमिर सिद्दीकी बताते हैं, खराब वाय की गुणवत्ता वाले क्षेत्रों में कुछ समय तक के लिए भी सांस लेना सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। वायु प्रदूषण गंभीर हृदय और श्वसन संबंधी बीमारी, हृदय और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालने के अलावा शरीर में ऑक्सीजन की कमी का कारण तक बन सकती है। इस बारे में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
श्वसन औऱ मानसिक स्वास्थ्य पर हो सकता है बुरा असर
अध्ययनों के मुताबिक वायु प्रदूषण केवल श्वसन ही नहीं मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक माना जाता है। जर्नल पीएनएएस में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार वायु प्रदूषण के संपर्क में लंबे समय तक रहने वाले लोगों में अन्य लोगों की तुलना में डिप्रेशन और अन्य तरह की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम अधिक होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन हिस्सों में वायु प्रदूषण का खतरा अधिक होता है, वहां संभव है कि लोग अवसाद के शिकार भी अधिक हों।
वायु प्रदूषण से बचाव कैसे करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वायु प्रदूषण से बचे रहने के लिए सभी लोगों को नियमित रूप से बाहर जाते समय मास्क पहनकर रखना आवश्यक है। अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें, घर के भीतर ही व्यायाम करें, कमरे में वेंटिलेशन की अच्छी व्यवस्था रखें। इनडोर प्रदूषण सेहत के लिए और भी नुकसानदायक होता है, ऐसे में कमरे में स्वच्छ हवा की व्यवस्था सुनिश्चित करें। वायु प्रदूषण के जोखिमों को नजरअंदाज न करें।
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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।