इस तेजी से भागती दुनिया में हम चाहते-न चाहते मोबाइल और कंप्यूटर जैसे गैजेट्स के 'गुलाम' हो गए हैं। ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन क्लास हो या दोस्तों से बातचीत, हम दिनभर इनसे घिरे रहते हैं। धीरे-धीरे यह आदत इतनी बढ़ गई है कि सूरज की रोशनी, ताजी हवा और बाहर की दुनिया से हमारा संपर्क कम होता जा रहा है।
Alert: मोबाइल-कंप्यूटर का ज्यादा इस्तेमाल कहीं आपको समय से पहले बूढ़ा न बना दे? अभी से हो जाइए सावधान
- शोध के आधार पर बताया कि आपके फोन, कंप्यूटर और घरेलू उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी के लंबे समय तक संपर्क में रहने से आपकी लंबी उम्र प्रभावित हो सकती है, जल्दी बुढ़ापा आ सकता है।
Please wait...
'कमरे के भीतर बीतता समय खतरनाक'
पहले भी कई अध्ययनों में कहा जाता रहा है कि घर-ऑफिस में बैठकर घंटों काम करने से शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, जिससे मोटापा, हार्ट रोग और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं। साथ ही बाहर की प्राकृतिक रोशनी की कमी शरीर में विटामिन-डी की कमी भी पैदा कर सकती है, जो हड्डियों और इम्युनिटी को कमजोर करती है।
इन दुष्प्रभावों के साथ अगर आपका ब्लू लाइट वाली चीजों से संपर्क भी अधिक हो रहा है तो ये और भी चिंताएं बढ़ाने वाला है।
अध्ययन में क्या पता चला?
अमेरिका की ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर जगा गिबुल्टोविक्ज ने एक शोध के आधार पर बताया कि आपके फोन, कंप्यूटर और घरेलू उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी के लंबे समय तक संपर्क में रहने से आपकी लंबी उम्र प्रभावित हो सकती है, जल्दी बुढ़ापा आ सकता है। ये नीली रोशनी रेटिना के साथ-साथ मस्तिष्क की कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाती है।
एजिंग एंड मैकेनिज्म्स ऑफ डिजीज जर्नल में प्रकाशित ये अध्ययन पशुओं पर किया गया है। मक्खियों के ब्लू लाइट से संपर्क के साथ उनके शरीर के बायोलॉजिकल क्लॉक पर भी नजर रखा गया।
निष्कर्ष में पाया गया कि इस रोशनी ने उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर दिया। जिन मक्खियों को प्रतिदिन 12 घंटे प्रकाश और 12 घंटे अंधेरे में रखा गया, उनकी आयु पूर्ण अंधकार में रखी गई मक्खियों या नीली तरंगदैर्घ्य को फिल्टर करके प्रकाश में रखी गई मक्खियों की तुलना में कम थी। नीली रोशनी के संपर्क में आने वाली मक्खियों की रेटिना कोशिकाओं और मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को नुकसान पहुंचा और उनकी गतिशीलता में कमी आई।
नींद पर असर और मोटापे का खतरा
इसी तरह से एजिंग एंड मैकेनिज्म ऑफ डिजीज में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, हर किसी को अपनी सर्कैडियन क्लॉक को नियंत्रण में रखने के लिए प्राकृतिक प्रकाश की आवश्यकता होती है। सर्केडियन क्लॉक हमारे शरीर का ही एक सिस्टम है जो सोने-जागने के चक्र, हार्मोन उत्पादन, शरीर के तापमान और अन्य शारीरिक कार्यों को नियंत्रित करती है।
शोध में ऐसे भी प्रमाण मिले हैं कि कृत्रिम नीली रोशनी के संपर्क में आना नींद के पैटर्न के लिए हानिकारक हो सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं, जब नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है, तो वजन भी बढ़ सकता है। पहले भी कई शोध बताते रहे हैं कि मोटापा त्वरित उम्र बढ़ने और आपकी उम्र को प्रभावित करने वाला हो सकता है।
त्वचा पर दिखने लगता है बुढ़ापा
विशेषज्ञ कहते हैं, नींद संबंधी समस्याओं के अलावा, नीली रोशनी त्वचा कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाती है। शोध बताते हैं कि दिन में 12 घंटे नीली रोशनी के संपर्क में रहने से उम्र बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है, और संभवतः त्वचा कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंच सकता है।
इससे उम्र से पहले ही झुर्रियां और त्वचा पर दाग-धब्बे हो सकते हैं। इससे त्वचा में सूजन, रंग में बदलाव और लालिमा की समस्या भी हो सकती है। अगर आप लगातार कंप्यूटर और फोन व अन्य उपकरणों से निकलने वाली कृत्रिम नीली रोशनी के उच्च स्तर के संपर्क में रहते हैं, तो आपकी उम्र बहुत जल्दी बढ़ने की संभावना है।
----------------------------
स्रोत
Daily blue-light exposure shortens lifespan and causes brain neurodegeneration in Drosophila
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।