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Covid Booster Dose: कोरोना से बचा रही बूस्टर डोज, जानें वैक्सीन की तीसरी खुराक क्यों है जरूरी

Wed, 17 Aug 2022 11:58 AM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Wed, 17 Aug 2022 11:58 AM IST
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Covid Booster Shot Effectiveness: 90 Percent Corona Patients Admitted in Hospital Does not take Booster Dose
कोविड बूस्टर डोज क्यों जरूरी है? - फोटो : istock

कोरोना महामारी के जोखिम से बचाव के लिए कोविड 19 वैक्सीन की अतिरिक्त बूस्टर डोज को कारगर माना जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहले ही अधिक जोखिम वाले समूहों जैसे स्वास्थ्य कर्मियों, 60 साल से अधिक आयु के लोगों या इम्युनो कॉम्प्रोमाइजिंग स्थितियों के लोगों के लिए mRNA कोविड 19 वैक्सीन की अतिरिक्त बूस्टर डोज के फायदेमंद होने का दावा किया था। जिसके बाद अब दिल्ली में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को लेकर जो रिपोर्ट सामने आई है, वह इन दावों को सच साबित करती है। दिल्ली में तेजी से कोरोना फैल रहा है। इस बीच अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों को लेकर एक नया खुलासा हुआ है। जितने भी कोविड मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, उनमें से 90 फीसदी लोगों ने कोरोना वैक्सीन की सिर्फ दो ही डोज ली हैं, यानी इन मरीजों को बूस्टर डोज नहीं लगी है। वहीं 10 फीसदी कोरोना मरीज बूस्टर डोज के बाद संक्रमित हुए हैं। इस आंकड़े से पता चलता है कि कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज लगवाने वाले लोग अन्य की अपेक्षा महामारी से ज्यादा सुरक्षित हैं। चलिए जानते हैं कि कोविड की बूस्टर डोज कब और किसको लगाई जा सकती है, साथ ही कोरोना वायरस पर कितनी असरदार है कोविड वैक्सीन की तीसरी खुराक।

Covid Booster Shot Effectiveness: 90 Percent Corona Patients Admitted in Hospital Does not take Booster Dose
कोविड बूस्टर डोज क्या है - फोटो : istock

बूस्टर डोज क्या है?

कोरोना महामारी से बचाव के लिए लोगों को कोविड 19 वैक्सीन की दो खुराक लगाई जाती हैं। इन दो खुराक के बाद अब जो तीसरी खुराक दी जा रही है, उसे ही बूस्टर डोज कहते हैं। बूस्टर डोज रोग निरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करती है। इसे प्रिकाॅशन डोज या एहतियातन डोज भी कह सकते हैं।

Covid Booster Shot Effectiveness: 90 Percent Corona Patients Admitted in Hospital Does not take Booster Dose
बूस्टर खुराक कब लग सकती है - फोटो : Istock

कब लगवाएं बूस्टर डोज?

एक सामान्य सिद्धांत के मुताबिक, वैक्सीन की प्राइमरी सीरीज पूरी होने के 4-6 महीने बाद बूस्टर दी जा सकती है। यह खास तौर पर ओमिक्रॉन के संदर्भ में है। भारत सरकार ने हाल ही बूस्टर डोज लगवाने का अंतराल कम कर दिया है। पहले दूसरी डोज दिए जाने के 9 महीने बाद बूस्टर डोज लगवा सकते थे। लेकिन अब इसे कम करके 6 महीने कर दिया गया है। जिन लोगों को दूसरी डोज लगवाए 6 महीने हो गए हैं, वह बूस्टर डोज ले सकता है।

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Covid Booster Shot Effectiveness: 90 Percent Corona Patients Admitted in Hospital Does not take Booster Dose
15-18 आयु वर्ग के किशोर-किशोरियों को वैक्सीन - फोटो : पीटीआई

कौन लगवा सकता है बूस्टर डोज?

पहले केवल बुजुर्गों के लिए बूस्टर डोज जरूरी बताई गई थी, लेकिन अप्रैल से भारत सरकार ने बूस्टर डोज का दायरा बढ़ाने का फैसला लिया। अब 18 साल से अधिक आयु का हर शख्स बूस्टर डोज लगवा सकता है। अगर आप कोरोना से संक्रमित हुए हैं तो ठीक होने के तुरंत बाद वैक्सीन या बूस्टर डोज नहीं लगवा सकते हैं। कोरोना से रिकवरी के तीन महीने बाद ही आप बूस्टर डोज ले सकते हैं।

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Covid Booster Shot Effectiveness: 90 Percent Corona Patients Admitted in Hospital Does not take Booster Dose
बूस्टर डोज का असर - फोटो : Social Media

कितनी असरदार है बूस्टर डोज?

एक अध्ययन के मुताबिक, समय के साथ कोरोना वायरस के खिलाफ व्यक्ति की इम्युनिटी कम होने लगती है। ऐसे में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए बूस्टर डोज जरूरी है। बीते मार्च में राज्यसभा में स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ. भारती पवार ने बूस्टर डोज के असर को लेकर कहा कि एस्ट्राजेनेका या कोविशील्ड की तीसरी डोज को लेकर जो अंतरराष्ट्रीय डेटा सामने आया है, उसके मुताबिक वैक्सीन की तीसरी डोज लेने वालों की एंटीबॉडी में 3 से 4 गुना की बढ़ोतरी हुई है।

बिना बूस्टर डोज लेने वाले 90 फीसदी लोगों के संक्रमित होने पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का कहना है कि कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज लगवाने लोग अन्य की अपेक्षा महामारी से ज्यादा सुरक्षित हैं। इसलिए दिल्लीवासियों को कोरोना से सुरक्षित रखने के लिए एहतियाती खुराक के टीकाकरण की गति बढ़ा दी गई है।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
 

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