राजधानी दिल्ली में एक बार फिर से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों से पता चलता है कि दैनिक रूप से केस दो हजार के आंकड़े पार कर रहे हैं। अध्ययनों में भले ही कोरोना के नए वैरिएंट्स की प्रकृति को हल्का बताया जा रहा है पर पिछले दिनों दिल्ली में संक्रमण के कारण मरने वालों के आंकड़ों में तीन गुना तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा पॉजिटिविटी रेट भी बढ़कर 17 फीसदी के ऊपर हो गया है। गौरतलब है कि दूसरी लहर के दौरान दिल्ली में पॉजिटिविटी रेट 10 फीसदी से ऊपर होने पर सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी।
Covid In Delhi: जनवरी के बाद पॉजिटिविटी रेट 17% के पार, मौत के मामले तीन गुना बढ़े, क्या फिर लगेगा लॉकडाउन?
दिल्ली में बिगड़ते हालात
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में अगस्त के महीने में अब तक कोविड के कारण 40 मौतें हो चुकी हैं। यह जुलाई महीने के पहले दस दिनों की तुलना में अगस्त के पहले दस दिनों की तुलनात्मक रिपोर्ट है जिसमें मृत्यु के आंकड़े तीन गुना तक अधिक देखे गए हैं। जुलाई के पहले 10 दिनों में 14 लोगों की मौत हुई थी। दिल्ली में अब तक कोरोना संक्रमण के कारण कुल 26 हजार से अधिक लोग जान गवां चुके हैं। कोरोना के कारण मौत के एक बार फिर से बढ़ते हुए मामले लोगों के लिए काफी डराने वाले हैं।
सकारात्मकता दर 17% के पार
दिल्ली में कोविड पॉजिटिविटी रेट का बढ़ना भी गंभीर स्थिति का सूचक माना जा रहा है। पिछले एक सप्ताह के रोजाना के डेटा पर नजर डालें तो पता चलता है कि इस दौरान संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं, दैनिक सकारात्मकता दर 17 को पार कर रही है। पिछले रविवार को शहर में कोरोना के कारण छह मौतें हुईं जिसमें सकारात्मकता दर बढ़कर 17.85 प्रतिशत हो गई, जो 21 जनवरी के बाद सबसे अधिक है। ताजा संक्रमण और मृत्यु के साथ, दिल्ली का केसलोड बढ़कर 19,73,394 हो गया है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
कोरोना के बिगड़ते हालात की गंभीरता को समझने के लिए हमने ग्रेटर नोएडा स्थित डॉ श्रेय श्रीवास्तव (असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेल मेडिसिन) से संपर्क किया। डॉ श्रेय ने दूसरी लहर के दौरान 105 साल की महिला को कोविड संक्रमण से ठीक किया था। डॉ श्रेय कहते हैं, दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों के लिए ओमिक्रॉन के बीए सब वैरिएंट्स को प्रमुख कारण के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि ये वैरिएंट्स अधिक गंभीर नहीं हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि अगर वैरिएंट्स गंभीर नहीं हैं तो कोरोना के कारण मृ्त्यु दर और संक्रामकता क्यों तेजी से बढ़ती देखी जा रही है? इस बारे में डॉ श्रेय बताते हैं, जिन लोगों की हाल ही में कोविड से मौत हुई है उनमें से ज्यादातर लोग कोमोरबिडिटी के शिकार थे। कोमोरबिडिटी अब भी आपमें कोरोना के संक्रमण का प्रमुख जोखिम कारक माना जा रहा है, इसमें भी अगर आप मोटापे के शिकार हैं तो यह खतरा और भी बढ़ जाता है।
क्या फिर से लगाई जा सकती हैं पाबंदियां?
क्या एक बार फिर दिल्ली में लॉकडाउन जैसे हालात बन रहे हैं इस बारे में डॉ श्रेय कहते हैं कि कोरोना के नए वैरिएंट्स की प्रभाविकता कम है, इसका सभी लोगों में खतरा नहीं देखा जा रहा है। कुछ स्थितियां आपके जोखिम कारकों को जरूर बढ़ा देती हैं जैसे कोमोरबिडीटी, इम्युनिटी में कमजोरी या वैक्सीनेशन न कराना आदि। सरकार ने सभी लोगों को मास्क लगाना भी अनिवार्य कर दिया है जो बेहतर कदम है।
कोरोना से बचाव के उपायों को प्रयोग में लाकर आप खुद और आसपास के लोगों को संक्रमण के खतरे से सुरक्षित रख सकते हैं। इस मौसम में कई प्रकार के और वायरल संक्रमण चल रहे हैं जो कोरोना की गंभीरता को बढ़ा रहे हैं, केस बढ़ने का यही कारण माना जा रहा है। फिलहाल फिर से पाबंदियां लगाने जैसे हालात बिल्कुल नही हैं न ही भविष्य में इसकी फिलहाल कोई आशंका है, बस सभी को खुद से सुरक्षा के उपाय करने चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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