पूरी दुनिया पिछले दो साल से कोरोना संक्रमण के कहर से परेशान है। दिसंबर 2019 में देश में पहली बार कोरोना के मामले सामने आए। एक साल के भीतर दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने मिलकर कोरोना से मुकाबले के लिए वैक्सीन तैयार कर ली। 16 जनवरी 2021 को भारत में टीकाकरण की शुरुआत हुई। आज देश में टीकाकरण अभियान को एक साल पूरे हो रहे हैं। देश में अब तक 156 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक डोज मिल चुकी है। अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है, उनमें संक्रमण की गंभीरता और इसके कारण होने वाली मौत का खतरा कम होता है।
One year of vaccination: देश में इन आठ टीकों को मिल चुकी है मंजूरी, जानिए कौन सी वैक्सीन कितनी असरदार?
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कोविशील्ड वैक्सीन
भारत में जिन वैक्सीन को सबसे ज्यादा प्रयोग में लाया जा रहा है उसमें कोविशील्ड सबसे ऊपर है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और ब्रिटिश-स्वीडिश कंपनी एस्ट्राजेनेका द्वारा सह-विकसित इस टीके को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) द्वारा तैयार किया गया है। एडेनोवायरस तकनीक पर आधारित इस टीके की दो खुराक दी जाती हैं जो कोरोनवायरस के स्पाइक प्रोटीन को लक्षित करके उसे बेअसर करती है। अध्ययनों में इस वैक्सीन को कोरोनावायरस के खिलाफ 65-70 फीसदी तक कारगर पाया गया है।
कोवाक्सिन वैक्सीन
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के सहयोग से हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक द्वारा विकसित दूसरी स्वदेशी वैक्सीन कोवाक्सिन को कोरोनावायरस के खिलाफ असरदार माना जा रहा है। अध्ययनों में गंभीर बीमारी के खिलाफ इस वैक्सीन की प्रभावकारिता 93 पाई गई है। 60 वर्ष से कम आयु के लोगों में इसे 79 फीसदी जबकि 60 वर्ष और उससे अधिक आयु वालों में इसे 68 फीसदी कारगर माना जा रहा है।
रूस की स्पुतनिक-वी वैक्सीन
भारत ने रूस के गामालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित स्पुतनिक-वी वैक्सीन को देश में पहली विदेशी वैक्सीन के रूप में स्वीकृति दी। एड 5 और एड 26 नामक दो एडेनोवायरस के संयोजन का उपयोग करके इस वैक्सीन को तैयार किया गया है, जो कोरोनावायरस के खिलाफ शरीर में मजबूत प्रतिरक्षा विकसित करने वाली मानी जा रही है। अध्ययनों में इस वैक्सीन को कोरोनावायरस के खिलाफ 97.2 फीसदी तक असरदार पाया गया है।
जाइकोब-डी वैक्सीन
अहमदाबाद स्थित जायडस कैडिला कंपनी द्वारा निर्मित जाइकोब डी वैक्सीन, दुनिया की पहली डीएनए आधारित वैक्सीन है, इसकी तीन खुराक देनी की जरूरत होती है। यह तीसरी स्वदेशी वैक्सीन है। अध्ययनों में इस वैक्सीन को बच्चों के लिए भी कारगर माना जा रहा है। इस वैक्सीन की खास बात यह है कि दूसरे टीकों से इतर इस वैक्सीन के लिए इंजेक्शन की जगह जेट एप्लीकेटर का उपयोग किया जाता है। कोरोना के बेहद घातक माने जा रहे डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ इस टीके को 67 फीसदी तक असरदार पाया गया है।