कोरोना वायरस के कारण बढ़ते संक्रमण के मामलों ने दुनियाभर की चिंता बढ़ाई है। कोरोना संक्रमण से हर दिन होने वाली मौत का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। पिछले कुछ दिनों में कई ऐसी हृदयविदारक तस्वीरें सामने आईं, जिनमें कोरोना संक्रमित की मौत के बाद उनके परिवार के सदस्यों को दूर से ही अंतिम विदाई देनी पड़ी। कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां बवाल या हंगामे की वजह से शव को दफनाने या अंतिम संस्कार में देरी हुई। लोगों को बस डर था कि इससे कोरोना फैल जाएगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसमें कितनी सच्चाई है?
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Coronavirus: क्या 'डेड बॉडी' यानी इंसानी शवों से भी फैलता है कोरोना संक्रमण? यहां समझें विस्तार से
Fri, 07 Aug 2020 12:14 AM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Fri, 07 Aug 2020 12:14 AM IST
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कोरोना संक्रमित की मौत (File Photo)
- फोटो : PTI
कोरोना संक्रमित की मौत (File Photo)
- फोटो : social media
दरअसल, कोरोना मरीजों के अंतिम संस्कार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर दिशानिर्देश तय किए गए हैं। पीपीई किट्स से लैस होकर ही अंतिम संस्कार किया जा सकता है। इसके अलावा रिश्तेदारों को भी सुरक्षा बरतते हुए ही शव देखने की इजाजत है। हालांकि बहुत पास जाने या छूने की अनुमति नहीं। कारण कि लोगों में गलत धारणा बैठी हुई है कि शव के पास रहने से कोरोना संक्रमण हो सकता है। हालांकि यह पूरी तरह सच नहीं है। स्वास्थ्य रिपोर्टों के मुताबिक, मानव शव वायरस कैरियर नहीं है।
शवों से संक्रमण फैलने की बात पूरी तरह सच नहीं है
- फोटो : PTI
- देश में कोरोना मरीजों से भेदभव वाली कई घटनाएं सामने आई हैं। लोगों का मरीजों से दूरी बनाना तो ठीक है, लेकिन उनका बहिष्कार नहीं करना चाहिए। कई जगह कोरोना मरीजों का अंतिम संस्कार तक करने नहीं दिया गया। जबकि शवों से संक्रमण फैलने की बात पूरी तरह सच नहीं है। हां, मरने के बाद इंसानी शरीर के तरल पदार्थ जैसे खून, सलाइव, बलगम आदि में वायरस हो सकता है। इसीलिए अंतिम संस्कार को लेकर दिशानिर्देश निर्धारित किए गए हैं।
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पेन ड्राइव(सांकेतिक तस्वीर)
वायरस तो पेन ड्राइव की तरह होता है
- द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता में जीवविज्ञानी और शिक्षक डॉ. अनिर्बान मित्रा कहते हैं वायरस एक पेन ड्राइव की तरह काम करता है। इसका केवल यूएसबी कनेक्टर ही बाहर होता है, जिसे डाटा ट्रांसफर के लिए लैपटॉप या कंप्यूटर से जोड़ना पड़ता है। पेन ड्राइव में कितना भी डेटा क्यों न हो, लेकिन यूएसबी पोर्ट में इसे कनेक्ट किए बिना इसका कोई यूज नहीं। ऐसा किए बिना डाटा ट्रांसफर नहीं हो सकता।
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कोरोना वायरस की आकृति बनाता एक कलाकार(File Photo)
- फोटो : पीटीआई
- अनिर्बान मित्रा के मुताबिक, कोरोना वायरस भी एक पेन ड्राइव की तरह है। इस वायरस के भीतर आरएनए (RNA) होता है, जो एक तरह का ब्लूप्रिंट होता है। यही शरीर में प्रवेश करने के बाद अपनी कॉपी यानी प्रतिकृति यानी कहा जाए कि अपनी संख्या बढ़ाता है। ऐसा करने के लिए वायरस का रिसेप्टर प्रोटीन से जुड़ना जरूरी है। शव में अगर कोरोना वायरस है भी तो वह निष्क्रिय शरीर से भला फैलेगा कैसे!