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खतरा: बिगड़ रही है दिल्ली में हवा की गुणवत्ता, विशेषज्ञ से जानिए सेहत पर कितना गंभीर हो सकता है इसका असर?

Mon, 03 Jan 2022 05:54 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 03 Jan 2022 05:54 PM IST
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Delhi's air quality remains very poor, how bad it is for health
वायु प्रदूषण ने बढ़ाई मुश्किलें - फोटो : istock

देशभर के लिए कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले फिलहाल गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं। राजधानी दिल्ली में अकेले पिछले दिन 4000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए, पॉजिटिविटी रेट में भी उछाल देखने को मिला है। कोरोना के बढ़ते मामलों के साथ दिल्ली के लिए वायु की खराब गुणवत्ता भी गंभीर समस्या का कारण बनी हुई है। सोमवार को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान एजेंसी (सफर) दिल्ली की वायु गुणवत्ता को 'बहुत खराब' बताया है। सोमवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 381 दर्ज किया गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मताबिक एक्यूआई का इतना अधिक होना गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।



विशेषज्ञों के मताबिक 0 से 50 के बीच की एक्यूआई को "अच्छा", 51 से 100 के बीच की गुणवत्ता को संतोषजनक, 101 से 200 के बीच को मध्यम, 201 से 300 के बीच को खराब, 301 से 400 के बीच को बहुत खराब और 401 से 500 के बीच को गंभीर माना जाता है। राजधानी दिल्ली में पिछले कुछ समय से एक्यूआई खराब-बेहद खराब की श्रेणी में बना हुआ है। आइए आगे की स्लाइडों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों से जानते हैं कि एक्यूआई का बढ़ना क्यों गंभीर है तथा सेहत पर इसके क्या प्रभाव हो सकते हैं?

Delhi's air quality remains very poor, how bad it is for health
सेहत के नुकसानदायक है वायु प्रदूषण का बढ़ना - फोटो : ANI

वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) क्या होता है?
एक्यूआई, रोजाना के हवा की गुणवत्ता रिपोर्टिंग के लिए एक सूचकांक है। यह आपको बताता है कि आपकी हवा कितनी स्वच्छ या अस्वस्थ है और इससे जुड़े प्रभाव कितने चिंताजनक हो सकते हैं। खराब हवा में सांस लेने के कुछ घंटों या दिनों के भीतर अनुभव किए जाने वाले प्रभावों पर एक्यूआई केंद्रित होते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक खराब एक्यूआई में रहने वाले लोगों की सेहत को गंभीर नुकसान होने का जोखिम बना रहता है।

Delhi's air quality remains very poor, how bad it is for health
फेफड़ों पर वायु प्रदूषण का असर - फोटो : iStock

एक्यूआई का सेहत पर प्रभाव
अमर उजाला से एक बातचीत में प्लमोनरी रोगों के विशेषज्ञ डॉ आमिर सिद्दीकी बताते हैं, खराब वाय की गुणवत्ता वाले क्षेत्रों में कुछ समय तक के लिए भी सांस लेना सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। वायु प्रदूषण गंभीर हृदय और श्वसन संबंधी बीमारी, हृदय और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालने के अलावा शरीर में ऑक्सीजन की कमी का कारण तक बन सकती है। इस बारे में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

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Delhi's air quality remains very poor, how bad it is for health
मानसिक स्वास्थ्य भी हो सकता है प्रभावित - फोटो : Pixabay

श्वसन औऱ मानसिक स्वास्थ्य पर हो सकता है बुरा असर
अध्ययनों के मुताबिक वायु प्रदूषण केवल श्वसन ही नहीं मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक माना जाता है। जर्नल पीएनएएस में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार वायु प्रदूषण के संपर्क में लंबे समय तक रहने वाले लोगों में अन्य लोगों की तुलना में डिप्रेशन और अन्य तरह की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम अधिक होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन हिस्सों में वायु प्रदूषण का खतरा अधिक होता है, वहां संभव है कि लोग अवसाद के शिकार भी अधिक हों।

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प्रदूषण से बचाव करना जरूरी - फोटो : Pixabay

वायु प्रदूषण से बचाव कैसे करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वायु प्रदूषण से बचे रहने के लिए सभी लोगों को नियमित रूप से बाहर जाते समय मास्क पहनकर रखना आवश्यक है। अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें, घर के भीतर ही व्यायाम करें, कमरे में वेंटिलेशन की अच्छी व्यवस्था रखें। इनडोर प्रदूषण सेहत के लिए और भी नुकसानदायक होता है, ऐसे में कमरे में स्वच्छ हवा की व्यवस्था सुनिश्चित करें। वायु प्रदूषण के जोखिमों को नजरअंदाज न करें।


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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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