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कोविड से जंग: भारत में अब बच्चों का भी होगा टीकाकरण, इन देशों में पहले से दी जा रही है वैक्सीन

Tue, 12 Oct 2021 03:22 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 12 Oct 2021 03:22 PM IST
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covid vaccination of children in India, all about vaccine
बच्चों का वैक्सीनेशन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

Medically Reviewed By-


डॉ राजन गांधी
बाल रोग विशेषज्ञ और फिजीशियन
उजाला सिग्नस हॉस्पिटल, कानपुर



कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान वायरस में म्यूटेशन के कारण लोगों में कोविड-19 से संबंधित कई गंभीर जटिलताएं देखने को मिली थीं। दूसरी लहर के दौरान सभी उम्र के लोगों में इसके लक्षण देखने को मिले थे। देश में संभावित तीसरी लहर को लेकर लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल है। कई रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है कि तीसरी लहर का असर बच्चों में अधिक देखने को मिल सकता है। इस बीच बच्चों को कोरोना से सुरक्षा देने के लिए देश में कोवाक्सिन के आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिल गई है। अब 2 से 18 साल की आयु वाले बच्चों को कोवाक्सीन की खुराक दी जा सकेगी। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों का टीकाकरण न केवल उनके भविष्य की रक्षा के लिए, बल्कि हर्ड इम्यूनिटी विकसित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। आइए इस लेख में जानते हैं कि
भारत से पहले किन देशों में बच्चों को कोरोना के वैक्सीन देने की शुरुआत कर दी थी?

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12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों का टीकाकरण (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTi
इन देशों में बच्चों को दी जा रही है वैक्सीन
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) से अनुमति मिलने के बाद अमेरिका में मई के मध्य से 12 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बच्चों को फाइजर वैक्सीन देने की शुरुआत हो चुकी है। इसके अलावा चिली, कनाडा, जापान और इटली ने भी 12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए फाइजर वैक्सीन को मंजूरी दी है। वहीं दुबई और फिलीपींस ने आपातकालीन उपयोग के लिए इस वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। 
 
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फाइजर वैक्सीन का बच्चों में प्रभाव - फोटो : social media
क्या फाइजर वैक्सीन बच्चों में असरदार है?
न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार वैज्ञानिकों ने फाइजर वैक्सीन के बच्चों में काफी असरदार प्रभाव देखे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक टीके की दोनों खुराक लेने के सात दिनों के बाद बच्चों में वैक्सीन की प्रभाविकता 100 फीसदी के करीब देखी गई है।  2,260 बच्चों पर किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि फाइजर वैक्सीन लेने के बाद बच्चों में इसके अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।
 
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बच्चों में कोवैक्सीन का ट्रायल शुरू - फोटो : PTI
भारत में बच्चों की वैक्सीन
देश में लंबे समय से बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन का इंतजार हो रहा था। इस बीच मंगलवार को ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने बच्चों के लिए भी टीकाकरण को मंजूरी दे दी है। जानकारी के तहत भारत सरकार ने दो से 18 साल तक के बच्चों के लिए कोवाक्सिन के आपात इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। इसके बाद कोवाक्सिन देश की ऐसी पहली वैक्सीन बन गई है, जिसे 12 साल से कम आयु के बच्चों पर आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिली हो। बच्चों के टीकाकरण के लिए जल्द ही केंद्र सरकार की ओर से दिशानिर्देश आने का इंतजार है।
 
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बच्चों के लिए तीसरी लहर में खतरा क्यों अधिक? - फोटो : iStock

क्या तीसरी लहर बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकती है?
बच्चों को लेकर जताई जा रही चिंता के बारे में जानने के लिए अमर उजाला ने उजाला सिग्नस हॉस्पिटल कानपुर में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ राजन गांधी से बात की। डॉ राजन बताते हैं कि कोरोना की तीसरी में बच्चों को लेकर चिंता करने का मुख्य कारण है कि देश में फिलहाल बच्चों को कोरोना की वैक्सीन नहीं दी जा रही है। तीसरी लहर और कोरोना के अन्य वेरिएंट्स के आते-आते देश में 18 साल के ऊपर के ज्यादातर लोगों का टीकाकरण हो चुका होगा, ऐसे में जिन लोगों को वैक्सीन नहीं लगी होगी, उनमें संक्रमण का खतरा स्वाभाविक रूप से ज्यादा होगा।

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नोट: यह लेख उजाला सिग्नस हॉस्पिटल कानपुर में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ राजन गांधी से बातचीत और मीडिया रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है।  डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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