कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच इसका इलाज ढूंढने के लिए तरह-तरह के शोध किए जा रहे हैं। अबतक पहले से उपलब्ध दवाओं के जरिए कोरोना के लक्षणों का इलाज किया जा रहा है। हालांकि अबतक इसकी कोई निश्चित दवा मौजूद नहीं है। इस बीच चीन और अमेरिका के शोधकर्ताओं ने मिलकर दो ऐसे बैक्टीरिया खोजे हैं जो खास तरह का प्रोटीन बनाते हैं। इस खास प्रोटीन में कोरोना वायरस के अलावा डेंगू और एचआईवी एड्स के वायरस को भी निष्क्रिय करने की क्षमता होती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, एंटीवायरल ड्रग बनाने में इसका प्रयोग किया जाएगा।
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इस मच्छर के बैक्टीरिया से कोरोना वायरस को खत्म करने की तैयारी, शोध में लगे हैं वैज्ञानिक
Wed, 27 May 2020 12:01 PM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Wed, 27 May 2020 12:01 PM IST
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एंटीवायरल ड्रग बनाने में बैक्टीरिया का प्रयोग किया जाएगा
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
इस प्रजाति के मच्छर में मिला बैक्टीरिया
- हेल्थ जर्नल BioRxiv में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक, शोधकर्ताओं को एडीज एजिप्टी प्रजाति के मच्छर के अंदर ये बैक्टीरिया मिले हैं। शोधकर्ताओं ने बैक्टीरिया के जीनोम सीक्वेंस का विश्लेषण किया और फिर उसमें से निकलने वाले प्रोटीन की पहचान की गई। शोधकर्ताओं का दावा है कि इस प्रोटीन में कई तरह के वायरस को निष्क्रिय करने की क्षमता है।
कोरोना वायरस
- फोटो : PIB
पहले भी हो चुके हैं शोध
- शोधकर्ताटों ने जिस बैक्टीरिया को खोजा है, उसका प्रोटीन, लाइपेज एंजाइम से लैस है। लाइपेज, प्रोटीन वायरस को निष्क्रिय करने में कारगर बताया जा रहा है। साल 2010 में भी एक शोध हुआ था, जिसमें पाया गया था कि लिपोप्रोटीन लाइपेज नाम का रसायन हेपेटाइटिस-सी वायरस को निष्क्रिय कर देता है।
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वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Social media
कई वायरस को निष्क्रिय करने में कारगर
- साल 2017 में हुए एक शोध के मुताबिक, नाजा मोसाम्बिका नाम के सांप के जहर में भी फॉस्फो लाइपेज प्रोटीन मिला, जो हेपेटाइटिस-सी, डेंगू और जापानी इन्सेफेलाइटिस को निष्क्रिय करता है।
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वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
पिछले दिनों हुए एक शोध के मुताबिक, कोविड महामारी के इलाज के बावजूद भी कोरोना वायरस फेफड़ों में लंबे समय तक छिपा रह सकता है। चीन में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें अस्पताल से छुट्टी के 70 दिन बाद भी मरीज पॉजिटिव मिले हैं। साउथ कोरिया, मकाऊ, ताइवान, वियतनाम में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।